पश्चिम एशिया संकट से भारत की थाली पर खतरा! क्या बढ़ेगी महंगाई? खाद्य सुरक्षा पर विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी

Gaon Connection | Apr 18, 2026, 11:50 IST
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पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर भारत के कृषि और खाद्य क्षेत्र पर पड़ रहा है। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है और उर्वरकों की कीमतें उछल रही हैं। सप्लाई चेन में बाधाएं आ रही हैं। विशेषज्ञों ने सरकार से कूटनीतिक स्तर पर खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट से महंगाई का खतरा
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट से महंगाई का खतरा
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट का असर अब भारत के कृषि और खाद्य क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत, उर्वरकों की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधाओं के बीच कृषि उद्योग के विशेषज्ञों ने सरकार से कूटनीतिक स्तर पर खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।

लॉजिस्टिक्स संकट और बढ़ती लागत से सप्लाई चेन पर दबाव

कोलकाता में बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BCC&I) द्वारा आयोजित एक राउंडटेबल में विशेषज्ञों ने बताया कि भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के खाद्य तंत्र पर तेजी से बढ़ रहा है। राइस विला के सीईओ सुरज अग्रवाल ने कहा कि लॉजिस्टिक्स में व्यवधान, ऊर्जा लागत और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है, माल ढुलाई महंगी हो गई है और कारोबार की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ रहा है। रेड सी जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा आने से शिपिंग समय लंबा हो गया है और परिवहन लागत बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं के आयात और चावल व प्रोसेस्ड फूड के निर्यात पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या केवल लागत बढ़ना नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में बढ़ती अनिश्चितता है।

नीतिगत हस्तक्षेप और वैकल्पिक रणनीति की जरूरत

विशेषज्ञों ने सरकार से आग्रह किया कि वह माल ढुलाई दरों को स्थिर करने, वैकल्पिक व्यापार मार्ग विकसित करने, उर्वरकों जैसे जरूरी इनपुट के स्रोतों में विविधता लाने और निर्यात नीतियों को स्थिर रखने जैसे कदम उठाए। सुरज अग्रवाल ने कहा कि आज भारत की खाद्य सुरक्षा सिर्फ मानसून पर निर्भर नहीं है, बल्कि समुद्री मार्गों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी टिकी है। वहीं, पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन ने चेतावनी दी कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है, तो इससे रबी फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, खासकर तब जब चुनाव के बाद ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी होती है।

महंगाई का खतरा और पांच सूत्रीय कार्ययोजना

सॉलिडैरिडाड के सुरेश मोटवानी ने उर्वरकों पर निर्भरता, लॉजिस्टिक्स बाधाओं और पैकेजिंग लागत जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया, जबकि प्रोफेसर अजितावा रे चौधुरी ने इनपुट और परिवहन लागत बढ़ने से लगातार महंगाई के दबाव की बात कही। उद्योग प्रतिनिधियों ने पांच बिंदुओं वाली कार्ययोजना भी सुझाई, जिसमें लॉजिस्टिक्स को मजबूत बनाना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना, नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करना, कृषि कारोबार को कार्यशील पूंजी सहायता देना और वैश्विक सप्लाई में बाधाओं की रियल-टाइम निगरानी के लिए तंत्र विकसित करना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कृषि व्यवस्था मजबूत है, लेकिन वैश्विक संकट के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत लचीलापन और सप्लाई चेन की मजबूती बेहद जरूरी होगी।
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