Glufosinate: खरपतवारनाशक ग्लूफोसिनेट के आयात पर सरकार की सख्ती, 6 महीने के लिए लगाई पाबंदी, जानें कारण और नया नियम

Gaon Connection | Apr 14, 2026, 16:25 IST
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खेती में इस्तेमाल होने वाले ग्लूफोसिनेट खरपतवारनाशक के आयात पर सरकार ने कीमत आधारित प्रतिबंध लगाया है। यह नियम छह महीने के लिए लागू रहेगा। इससे सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले रसायनों का आयात रुकेगा। घरेलू उद्योग को मजबूती मिलेगी और किसानों को बेहतर उत्पाद मिलेंगे। सरकार आगे इसकी समीक्षा करेगी।
खरपतवारनाशक ग्लूफोसिनेट पर सरकार की सख्ती
खरपतवारनाशक ग्लूफोसिनेट पर सरकार की सख्ती
खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाले खरपतवारनाशक ग्लूफोसिनेट (Glufosinate) और इसके साल्ट्स के आयात को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले रसायनों की आवक को नियंत्रित करने के लिए कीमत आधारित प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह नई व्यवस्था छह महीने तक प्रभावी रहेगी, जिससे घरेलू उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 13 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी करते हुए ITC (HS) 2022 के चैप्टर-38 में आने वाले ग्लूफोसिनेट और उसके साल्ट्स के आयात नियमों में संशोधन किया है। यह फैसला विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 और विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2023 के तहत लिया गया है।

कीमत के आधार पर लागू हुआ प्रतिबंध

नई नीति के अनुसार, ग्लूफोसिनेट का आयात सामान्य रूप से ‘फ्री’ कैटेगरी में रहेगा, लेकिन इसमें एक अहम शर्त जोड़ी गई है। यदि किसी आयात की कुल लागत (CIF) और एंटी-डंपिंग शुल्क मिलाकर कीमत ₹1,154 प्रति किलोग्राम से कम होती है, तो ऐसे आयात को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में रखा जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि अब बेहद सस्ते दाम पर विदेशों से इस रसायन को भारत में लाना संभव नहीं होगा।

किन-किन उत्पादों पर असर

यह नियम 38089193, 38089199, 38089361, 38089391, 38089399, 38089912, 38089991 और 38089999 जैसे कई ITC (HS) कोड पर लागू होगा। इन सभी श्रेणियों में आयात के लिए पॉलिसी कंडीशन नंबर-07 के साथ नई कीमत आधारित शर्तों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है।

रजिस्ट्रेशन और गुणवत्ता पर जोर

सरकार ने यह भी साफ किया है कि कीटनाशकों से जुड़े उत्पादों के आयात के लिए केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) से रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। साथ ही आयातकों को कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा, ताकि बाजार में निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की एंट्री रोकी जा सके।

चीन से आयात पर पड़ेगा असर

भारत में कृषि रसायनों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने करीब 1.65 बिलियन डॉलर के फफूंदनाशक, कीटनाशक, खरपतवारनाशक और अन्य रसायनों का आयात किया था, जिसमें से लगभग 655 मिलियन डॉलर का माल अकेले चीन से आया था। ऐसे में इस नए फैसले का सीधा असर चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते रसायनों पर पड़ेगा।

घरेलू उद्योग को मिलेगा फायदा

सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से बचाना और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है। साथ ही इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

आगे होगी समीक्षा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल छह महीने तक लागू रहेगी, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इस नीति में आगे बदलाव भी किया जा सकता है। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता बनाए रखने, सस्ते आयात पर नियंत्रण लगाने और घरेलू उद्योग को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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