गेहूं की कटाई के बाद तुरंत बोएं ग्रीष्मकालीन मूंग, जीरो-टिल विधि से बढ़ाएं आय और मिट्टी का स्वास्थ्य
Gaon Connection | Apr 10, 2026, 17:50 IST
गेहूं की कटाई के बाद किसानों के लिए ज़ीरो-टिल मशीन से ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई करने का अवसर स्वर्णिम है। यह न केवल मिट्टी की उर्वरता में इजाफा करती है, बल्कि फसल की पैदावार को भी बढ़ाती है। जैसे कि एमएच 401 जैसी छोटी अवधि की किस्मों से किसान अच्छी आमदनी कर सकते हैं।
गर्मी के बाद बोएं मूंग
गेहूं की कटाई के तुरंत बाद, शून्य जुताई (ज़ीरो-टिल) मशीन का उपयोग करके ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई करने से किसानों को कई फायदे मिल सकते हैं। यह विधि फसल की सघनता बढ़ाती है, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करती है और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करती है। अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ किसानों को इस पद्धति को अपनाने की सलाह देते हैं।
जिन क्षेत्रों में मिट्टी में पर्याप्त नमी है, वहाँ 60-65 दिनों में पकने वाली छोटी अवधि की मूंग की किस्मों की खेती की जा सकती है। गेहूं की कटाई के बाद समय पर बुवाई से फसल अच्छी तरह जम जाती है, मिट्टी की नमी का बेहतर उपयोग होता है और कुल उत्पादकता बढ़ती है। हाल की बारिश से मिट्टी में नमी होने के कारण तुरंत सिंचाई की आवश्यकता नहीं हो सकती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मिट्टी की नमी के आधार पर सिंचाई की जा सकती है।
गर्मियों में मूंग की खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती है और फसल चक्र को भी सघन बनाती है। इससे अतिरिक्त आय होती है और धान की फसल की उत्पादकता भी बढ़ती है। फसल कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को हरी खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है।
अब MH 401 जैसी छोटी अवधि की मूंग की किस्म उपलब्ध है, जो गेहूं-धान फसल चक्र के लिए उपयुक्त है। गेहूं की कटाई के बाद 10 अप्रैल तक इसकी बुवाई की जा सकती है। बुवाई के लिए प्रति एकड़ 10-12 किलो बीज का उपयोग करें और जीरो टिलेज मशीन से बुवाई करें। बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए। बुवाई के समय एक बैग डीएपी का उपयोग करें।
मूंग की जड़ों में बनने वाली गांठें (नोड्यूल) हवा से नाइट्रोजन को मिट्टी में जमा करती हैं। इससे मूंग की नाइट्रोजन की जरूरत पूरी होती है और अगली फसल के लिए लगभग 12-30 किलो N/ha नाइट्रोजन मिट्टी में स्थिर होता है। गर्मियों में खरपतवार की समस्या आमतौर पर कम होती है, लेकिन अगर खरपतवार दिखें तो बुवाई के 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें। इससे खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ जड़ों में हवा का संचार भी बेहतर होता है, जिससे गांठों का विकास अच्छा होता है।
मूंग की खेती सिंचित परिस्थितियों में ही करनी चाहिए, क्योंकि इसे दो बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद और दूसरी सिंचाई 15-20 दिन के अंतराल पर करें। फसल की वृद्धि के 50-55 दिन बाद सिंचाई न करें, ताकि फलियां एक साथ पकें।
60-65 दिनों में पकने वाली छोटी अवधि की मूंग
फसल चक्र को भी सघन बनाती मूंग
छोटी अवधि की मूंग की किस्म MH 401
मिट्टी के फायदेमंद कैसे?
मूंग की खेती सिंचित परिस्थितियों में ही करनी चाहिए, क्योंकि इसे दो बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद और दूसरी सिंचाई 15-20 दिन के अंतराल पर करें। फसल की वृद्धि के 50-55 दिन बाद सिंचाई न करें, ताकि फलियां एक साथ पकें।