ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत यूपी में रिसर्च और स्टार्टअप्स को नया प्रोत्साहन
Gaon Connection | Jan 19, 2026, 18:53 IST
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए नई पहल कर रही है। इसके तहत राज्य में शोध केंद्र बनाए जाएंगे और इससे जुड़े स्टार्टअप्स को आर्थिक मदद दी जाएगी। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, नई तकनीक विकसित करना और प्रदेश को ग्रीन एनर्जी का प्रमुख केंद्र बनाना है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तैयार की गई इस योजना का उद्देश्य रिसर्च, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करते हुए प्रदेश को ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाना है।
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे। इन केंद्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीकों पर शोध और विकास पर काम किया जाएगा। दोनों सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे, जहां होने वाला शोध सीधे तौर पर उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए होगा। सरकार की ओर से इन सेंटरों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और परीक्षण सुविधाएं विकसित करने के लिए अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी।
ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत स्टार्टअप्स को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े वे स्टार्टअप्स, जो किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़े होंगे, उन्हें पांच वर्षों तक हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता का अवसर मिलेगा और उद्योगों को नई, किफायती तकनीकें उपलब्ध होंगी।
गोरखपुर जिले में उत्तर प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया जा चुका है, जिससे अनुमानित रूप से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी कई अन्य परियोजनाएं भी प्रदेश में पाइपलाइन में हैं।
यह पहल 2070 तक देश के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को कम कर उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी हब बनाना है।
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे। इन केंद्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीकों पर शोध और विकास पर काम किया जाएगा। दोनों सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे, जहां होने वाला शोध सीधे तौर पर उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए होगा। सरकार की ओर से इन सेंटरों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और परीक्षण सुविधाएं विकसित करने के लिए अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी।
ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत स्टार्टअप्स को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े वे स्टार्टअप्स, जो किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़े होंगे, उन्हें पांच वर्षों तक हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता का अवसर मिलेगा और उद्योगों को नई, किफायती तकनीकें उपलब्ध होंगी।
ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक हर साल अधिकतम 25 लाख रुपए दिया जाएगा।<br>
गोरखपुर जिले में उत्तर प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया जा चुका है, जिससे अनुमानित रूप से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी कई अन्य परियोजनाएं भी प्रदेश में पाइपलाइन में हैं।
यह पहल 2070 तक देश के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को कम कर उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी हब बनाना है।