West Bengal GI Tag: खजूर गुड़, चनाचुर और पान को GI टैग की तैयारी, अब तक किन उत्पादों को मिल चुका है GI Tag, जानें पूरी लिस्ट

Gaon Connection | Apr 20, 2026, 17:38 IST
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पश्चिम बंगाल अपने खास उत्पादों के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार कई स्थानीय वस्तुओं को जीआई टैग दिलाने का प्रयास कर रही है। इससे उत्पादों की पहचान बढ़ेगी और किसानों को लाभ होगा। बंगाल रसगुल्ला, जयनगर मोआ जैसे कई उत्पादों को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है।
पश्चिम बंगाल के GI टैग प्रोडक्ट्स की पूरी लिस्ट
पश्चिम बंगाल के GI टैग प्रोडक्ट्स की पूरी लिस्ट
Bengal GI Tag products: पश्चिम बंगाल सिर्फ रसगुल्ला और मिठाइयों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे पारंपरिक उत्पादों के लिए भी जाना जाता है। अब राज्य के खजूर गुड़, चनाचुर और पान जैसे मशहूर उत्पादों को GI टैग दिलाने की तैयारी हो रही है। GI टैग मिलने से इन चीजों की पहचान देश-दुनिया में बढ़ेगी, नकली सामान पर रोक लगेगी और स्थानीय किसानों-कारोबारियों को फायदा होगा। जानिए किन उत्पादों को पहले ही GI टैग मिल चुका है और कौन-कौन से नए नाम इस सूची में शामिल हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल अपनी मिठाइयों, खास खाद्य उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं के लिए देशभर में मशहूर है। अब राज्य सरकार कई स्थानीय उत्पादों को GI टैग (Geographical Indication) दिलाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

क्या होता है GI टैग?

GI टैग किसी खास इलाके में बनने वाले उत्पाद को दिया जाता है, जिसकी गुणवत्ता, पहचान या प्रतिष्ठा उस क्षेत्र से जुड़ी हो। जैसे दार्जिलिंग चाय, बनारसी साड़ी या बंगाल का रसगुल्ला। GI टैग मिलने के बाद उस नाम का इस्तेमाल केवल उसी क्षेत्र के असली उत्पादक कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल का खानपान, मिठाइयां, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद बेहद विविध हैं। इसी वजह से राज्य GI टैग वाले उत्पादों की संख्या में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है।

पश्चिम बंगाल को किन उत्पादों को मिल चुका है GI टैग?

पश्चिम बंगाल से पिछले पांच वर्षों में कुल 46 उत्पादों को GI टैग दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। यह जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मिली है। इन प्रस्तावों में हस्तशिल्प, वस्त्र उद्योग, प्राकृतिक उत्पाद, मिठाइयां, खाद्य सामग्री और कृषि से जुड़े कई खास उत्पाद शामिल हैं। इनमें से कई वस्तुओं को GI टैग मिल चुका है, जबकि कुछ प्रस्ताव अभी भी प्रक्रिया में लंबित हैं।

क्रमांकउत्पाद का नामश्रेणी
1कृष्णनगर की मिट्टी की गुड़ियाहस्तकला
2नतुनग्राम की लकड़ी की गुड़ियाहस्तकला
3शांतिनिकेतन बाटिककपड़ा उद्योग
4कोलकत्ती गहनेहस्तकला
5पुरुलिया का लाखप्राकृतिक सामग्री
6बेगमपुर की सूती हैंडलूम साड़ीकपड़ा उद्योग
7फुलिया जामदानी साड़ीकपड़ा उद्योग
8कूचबिहार शीतलपाटीहस्तकला
9शांतिनिकेतन इकताराहस्तकला
10बंगाल सबाईहस्तकला
11चंदननगर जलभरा संदेशखाद्य सामग्री
12जनाई मनोहराखाद्य सामग्री
13बंगाल का सिंगिंग बोलहस्तकला
14आशापुर का बैगनकृषि
15बांकुड़ा की शंख कलाहस्तकला
16बेलियातोड़ मेचा संदेशखाद्य सामग्री
17विष्णुपुर दशावतार ताशहस्तकला
18कनकचुड़ चावलकृषि
19शोलापीठ कलाहस्तकला
20खागड़ा का कांसे से बने बर्तनहस्तकला
21बांकुड़ा के कांसे से बने बर्तनहस्तकला
22नोलेन गुड़ (खजूर का गुड़)कृषि
23मुर्शिदाबाद सिल्ककपड़ा उद्योग
24बालागढ़ की नावहस्तकला
25काखरा और गरगरे पीठाखाद्य सामग्री
26शांतिनिकेतन अल्पनाहस्तकला
27नवाबगंज के बैगनकृषि
28खीरपाई का बाबरशाहखाद्य सामग्री
29हुगली की रबड़ीखाद्य सामग्री
30जामदानी साड़ीकपड़ा उद्योग
31बांग्ला पानकृषि
32बाबनान चिकन कढ़ाईकपड़ा उद्योग
33गुपो संदेशखाद्य सामग्री
34थंका पेंटिंगहस्तकला
35कालिम्पोंग की चांदी की सामग्रीहस्तकला
36बेलपहाड़ी के पत्थर से बने सामानहस्तकला
37दक्षिणपूर्व पश्चिम बंगाल का ब्राह्मीकृषि
38बंडेल का चीजखाद्य सामग्री
39महुआउत्पादित सामग्री
40बांकुड़ा का मानसून हरा कद्दूकृषि
41बंगाल का चनाचुरखाद्य सामग्री
42बसीरहाट का गमछाकपड़ा उद्योग
43गंगारामपुर का खीर दहीखाद्य सामग्री
44कालीगंज का डोकराहस्तकला
45कुम्हारटोली की मूर्तियांहस्तकला
46बंगाल का पानकृषि

किन उत्पादों के लिए भेजा गया है प्रस्ताव?

रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य सरकार अब कुछ और मशहूर उत्पादों को GI टैग दिलाने की तैयारी में है। इनमें शामिल हैं:

खजूर गुड़ (Date Palm Jaggery)- बंगाल का खजूर गुड़, खासकर सर्दियों में बनने वाला नोलेन गुर, स्वाद और खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। इसे GI टैग दिलाने की मांग लंबे समय से उठ रही है।

चनाचुर- बंगाल का चनाचुर अपने खास मसालेदार स्वाद के लिए मशहूर है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में इसकी अलग पहचान है।

बंगाली पान- राज्य के कुछ क्षेत्रों में उगाया जाने वाला पान भी GI टैग की दौड़ में बताया जा रहा है।

खजूर गुड़, चनाचुर और पान जैसे उत्पादों को GI टैग मिलने पर पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान और मजबूत हो सकती है। यह सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि किसानों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए कमाई का बड़ा मौका भी है।
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