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यूपी के 15 लाख टीचर्स को राहत, निजी अस्पतालों में मिलेगा मुफ़्त इलाज

Gaon Connection | Jan 29, 2026, 17:16 IST
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उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की ख़बर है। अब उन्हें बीमारी के इलाज के लिए सिर्फ सरकारी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लिया गया है।
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अब प्रदेश के स्कूल टीचर और उनके परिवार के सदस्य प्राइवेट अस्पतालों में भी बिना पैसे दिए इलाज करा सकेंगे। बैठक में कुल 32 प्रस्ताव पेश किए गए थे, जिनमें से 30 को मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रेसवार्ता में इन फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी।

किन-किन को मिलेगा फायदा

यह सुविधा माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षा विभाग से जुड़े करीब 15 लाख शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को मिलेगी। इसमें कई तरह के लोग शामिल हैं।माध्यमिक शिक्षा विभाग में सरकारी अनुदान पाने वाले स्कूलों के सभी शिक्षक इस योजना का हिस्सा होंगे। इनमें व्यावसायिक शिक्षा पढ़ाने वाले विशेषज्ञ और मानदेय पर काम करने वाले शिक्षक भी शामिल हैं। संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त स्कूलों के टीचर्स को भी यह सुविधा मिलेगी। साथ ही, खुद के खर्च पर चलने वाले लेकिन मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक भी इसके दायरे में आएंगे। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि इस विभाग से जुड़े 2.97 लाख से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इन पर करीब 89.25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

प्राथमिक शिक्षा की तरफ देखें तो बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षक इस योजना में शामिल होंगे। शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में काम करने वाली वार्डेन, पूर्णकालिक और अंशकालिक शिक्षक-शिक्षिकाएं सभी को यह सुविधा मिलेगी। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) के तहत खाना बनाने वाली रसोइयों को भी इसमें शामिल किया गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जानकारी दी कि इस विभाग के 11.95 लाख से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे। हर कर्मचारी के लिए करीब 3000 रुपये सालाना प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

कैसे होगा इलाज

यह योजना बिल्कुल आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर काम करेगी। मतलब टीचर्स और उनके परिवार वाले जब अस्पताल में भर्ती होंगे तो उन्हें अपनी जेब से एक भी रुपया नहीं देना होगा। सारा खर्च सरकार उठाएगी। इलाज की सुविधा दो तरह के अस्पतालों में मिलेगी। पहला, सभी सरकारी अस्पतालों में और दूसरा, स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव एंड हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम (साचीज) से जुड़े निजी अस्पतालों में। यानी जो प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत इलाज देते हैं, वे सभी इस योजना में भी शामिल होंगे। इलाज की दरें वही रहेंगी जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय की गई हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अस्पताल मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे।

क्या हैं शर्तें और नियम

हालांकि इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें भी हैं। सबसे पहली बात, यह सुविधा सिर्फ अस्पताल में भर्ती होकर इलाज (आईपीडी) के लिए ही मिलेगी। बाहरी मरीज (ओपीडी) के तौर पर इलाज इसमें शामिल नहीं है।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों का पहले सत्यापन (वेरिफिकेशन) करना जरूरी होगा। इसके लिए हर जिले में एक कमेटी बनाई जाएगी। माध्यमिक शिक्षा के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक और प्राथमिक शिक्षा के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी इस कमेटी की अध्यक्षता करेंगे। यह कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि सिर्फ असली और योग्य शिक्षकों को ही इसका लाभ मिले।

तीसरी शर्त यह है कि जो शिक्षक या कर्मचारी पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी दूसरी स्वास्थ्य योजना का लाभ ले रहे हैं, वे इस नई योजना के पात्र नहीं होंगे। मसलन, अगर कोई टीचर पहले से आयुष्मान योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान का लाभार्थी है, तो उसे इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि एक ही व्यक्ति कई योजनाओं का दोहरा लाभ न उठा सके।

कितना होगा खर्च

इस पूरी योजना पर सरकार का सालाना खर्च करीब 448 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। यह रकम दोनों विभागों को मिलाकर है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 89.25 करोड़ रुपये और प्राथमिक शिक्षा विभाग के लिए 358.61 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर इस योजना की घोषणा की थी। तब से शिक्षक इसका इंतजार कर रहे थे। अब कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी है। जल्द ही इसे लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

Economic Survey 2025-26 : वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की भूमिका रहेगी अहम
Thu, 29 Jan 2026 ,
By Manish Mishra
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज़ की है, जिसमें पशुपालन और मत्स्य पालन का प्रमुख योगदान है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज़ की है, जिसमें पशुपालन और मत्स्य पालन का प्रमुख योगदान है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही।
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