गन्ना किसानों के लिए बड़ी पहल: यूपी सरकार दे रही मूंग-उड़द का निःशुल्क बीज, अंतरफसली खेती से बढ़ेगी आय

Gaon Connection | Feb 20, 2026, 16:23 IST
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उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को सहफसली खेती के लिए मूंग और उड़द का मुफ्त बीज उपलब्ध करा रही है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, भूमि की उर्वरता सुधारना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। किसान विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश में खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। गन्ना किसानों को अब सहफसली खेती के तहत मूंग और उड़द का निःशुल्क बीज दिया जा रहा है। इस पहल का मकसद सिर्फ अतिरिक्त फसल उगवाना नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाना और खेत की मिट्टी की सेहत सुधारना भी है। कृषि विभाग के अनुसार, किसान विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

गन्ना प्रदेश की प्रमुख नकदी फसल है, लेकिन लंबे समय तक एक ही फसल उगाने से मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ता है। ऐसे में सहफसली या अंतरफसली खेती एक बेहतर विकल्प माना जाता है। मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में मदद करती हैं। इससे खेत की उर्वरता सुधरती है और अगली फसल की पैदावार भी बेहतर होती है।

सरकार की यह योजना खास तौर पर गन्ना किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके तहत किसानों को मूंग और उड़द का बीज मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान भाई विभागीय पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रखी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचे।

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इस योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इससे लाभार्थियों को सीधे उनके पंजीकृत विवरण के आधार पर सुविधा मिलती है। निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन बुकिंग करना अनिवार्य है, इसलिए किसानों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है।

ग्रामीण इलाकों में कई किसान अभी भी पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं। ऐसे में अंतरफसली खेती की जानकारी और इसके लाभ समझाना जरूरी है। कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को जागरूक करने में जुटे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि किस प्रकार गन्ने की कतारों के बीच मूंग और उड़द की बुवाई की जा सकती है, ताकि दोनों फसलें बेहतर तरीके से विकसित हों।

यह पहल केवल एक मौसमी योजना नहीं, बल्कि खेती के ढांचे में बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है। अगर किसान बड़े पैमाने पर सहफसली खेती अपनाते हैं, तो प्रदेश में दलहन उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, गन्ना किसानों के लिए मूंग और उड़द का निःशुल्क बीज उपलब्ध कराना एक सकारात्मक पहल है। इससे किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और खेती को टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी। जरूरत है कि किसान समय पर आवेदन करें और इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।
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