Today Petrol-Diesel Price: जानें आज का भाव और दाम बढ़ने के कारण
Gaon Connection | Mar 12, 2026, 11:26 IST
पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर दिन बदलती हैं, जो कि वैश्विक बाजार की स्थिति और डॉलर-रुपे के संबंध पर निर्भर करती हैं। इस समय 12 मार्च 2026 को कई प्रमुख शहरों में नई दरें घोषित की गई हैं। इन कीमतों का सीधा परिणाम आम लोगों के दैनिक खर्चों पर नज़र आता है। जानिए आपके शहर में आज की पेट्रोल और डीजल की कीमतें।
12 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें
हर दिन की शुरुआत पेट्रोल-डीजल की नई कीमतों से होती है, जो सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालती हैं। तेल विपणन कंपनियां (OMCs) हर सुबह 6 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर के आधार पर नई दरें जारी करती हैं। यह जानकारी रखना आम आदमी के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इससे उन्हें पता चलता है कि उनके रोज़मर्रा के खर्चों पर कितना असर पड़ेगा। सरकार की यह व्यवस्था पारदर्शिता बनाए रखती है, ताकि किसी को गलत जानकारी न मिले।
भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है, लेकिन भारतीय ग्राहकों के लिए कीमतें लगभग एक जैसी बनी हुई हैं।
1- सबसे पहले, कच्चे तेल की कीमतें- पेट्रोल और डीजल कच्चे तेल से ही बनते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल महँगा हो जाता है।
2- दूसरा, डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत-भारत ज़्यादातर कच्चा तेल डॉलर में खरीदता है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो हमें तेल खरीदने के लिए ज़्यादा डॉलर देने पड़ते हैं, जिससे ईंधन महंगा हो जाता है।
3- तीसरा, सरकारी टैक्स और शुल्क- पेट्रोल-डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें काफी टैक्स लगाती हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।
4- चौथा, रिफाइनिंग की लागत- कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल जैसे इस्तेमाल लायक ईंधन में बदलने की प्रक्रिया में भी खर्च आता है। यह खर्च कच्चे तेल की क्वालिटी और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करता है।
5- पाँचवां, माँग और आपूर्ति का संतुलन- अगर बाज़ार में ईंधन की माँग बढ़ जाती है, तो कीमतें भी बढ़ जाती हैं। खासकर त्योहारों या मौसम बदलने पर ईंधन की खपत ज़्यादा होती है।
12 मार्च 2026 को प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें
| क्रमांक | शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|---|
| 1 | नई दिल्ली | 94.72 | 87.62 |
| 2 | मुंबई | 104.21 | 92.15 |
| 3 | कोलकाता | 103.94 | 90.76 |
| 4 | चेन्नई | 100.75 | 92.34 |
| 5 | अहमदाबाद | 94.49 | 90.17 |
| 6 | बेंगलुरु | 102.92 | 89.02 |
| 7 | हैदराबाद | 107.46 | 95.70 |
| 8 | जयपुर | 104.72 | 90.21 |
| 9 | लखनऊ | 94.69 | 87.80 |
| 10 | पुणे | 104.04 | 90.57 |
| 11 | चंडीगढ़ | 94.30 | 82.45 |
| 12 | इंदौर | 106.48 | 91.88 |
| 13 | पटना | 105.58 | 93.80 |
| 14 | सूरत | 95.00 | 89.00 |
| 15 | नासिक | 95.50 | 89.50 |
ईंधन की कीमतें कई चीज़ें से होती हैं तय
2- दूसरा, डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत-भारत ज़्यादातर कच्चा तेल डॉलर में खरीदता है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो हमें तेल खरीदने के लिए ज़्यादा डॉलर देने पड़ते हैं, जिससे ईंधन महंगा हो जाता है।
3- तीसरा, सरकारी टैक्स और शुल्क- पेट्रोल-डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें काफी टैक्स लगाती हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।
4- चौथा, रिफाइनिंग की लागत- कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल जैसे इस्तेमाल लायक ईंधन में बदलने की प्रक्रिया में भी खर्च आता है। यह खर्च कच्चे तेल की क्वालिटी और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करता है।
5- पाँचवां, माँग और आपूर्ति का संतुलन- अगर बाज़ार में ईंधन की माँग बढ़ जाती है, तो कीमतें भी बढ़ जाती हैं। खासकर त्योहारों या मौसम बदलने पर ईंधन की खपत ज़्यादा होती है।