Unseasonal Rain: हरियाणा और यूपी में गिरे ओले, फसलें हुईं बर्बाद, किसानों ने की मुआवज़े की मांग

Gaon Connection | Apr 04, 2026, 13:15 IST
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अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। जहां शहरों को गर्मी से राहत मिली, वहीं किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। हरियाणा के झज्जर, नूंह और प्रयागराज जैसे इलाकों में फसलें बर्बाद हुई हैं। सरकार ने सर्वे और मुआवज़े का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान जल्द राहत की मांग कर रहे हैं।
ओले से फसलों को नुकसान
ओले से फसलों को नुकसान
अप्रैल की शुरुआत में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने जहां एक ओर कई शहरों को गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह बड़ी मुसीबत बन गई है। उत्तर भारत के कई राज्यों में अचानक बदले मौसम ने रबी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसान परेशान हैं और सरकार से मुआवज़े की मांग कर रहे हैं।

हरियाणा और यूपी में गिरे ओले

इस मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। हरियाणा के झज्जर, नूंह और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जैसे इलाकों में किसानों की खड़ी रबी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। गेहूं, सरसों, चना और अरहर जैसी फसलें बारिश और ओलों से खराब हो गई हैं। किसानों का कहना है कि उनकी 80 से 90 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो गई है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य जरिया है और इसी से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अगली फसल की तैयारी होती है।

दिल्ली में बदला मौसम

दिल्ली और आसपास के इलाकों जैसे नोएडा में शुक्रवार सुबह मौसम अचानक बदल गया। तेज धूल भरी आंधी और धुंधले आसमान के साथ लोगों की सुबह हुई। इससे पहले गुरुवार को तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया था, जहां अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार यह बदलाव एक बड़े मौसम सिस्टम के कारण हो रहा है, जिससे तेज हवाएं 20 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। इससे गर्मी से थोड़ी राहत तो मिलेगी, लेकिन कुछ समय के लिए परेशानी भी हो सकती है।

सरकारों ने दिया राहत का भरोसा

इस बीच सरकारों ने किसानों को राहत देने का भरोसा दिया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को फसल नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने भी प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की बात कही है। किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि नुकसान का जल्द आकलन किया जाए और समय पर मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि रबी फसलें, जो अक्टूबर से दिसंबर के बीच बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में कटाई होती है, ऐसे मौसम के लिए काफी संवेदनशील होती हैं। ऐसे में बार-बार हो रहे मौसम बदलाव से खेती और किसानों दोनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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