SVAMITVA Scheme: प्रॉपर्टी कार्ड से 11,147 ग्रामीणों को मिल 1,713 करोड़ का लोन, जानिए ग्रामीणों को क्या होगा लाभ
Aug 05, 2026, 17:30 IST
ड्रोन तकनीक की मदद से स्वामित्व योजना के तहत गांवों का सर्वेक्षण हो रहा है। इससे ग्रामीण को अपनी संपत्ति का प्रॉपर्टी कार्ड मिल रहा है, जिससे उन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सुविधा हो रही है। अब तक 3.30 लाख गांवों में इस ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा किया जा चुका है। डिजिटल मानचित्रों के कारण ग्राम पंचायत विकास योजनाएंँ अधिक प्रभावी बनेंगी।
ड्रोन सर्वे से ग्रामीणों को मिला संपत्ति का कानूनी अधिकार
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाने और भूमि विवाद कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना लगातार आगे बढ़ रही है। पंचायती राज मंत्रालय की इस योजना के तहत ड्रोन तकनीक से गाँवों का सर्वे कर आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके आधार पर ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड (Record of Rights) दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी संपत्ति का आधिकारिक दस्तावेज़ मिल रहा है।
केंद्र सरकार के अनुसार, इस योजना का लाभ केवल मालिकाना हक़ तक सीमित नहीं है। प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद ग्रामीणों के लिए बैंकों से ऋण लेना भी आसान हुआ है। अब तक 11,147 लाभार्थियों को इन प्रॉपर्टी कार्डों के आधार पर 1,713 करोड़ रुपये का ऋण मिल चुका है।
स्वामित्व योजना के तहत गाँवों के आबादी क्षेत्र का सर्वे अत्याधुनिक ड्रोन और CORS (Continuously Operating Reference Stations) तकनीक की मदद से किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से प्रत्येक संपत्ति की सीमाओं का सटीक निर्धारण संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में होने वाले भूमि और संपत्ति विवादों में कमी आने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से तैयार किए गए डिजिटल नक्शे पहले की तुलना में अधिक सटीक और पारदर्शी हैं।
पंचायती राज मंत्रालय, सर्वे ऑफ इंडिया और राज्य सरकारों के सहयोग से इस योजना को देशभर में लागू किया जा रहा है। अब तक 3.30 लाख गाँवों में ड्रोन सर्वे का कार्य पूरा किया जा चुका है। योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा भी की जा रही है, ताकि सभी पात्र ग्रामीणों तक इसका लाभ पहुँच सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर संपत्ति का स्पष्ट कानूनी रिकॉर्ड न होने के कारण लोगों को बैंक से ऋण लेने में कठिनाई होती थी। स्वामित्व योजना के तहत मिलने वाले प्रॉपर्टी कार्ड इस समस्या का समाधान कर रहे हैं। संपत्ति का प्रमाण मिलने से बैंक ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हो रही है और लोग खेती, छोटे कारोबार तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर पा रहे हैं।
योजना के तहत तैयार डिजिटल नक्शों का उपयोग ग्राम मंचित्र (Gram Manchitra) नामक GIS आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर किया जा रहा है। इससे ग्राम पंचायतों को गाँव की सड़कों, सार्वजनिक भवनों, जल स्रोतों, प्राकृतिक संसाधनों और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों की डिजिटल जानकारी उपलब्ध हो रही है। इस जानकारी की मदद से ग्राम पंचायतें ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकती हैं। साथ ही विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने, बुनियादी सुविधाओं की कमी पहचानने और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय में भी सहायता मिल रही है।
सरकार के अनुसार, योजना के तहत संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करने से पहले ज़मीनी सत्यापन और विवाद निपटान की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे संपत्ति का रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनता है और भविष्य में मालिकाना हक़ से जुड़े विवाद कम होने की संभावना रहती है। सरकार का मानना है कि स्वामित्व योजना ग्रामीणों को कानूनी रूप से संपत्ति का अधिकार देने के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डिजिटल तकनीक, स्पष्ट रिकॉर्ड, आसान बैंक ऋण और बेहतर ग्राम योजना के माध्यम से यह योजना ग्रामीण विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।
केंद्र सरकार के अनुसार, इस योजना का लाभ केवल मालिकाना हक़ तक सीमित नहीं है। प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद ग्रामीणों के लिए बैंकों से ऋण लेना भी आसान हुआ है। अब तक 11,147 लाभार्थियों को इन प्रॉपर्टी कार्डों के आधार पर 1,713 करोड़ रुपये का ऋण मिल चुका है।