Trump Tariff: ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ रद्द, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला, भारत-अमेरिकी व्यापार पर क्या असर
Gaon Connection | Feb 20, 2026, 21:54 IST
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ़ को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने पुष्टि की कि ट्रंप ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। यह निर्णय राष्ट्रपति के कार्यकारी शक्तियों के अति उपयोग पर एक ठहराव है। हालांकि, कुछ टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे। यह घटनाक्रम ट्रंप के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ़ को रद्द कर दिया है, जो पिछले साल लागू किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने अपनी सीमा से बाहर जाकर अधिकारों का इस्तेमाल किया और नेशनल इमरजेंसी के लिए बने कानून का सहारा लिया। यह फैसला राष्ट्रपति के कार्यकारी अधिकार के व्यापक इस्तेमाल पर रोक का प्रतीक है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल दूसरे देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर टैक्स लगाने का एलान किया था। उनका कहना था कि इससे अमेरिकी फैक्ट्रियों को फायदा होगा। इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से मंजूरी नहीं ली थी, बल्कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था। इस कानून के तहत इमरजेंसी घोषित करने से ट्रंप तुरंत आदेश जारी कर सकते थे और कांग्रेस को दरकिनार कर सकते थे।
अगस्त 2025 में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने कहा कि ट्रंप के ज्यादातर टैक्स गैरकानूनी हैं, लेकिन उन्हें लागू रहने दिया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री तब हुई, जब व्हाइट हाउस ने अपील कोर्ट के फैसले को पलटने की मांग की। अपने फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अपनी सीमा से बाहर जाकर अधिकारों का इस्तेमाल किया और नेशनल इमरजेंसी के लिए बने कानून का सहारा लिया। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता।
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को किसी आपात स्थिति में व्यापार को "नियंत्रित" करने का अधिकार देता है। ट्रंप ने पहली बार फरवरी 2025 में इसका इस्तेमाल किया। उन्होंने चीन, मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सामान पर टैक्स लगाया। ट्रंप ने इस कानून का इस्तेमाल करते हुए फिर अप्रैल में लगभग हर देश से आने वाले सामान पर 10% से 50% तक टैक्स लगाने का आदेश दिया।
हालांकि, ट्रंप के लागू किए गए सारे टैरिफ नहीं हटे हैं। स्टील, एल्युमीनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े टैरिफ प्रभावित नहीं हुए। ये टैरिफ 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत लगाए गए थे, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता जताई गई थी। न्यायाधीशों ने कहा कि टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का काम नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की शक्ति है और जिस कानून का ट्रंप ने अपनी कानूनी रक्षा में हवाला दिया, यानी 1977 का इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, उसने ट्रंप को इतनी व्यापक शक्तियां नहीं दी थीं।
इससे भारतीय सामानों की कीमतें अमेरिका में सस्ती होंगी और उनकी मांग बढ़ेगी। यह फैसला भारत के निर्यातकों के लिए बहुत फायदेमंद है, खासकर उन सेक्टरों के लिए जो पहले ज्यादा टैक्स से परेशान थे। पहले भारत से अमेरिका जाने वाले कई सामानों पर 18% से भी ज्यादा का टैक्स लगता था। अब, जैसे कि टेक्सटाइल और फैक्ट्री में बने सामानों पर, यह टैक्स ड्यूटी-फ्री या बहुत कम हो गया है। इससे भारतीय कंपनियां अमेरिका के बाजार में ज्यादा मजबूत होंगी और दूसरे देशों से मुकाबला कर पाएंगी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कुछ खास तरह के टैरिफ अभी भी लागू रह सकते हैं। जैसे कि स्टील और एल्युमीनियम जैसे सेक्टरों पर लगने वाले शुल्क, जो अलग कानूनों के तहत आते हैं। इसका मतलब है कि सब कुछ एकदम फ्री नहीं होगा, लेकिन ज्यादातर बड़े और अनावश्यक शुल्क हटा दिए गए हैं। कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी जीत है और भारत-अमेरिका व्यापार को बढ़ावा देगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल दूसरे देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर टैक्स लगाने का एलान किया था। उनका कहना था कि इससे अमेरिकी फैक्ट्रियों को फायदा होगा। इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस से मंजूरी नहीं ली थी, बल्कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था। इस कानून के तहत इमरजेंसी घोषित करने से ट्रंप तुरंत आदेश जारी कर सकते थे और कांग्रेस को दरकिनार कर सकते थे।
ट्रंप के ज्यादातर टैक्स गैरकानूनी
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगे टैरिफ
टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का काम नहीं
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत-अमेरिकी व्यापार पर क्या असर
- फार्मास्युटिकल्स सेक्टर को भी फायदा होगा, क्योंकि वहां पहले से टैक्स नहीं था और अब भी वही स्थिति बनी रहेगी, जिससे निर्यात बढ़ सकता है।
- जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर को भी बड़ी राहत मिली है। पहले ज्यादा टैक्स के कारण इनकी मांग कम थी, लेकिन अब टैक्स कम होने से कीमतें सस्ती हो सकती है जिससे डिमांड बढ़ के संभावना भी बढ़ सकती है।
- इसी तरह, सीफूड पर भी पहले भारी टैक्स लगता था, लेकिन अब टैक्स कम होने से कंपनियों को ज्यादा मुनाफा होगा। इंजीनियरिंग गुड्स के सेक्टर में भी औद्योगिक मांग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी स्थिति मजबूत होगी।