Raw Jute पर सख्त नियम, कच्चे जूट के व्यापारियों और गाँठ बनाने वालों को इस तारीख़ तक जूट मिलों को बेचना होगा पूरा स्टॉक
Gaon Connection | Apr 21, 2026, 11:29 IST
कच्चे जूट के व्यापारियों के लिए सरकार ने स्टॉक की सीमा को पूरी तरह से हटा दिया है। यह निर्णय जूट मिलों के लिए कच्चे जूट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। सभी व्यापारियों को 5 मई 2026 तक अपने कच्चे जूट का स्टॉक बेचना होगा।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट जीरो
देश में कच्चे जूट की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कच्चे जूट के व्यापारियों, बेलर और अन्य स्टॉकधारकों के लिए जूट स्टॉक सीमा घटाकर शून्य कर दी है। यानी अब व्यापारियों और गांठ बनाने वालों को अपने पास रखा पूरा स्टॉक जूट मिलों को बेचना होगा। यह फैसला जूट उद्योग को कच्चा माल उपलब्ध कराने, उत्पादन बनाए रखने और लाखों श्रमिकों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। यह आदेश जूट आयुक्त द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना के तहत लागू किया गया है।
पिछले कुछ महीनों में कच्चे जूट की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। कीमतें वर्ष 2025-26 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर चली गई हैं। इससे जूट मिलों और उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों ने कच्चे जूट की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई थी। सरकार को आशंका थी कि कुछ कारोबारी जमाखोरी कर रहे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी बन रही है। इसी को रोकने के लिए स्टॉक सीमा में सख्ती की गई है।
सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए नई स्टॉक सीमा तय की है:
1. पंजीकृत बेलिंग प्रेस वाले कच्चे जूट बेलर- जिनके परिसर में बेलिंग प्रेस है और वे जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत हैं, उनके लिए स्टॉक सीमा शून्य कर दी गई है। इन्हें 5 मई 2026 तक अपने पास मौजूद पूरा स्टॉक बेच देना होगा। 15 मई 2026 तक खरीदारों को भौतिक आपूर्ति पूरी करनी होगी।
2. अन्य स्टॉकधारक और गैर-पंजीकृत गांठ बनाने वाले- जो जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत नहीं हैं या जिनके पास बेलिंग मशीन नहीं है, उनके लिए भी स्टॉक सीमा शून्य तय की गई है।
3. जूट मिलें और प्रोसेसिंग यूनिट- जूट मिलों और प्रसंस्करण इकाइयों को वर्तमान उत्पादन दर के हिसाब से अधिकतम 45 दिनों की खपत जितना स्टॉक रखने की अनुमति होगी।
सरकार ने सभी स्टॉकधारकों के लिए निर्देश दिया है कि वे जूट स्मार्ट पोर्टल पर हर पखवाड़े अपने स्टॉक की जानकारी अपडेट करें। इससे सरकार को यह पता चलता रहेगा कि किसके पास कितना माल है और कहीं जमाखोरी तो नहीं हो रही। सरकार ने साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई होगी। अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे गोदामों और परिसरों का निरीक्षण करें तथा सीमा से अधिक पाए गए स्टॉक को जब्त कर सकें। झूठी जानकारी देने, स्टॉक छिपाने या नियमों का पालन न करने पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से बाजार में कच्चे जूट की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में स्थिरता आएगी। इसका फायदा तीन बड़े वर्गों को होगा:
अगर जूट मिलों को समय पर कच्चा माल नहीं मिलता, तो उत्पादन रुक सकता है और हजारों श्रमिकों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम उद्योग में रोजगार सुरक्षित रखने के लिए भी उठाया है। कच्चे जूट पर स्टॉक सीमा शून्य करना सरकार का बड़ा और सख्त फैसला माना जा रहा है। इससे जमाखोरी पर रोक लगेगी, जूट मिलों को राहत मिलेगी और बाजार में सप्लाई सुधरेगी। आने वाले हफ्तों में इसका असर जूट की कीमतों और उद्योग की स्थिति पर साफ दिखाई दे सकता है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
किस पर कितना लागू होगा नया नियम?
1. पंजीकृत बेलिंग प्रेस वाले कच्चे जूट बेलर- जिनके परिसर में बेलिंग प्रेस है और वे जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत हैं, उनके लिए स्टॉक सीमा शून्य कर दी गई है। इन्हें 5 मई 2026 तक अपने पास मौजूद पूरा स्टॉक बेच देना होगा। 15 मई 2026 तक खरीदारों को भौतिक आपूर्ति पूरी करनी होगी।
2. अन्य स्टॉकधारक और गैर-पंजीकृत गांठ बनाने वाले- जो जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत नहीं हैं या जिनके पास बेलिंग मशीन नहीं है, उनके लिए भी स्टॉक सीमा शून्य तय की गई है।
3. जूट मिलें और प्रोसेसिंग यूनिट- जूट मिलों और प्रसंस्करण इकाइयों को वर्तमान उत्पादन दर के हिसाब से अधिकतम 45 दिनों की खपत जितना स्टॉक रखने की अनुमति होगी।
जूट स्मार्ट पोर्टल पर स्टॉक जानकारी देना जरूरी
किसानों, उद्योग और उपभोक्ताओं को क्या फायदा?
- किसानों को उचित बाजार व्यवस्था मिलेगी
- जूट मिलों को समय पर कच्चा माल मिलेगा
- उपभोक्ताओं को जूट उत्पाद उचित कीमत पर मिल सकेंगे