इस सीजन देश में 25 हजार के पार पहुंचे पराली जलाने के मामले, अकेले इस राज्य में 18376 केस आए सामने, जानें राज्यवार आंकड़े

Gaon Connection | Apr 20, 2026, 11:46 IST
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देश में पराली जलाने की समस्या फिर बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। पंजाब में भी नए मामले मिले हैं। यह स्थिति पर्यावरण के लिए चिंताजनक है। किसानों के पास विकल्प सीमित हैं। इस समस्या का समाधान निकालना जरूरी है। यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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देश में फसल अवशेष यानी पराली जलाने की समस्या एक बार फिर गंभीर होती नजर आ रही है। गेहूं की कटाई के साथ कई राज्यों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे पर्यावरण और हवा की गुणवत्ता पर खतरा बढ़ गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश इस बार भी पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे है, जबकि पंजाब में भी नए मामले सामने आए हैं। यह स्थिति बताती है कि रोकथाम के प्रयासों के बावजूद यह समस्या अभी पूरी तरह काबू में नहीं आ पाई है।

पंजाब में नए मामले, कुल संख्या बढ़ी

पंजाब में रविवार को पराली जलाने के चार नए मामले सामने आए, जिससे इस सीजन में कुल मामलों की संख्या 14 हो गई है। हालांकि यह संख्या अन्य राज्यों की तुलना में कम है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।

मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित

मध्य प्रदेश में रविवार को देशभर में सामने आए 1,815 मामलों में से 1,058 मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही राज्य में इस सीजन में कुल पराली जलाने के मामलों की संख्या 18,376 तक पहुंच गई है, जबकि देशभर में कुल 25,976 मामले सामने आ चुके हैं।

पिछले पांच सालों में भी सबसे आगे मध्य प्रदेश

कृषि पारिस्थितिकी निगरानी और मॉडलिंग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में देश में दर्ज कुल पराली जलाने के मामलों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए हैं। 2022 से अब तक कुल 2,24,515 मामलों में से 1,13,062 मामले मध्य प्रदेश से सामने आए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश 53,538 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि पंजाब में 47,991, हरियाणा में 9,805 और दिल्ली में 119 मामले दर्ज किए गए हैं।

किन जिलों में सबसे ज्यादा मामले

इस सीजन में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में सबसे ज्यादा 2,843 पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में 19 अप्रैल तक 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

पिछले सीजन में भी यही हाल

2025 के खरीफ सीजन में भी मध्य प्रदेश 17,067 मामलों के साथ शीर्ष पर था। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 7,290 और पंजाब में 5,114 मामले दर्ज किए गए थे। यह लगातार बढ़ते आंकड़े दिखाते हैं कि पराली जलाने की समस्या अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अब तक के कुल आंकड़े (19 अप्रैल तक)

  • मध्य प्रदेश: 18,376
  • उत्तर प्रदेश: 7,547
  • हरियाणा: 36
  • पंजाब: 14
  • दिल्ली: 3
  • कुल: 25,976

बढ़ता खतरा और चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ता है। इसके बावजूद किसान इस तरीके को अपनाने को मजबूर हैं, क्योंकि इसके विकल्प सीमित और महंगे हैं। ऐसे में यदि प्रभावी समाधान नहीं निकाले गए, तो यह समस्या आगे और गंभीर हो सकती है।
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