यूरिया बाजार में हलचल, घरेलू उत्पादन 11% बढ़ा लेकिन आयात कीमतों ने बढ़ाई चिंता, 1000 डॉलर/टन तक पहुंचे दाम
Gaon Connection | Apr 16, 2026, 11:31 IST
अप्रैल 2026 में भारत में यूरिया का घरेलू उत्पादन बढने के संकेत हैं। इसके पीछे एलएनजी की बेहतर उपलब्धता का हाथ है, जो उत्पादन को गति देगी। खरीफ सीजन की जरूरतें पूरी करने के लिए आयातित यूरिया भी बाजार में उपलब्ध रहेगा।
खरीफ से पहले यूरिया पर बड़ा अपडेट
भारत में अप्रैल 2026 के दौरान घरेलू यूरिया उत्पादन लगभग 20 लाख टन रहने का अनुमान है, जो मार्च 2026 के 18 लाख टन के मुकाबले 11.1 प्रतिशत अधिक है। 'बिजनेस स्टैंडर्ड' ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण एलएनजी (LNG) की उपलब्धता बढ़ने से उत्पादन में यह वृद्धि संभव हो रही है। यह स्तर अप्रैल के सामान्य उत्पादन 21.8 लाख टन के करीब रहेगा।
घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ-साथ लगभग 6 लाख टन आयातित यूरिया की आवक भी होने की उम्मीद है, जिससे जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन की पीक मांग से पहले कुल उपलब्धता बढ़ेगी। आमतौर पर देश में हर महीने 20 से 25 लाख टन यूरिया का उत्पादन होता है, लेकिन मार्च 2026 में गैस की कम आपूर्ति के कारण उत्पादन इकाइयों के समय से पहले बंद होने से यह करीब 27 प्रतिशत गिरकर 18 लाख टन रह गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अप्रैल से यूरिया इकाइयों को मिलने वाली एलएनजी आपूर्ति पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पहले केवल 60 प्रतिशत थी। यह सुधार स्पॉट मार्केट से आक्रामक खरीद के चलते हुआ है। वहीं, रिफाइनरियों को पश्चिम एशिया के अलावा अन्य स्रोतों से पर्याप्त ईंधन (एलएनजी और एलपीजी) प्राप्त करने में लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, भले ही वे ऊंचे दाम चुकाने को तैयार हों।
भारत ने पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद स्पॉट मार्केट से तीन बार एलएनजी खरीदी है, जिसकी कीमत 19 से 21 डॉलर प्रति मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट (mmbtu) रही, जबकि युद्ध से पहले यह 10 से 12 डॉलर mmbtu थी। पिछले छह महीनों में यूरिया इकाइयों की औसत गैस खपत 52 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (mmscmd) रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल तक देश में कुल उर्वरक भंडार 1.84 करोड़ टन था, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 1.6 करोड़ टन से अधिक है।
इसी बीच, Indian Potash Ltd को अपने हालिया टेंडर में लगभग 1,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की दर से यूरिया आपूर्ति के प्रस्ताव मिले हैं, जो दो महीने पहले की कीमत के लगभग दोगुने हैं। कंपनी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण आपूर्ति बाधित होने से कीमतों में यह तेजी आई है।
भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है, ने इस महीने की शुरुआत में 25 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए टेंडर जारी किया था, जो 2025 में उसके कुल वार्षिक आयात (लगभग 1 करोड़ टन) का करीब एक-चौथाई है। इस टेंडर के तहत कुल 56 लाख टन के ऑफर प्राप्त हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी तट के लिए सबसे कम बोली 935 डॉलर प्रति टन (कॉस्ट एंड फ्रेट आधार पर) रही, जबकि पूर्वी तट के लिए न्यूनतम बोली 959 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई।
खरीफ सीजन की पीक मांग से पहले बढ़ेगी कुल उपलब्धता
रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अप्रैल से यूरिया इकाइयों को मिलने वाली एलएनजी आपूर्ति पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पहले केवल 60 प्रतिशत थी। यह सुधार स्पॉट मार्केट से आक्रामक खरीद के चलते हुआ है। वहीं, रिफाइनरियों को पश्चिम एशिया के अलावा अन्य स्रोतों से पर्याप्त ईंधन (एलएनजी और एलपीजी) प्राप्त करने में लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, भले ही वे ऊंचे दाम चुकाने को तैयार हों।