Intermittent Fasting: इंटरमिटेंट फास्टिंग में गलती कहाँ? नाश्ता छोड़ना नहीं, देर से खाना है असली परेशानी

Preeti Nahar | Feb 18, 2026, 18:50 IST
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इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गया है। ऐसे में सही जानकारी न होने के कारण लोग इंटरनेट या सुनी-सुनायी बातों पर भरोसा करके फास्टिंग शुरू कर देते हैं। जिसका फयदा कम और नुकसान अधिक हो सकता है। ऐसे में इंटरमिटेंट फास्टिंग का सही तरीक क्या होना चाहिए और सबसे ज़रूरी कब होनी चाहिए फास्टिंग, इसकी सटीक जानकारी आपको सेहतमंद बना सकती है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के सही तरीके के बारे में हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के Neurologist, डॉ. सुधीर कुमार ने जो बताया वो जानना ज़रूरी है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में गलती कहाँ
Skipping Breakfast vs. Late Night Eating: आजकल गांव से लेकर शहर तक इंटरमिटेंट फास्टिंग (IF) का खूब चलन है। कोई 16 घंटे उपवास की बात कर रहा है, तो कोई 18 घंटे या 20 घंटे का दावा कर रहा है। सोशल मीडिया पर लोग बता रहे हैं कि उन्होंने बस खाना छोड़ दिया और वजन कम हो गया। लेकिन सवाल ये है क्या सिर्फ भूखा रहना ही सेहत की चाबी है? नई रिसर्च कहती है नहीं। अब बात सिर्फ कितनी देर नहीं, बल्कि किस वक्त खाने की है। मेडिकल जर्नल BMJ Medicine में छपी एक बड़ी स्टडी साफ़ इशारा कर रही हैं कि अगर आप नाश्ता छोड़कर देर रात खाना खा रहे हैं, तो आप अपने शरीर की कुदरती घड़ी के खिलाफ जा रहे हैं। इसका असर धीरे-धीरे शुगर, मोटापा और नींद तीनों पर पड़ता है।

शरीर की होती है अपनी एक घड़ी

शरीर की अपनी एक घड़ी होती है
शरीर की अपनी एक घड़ी होती है
इसी मामले को डिटेल में समझाते हुए हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के Neurologist, डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि,हमारा शरीर मशीन नहीं है,जो जब चाहे तब ईंधन डाल दो। यह सूरज के हिसाब से चलता है। वैज्ञानिक इसे Circadian Rhythm (ये एक तरह की शरीर की 24 घंटे चलने वाली आंतरिक जैविक घड़ी होती है जो नींद, जागना, हार्मोन रिलीज और शरीर के तापमान जैसी क्रियाओं को कंट्रोल करती है) कहते हैं। सुबह का वक्त शरीर के लिए सबसे अनुकूल होता है। यही वह समय है जब खाना अच्छे से पचता है और इंसुलिन सबसे बेहतर तरीके से काम करता है। जैसे-जैसे दिन ढलता है, शरीर की यह ताकत कम होती जाती है। शाम होते-होते शरीर धीरे-धीरे मरम्मत मोड में जाने लगता है, जहाँ शरीर कोशिकाओं की सफाई और थकान की भरपाई करता है। अब सोचिए, अगर कोई व्यक्ति रात 8–9 बजे भरपेट खाना खा ले, तो शरीर दो काम एक साथ करने पर मजबूर हो जाता है- खाना पचाना भी और खुद को ठीक करना भी। यहीं से गड़बड़ी शुरू होती है।

नाश्ता क्यों ज़रूरी है, डिनर क्यों नहीं

डॉ. सुधीर ने बताया, जो लोग सुबह जल्दी खाना शुरू करते हैं, जैसे 8 बजे या 10 बजे और शाम तक खाना बंद कर देते हैं, उनके शरीर पर इसका सीधा और अच्छा असर पड़ता है। ऐसे लोगों में-

  • ब्लड शुगर बेहतर कंट्रोल में रहती है
  • इंसुलिन सही समय पर और सही मात्रा में काम करता है
  • ब्लड प्रेशर कम होने लगता है
  • वजन और पेट की चर्बी लगती है घटने
इसके उलट, जो लोग नाश्ता छोड़ देते हैं और रात में देर से खाना खाते हैं, उनमें शुगर बढ़ने, मोटापा बढ़ने और थकान रहने का खतरा ज़्यादा देखा गया है। यानी समस्या ये नहीं कि आप खाना छोड़ रहे हैं समस्या ये है कि आप गलत वक्त का खाना नहीं छोड़ पा रहे।

‘मेलाटोनिन कॉन्फ्लिक्ट’ क्या होता है?

डॉ. सुधीर कुमार बताते हैं कि शाम ढलते ही दिमाग मेलाटोनिन नाम का हार्मोन छोड़ता है। यही हार्मोन नींद लाने का काम करता है। लेकिन इसका एक और काम है शरीर को संकेत देने का कि अब इंसुलिन का उत्पादन धीमा कर दो। अब अगर इसी वक्त यानी रात 9 बजे आप भारी खाना खा लेते हैं, तो शरीर असमंजस में पड़ जाता है। ऐसा करने से नुकसान ये होता है कि खून में शुगर बढ़ जाती है और देर तक खून में बनी रहती है। इंसुलिन कम बनता है, जिसे “मेलाटोनिन कॉन्फ्लिक्ट” कहते हैं। ये होता है देर रात खाना खाने से और इस स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म को धीरे-धीरे बिगड़ जाता है।

डिनर छोड़ना, नाश्ता छोड़ने से ज़्यादा फायदेमंद

डिनर छोड़ना, नाश्ता छोड़ने से ज़्यादा फायदेमंद
डिनर छोड़ना, नाश्ता छोड़ने से ज़्यादा फायदेमंद
डॉ. सुधीर बताते हैं, नाश्ता छोड़ने से बेहतर है डिनर छोड़ देना। अगर कोई व्यक्ति शाम 4 बजे या 6 बजे तक खाना खत्म कर देता है, तो रात के वक्त शरीर को पूरा मौका मिलता है कोशिकाओं की सफाई के लिए जिसे (ऑटोफैगी) कहते हैं। जल्दी खाना खाने से शरीर में जमा चर्बी को जलने के लिए समय मिल जाता है। ऐसा होने से नींद गहरी और सुकून भरी होती है। अगर आप इस प्रोसेस को रेगुलर अपनाते हैं तो इसके असर से वज़न धीरे-धीरे घटता है, पेट की चर्बी कम होती है साथ ही थकान भी कम ओवरऑल कम रहती है।

जानिए फास्टिंग का गोल्डन रूल

गाँवों में आज भी ज़्यादातर लोग सुबह जल्दी उठकर खेत, पशुपालन या मज़दूरी के काम में लग जाते हैं। अगर वही लोग नाश्ता छोड़ दें और रात को देर से पेट भर लें, तो शरीर पर इसका असर जल्दी दिखता है, जिससे होती है थकान, पेट निकलना और शुगर की शुरुआत। अगर तरीका थोड़ा सा बदल लिया जाए जैसे-सुबह पेट भर और सादा खाना, दोपहर संतुलित भोजन और शाम हल्का या बिल्कुल नहीं। तो बिना दवा के भी सेहत में बड़ा सुधार देखा जा सकता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग का असली मतलब भूखा रहना नहीं, बल्कि समझदारी से सही वक्त पर खाना है।
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