2025 में पर्यटन के क्षेत्र में देश में अव्वल रहा उत्तर प्रदेश, 156.18 करोड़ पर्यटकों के साथ बना नया रिकॉर्ड
Gaon Connection | Feb 09, 2026, 19:14 IST
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया है। वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 156.18 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जो वर्ष 2024 की तुलना में करीब 2.4 गुना अधिक है। इस रिकॉर्ड वृद्धि में प्रयागराज महाकुंभ-2025 की अहम भूमिका रही, जहां अकेले 66.30 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। घरेलू पर्यटकों की संख्या में यूपी पहले से ही देश में अग्रणी है, जबकि विदेशी पर्यटकों के आगमन में भी राज्य ने सुधार करते हुए चौथा स्थान हासिल किया है। पर्यटन को केवल धार्मिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए राज्य में सांस्कृतिक, ईको, वेलनेस, ग्रामीण और वेडिंग टूरिज्म जैसे क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। इससे न सिर्फ निवेश बढ़ा है, बल्कि स्थानीय रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
वर्ष 2025 उत्तर प्रदेश के लिए पर्यटन के लिहाज़ से ऐतिहासिक साबित हुआ है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, इस वर्ष प्रदेश में कुल 156.18 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक है। बीते वर्ष 2024 में जहां उत्तर प्रदेश में 64.91 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2025 में इसमें 140 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज़ की गयी है। आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो यह बढ़ोतरी करीब 2.4 गुना है, जिसने उत्तर प्रदेश को पर्यटन के मामले में देश के शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई कारण हैं, जिनमें बड़े धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पर्यटन से जुड़ी नीतियों, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश का भी योगदान रहा है। खासतौर पर प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 ने प्रदेश के पर्यटन आंकड़ों को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। महाकुंभ के दौरान ही लगभग 66.30 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक प्रयागराज पहुंचे, जिसे दुनिया के सबसे बड़े मानव समागमों में गिना जा रहा है।
महाकुंभ के आयोजन का असर सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के जिलों में भी होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान और स्थानीय व्यापार में तेज़ी देखने को मिली। नाविकों, छोटे दुकानदारों, टैक्सी चालकों और अस्थायी रोजगार से जुड़े लोगों की आय में भारी बढ़ोतरी हुई। पर्यटन से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचाया। यह भी पढ़ें: UP Economic Survey: आठ साल में दोगुनी से ज्यादा हुई यूपी की अर्थव्यवस्था
उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में वर्ष 2022 से ही देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीं विदेशी पर्यटकों के आगमन में भी लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश वर्ष 2023 में पांचवें स्थान पर था, जो 2024 में चौथे स्थान पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन, बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के विस्तार के चलते आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है।
प्रदेश में पर्यटन विकास को केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित न रखते हुए इसे एक व्यापक आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी सोच के तहत पर्यटन को 12 अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर काम किया गया है, जिनमें सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ईको, वेलनेस, मेडिकल, एडवेंचर, जल आधारित, ग्रामीण, कृषि, व्यंजन, युवा और वेडिंग टूरिज्म जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025 में 1,546 से अधिक परियोजना प्रस्तावों पर काम हुआ, जिनके तहत 34,439 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को हासिल किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को ध्यान में रखते हुए ईको टूरिज्म पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2025 में ईको टूरिज्म से जुड़ी 49 नई परियोजनाएं शुरू की गईं। इन परियोजनाओं के माध्यम से वन क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक आजीविका के साधनों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आय को भी बल मिला है।
ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में अब तक 85 रूरल होमस्टे और 155 टूर ऑपरेटर्स को पंजीकृत किया गया है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त आय का साधन मिला है और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और जीवनशैली से जुड़ने का अवसर भी मिला है। साथ ही लोककला, संगीत, शिल्प और लोकनृत्य से जुड़े कलाकारों और समूहों को आर्थिक सहायता देकर सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज जैसे शहर अब केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के रूप में पहचान बना रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र में आई इस तेज़ वृद्धि का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय व्यापार पर दिखाई दे रहा है। होटल, परिवहन, खानपान और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ी है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई कारण हैं, जिनमें बड़े धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पर्यटन से जुड़ी नीतियों, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश का भी योगदान रहा है। खासतौर पर प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 ने प्रदेश के पर्यटन आंकड़ों को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। महाकुंभ के दौरान ही लगभग 66.30 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक प्रयागराज पहुंचे, जिसे दुनिया के सबसे बड़े मानव समागमों में गिना जा रहा है।
महाकुंभ के आयोजन का असर सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के जिलों में भी होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान और स्थानीय व्यापार में तेज़ी देखने को मिली। नाविकों, छोटे दुकानदारों, टैक्सी चालकों और अस्थायी रोजगार से जुड़े लोगों की आय में भारी बढ़ोतरी हुई। पर्यटन से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचाया। यह भी पढ़ें: UP Economic Survey: आठ साल में दोगुनी से ज्यादा हुई यूपी की अर्थव्यवस्था
उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में वर्ष 2022 से ही देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीं विदेशी पर्यटकों के आगमन में भी लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश वर्ष 2023 में पांचवें स्थान पर था, जो 2024 में चौथे स्थान पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन, बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के विस्तार के चलते आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है।
639062602305816873
प्रदेश में पर्यटन विकास को केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित न रखते हुए इसे एक व्यापक आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी सोच के तहत पर्यटन को 12 अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर काम किया गया है, जिनमें सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ईको, वेलनेस, मेडिकल, एडवेंचर, जल आधारित, ग्रामीण, कृषि, व्यंजन, युवा और वेडिंग टूरिज्म जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025 में 1,546 से अधिक परियोजना प्रस्तावों पर काम हुआ, जिनके तहत 34,439 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को हासिल किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को ध्यान में रखते हुए ईको टूरिज्म पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2025 में ईको टूरिज्म से जुड़ी 49 नई परियोजनाएं शुरू की गईं। इन परियोजनाओं के माध्यम से वन क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक आजीविका के साधनों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आय को भी बल मिला है।
ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में अब तक 85 रूरल होमस्टे और 155 टूर ऑपरेटर्स को पंजीकृत किया गया है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त आय का साधन मिला है और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और जीवनशैली से जुड़ने का अवसर भी मिला है। साथ ही लोककला, संगीत, शिल्प और लोकनृत्य से जुड़े कलाकारों और समूहों को आर्थिक सहायता देकर सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया गया है।
अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज जैसे शहर अब केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के रूप में पहचान बना रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र में आई इस तेज़ वृद्धि का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय व्यापार पर दिखाई दे रहा है। होटल, परिवहन, खानपान और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ी है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिला है।