मौसम में बढ़ती गर्मी, विशेषज्ञों ने जारी किए फसल प्रबंधन, नई बुवाई और कीटों से बचाव के तरीके
Gaon Connection | Mar 01, 2026, 11:05 IST
मौसम बदलने के साथ ही किसानों के लिए खास सलाह आई है। कृषि विशेषज्ञों ने फसल प्रबंधन, नई बुवाई और कीटों से बचाव के तरीके बताए हैं। सही सिंचाई, प्रमाणित बीज और नियमित निगरानी से अच्छी उपज मिलेगी। मूंग, उड़द, भिंडी और सब्जियों की बुवाई का सही समय आ गया है।
मौसम बदलते ही बढ़ी खेती में सतर्कता
मौसम की करवट के साथ ही खेतों में सतर्कता का दौर शुरू हो गया है। तापमान में बढ़ोतरी और हवा के रुख में बदलाव को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल प्रबंधन, नई बुवाई और रोग-कीट नियंत्रण के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई, प्रमाणित बीजों का उपयोग और कीटों की नियमित निगरानी से ही इस मौसम में बेहतर उपज सुनिश्चित की जा सकती है।
कृषि मौसम विज्ञान सलाहकार समिति ने सलाह दी है कि खड़ी फसलों और सब्जियों में जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें। सिंचाई सुबह या शांत हवा के समय करने से पानी का वाष्पीकरण कम होगा और मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी।
मार्च के पहले सप्ताह में हरी मूंग (पूसा विशाल, पूसा वैशाखी, पीडीएम-11, एसएमएल-32) और उड़द (पंत उड़द-19, 30, 35, पीडीयू-1) की बुवाई के लिए प्रमाणित बीज लेने की सलाह दी गई है। बोआई से पहले बीजों को राइजोबियम कल्चर और फास्फोरस घुलनशील जीवाणुओं से उपचारित करना उपज बढ़ाने में सहायक होगा।
वर्तमान मौसम भिंडी की ए-4, परभनी क्रांति और अर्का अनामिका किस्मों की बुवाई के लिए अनुकूल माना गया है। प्रति एकड़ 10–15 किलोग्राम बीज की दर से बोआई करें और खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें। इसके अलावा फ्रेंच बीन, क्लस्टर बीन और समर रेडिश की बुवाई भी की जा सकती है। टमाटर, मिर्च और पत्तागोभी की रोपाई के लिए भी यह समय उपयुक्त है।
गेहूं की फसल में काला, भूरा और पीला जंग रोग की नियमित जांच करें। लक्षण दिखने पर प्रोपिकोनाज़ोल 25 EC को 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। समय पर नियंत्रण नहीं होने पर उपज में भारी गिरावट आ सकती है।
सरसों और सब्जी फसलों में एफिड के प्रकोप पर नजर रखें। अधिक प्रकोप होने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.25–0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। ध्यान रहे कि छिड़काव और कटाई के बीच कम से कम एक सप्ताह का अंतर हो।
प्याज में थ्रिप्स और बैंगनी धब्बा रोग की निगरानी जरूरी है। टमाटर में फल छेदक कीट के नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ 4–5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं और संक्रमित फलों को नष्ट करें। बैंगन में तना एवं फल छेदक कीट दिखने पर प्रभावित भागों को हटाएं। अधिक प्रकोप की स्थिति में स्पाइनोसाद का छिड़काव करें।
गेंदे की फसल में पुष्पवृंत सड़न रोग के लक्षण दिखने पर कार्बेन्डाज़िम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।