Heat Stress: बढ़ती गर्मी में गेहूं, सरसों, चने की पैदावार को कैसे रखें सुरक्षित, किसान जानें उपाय
Gaon Connection | Feb 25, 2026, 12:06 IST
उत्तर-प्रदेश में फरवरी के आखिर में कई इलाकों में बढ़ती असामान्य गर्मी से रबी की फसलें जैसे गेहूं, सरसों और चना पर बुरा असर पड़ सकता है। दाने के भराव की नाजुक अवस्था में तापमान ज्यादा रहने से न तो उपज ठीक से बन पाती है और न ही गुणवत्ता बनी रहती है। ऐसे में मौसम वैज्ञानिक किसानों को समय रहते कुछ जरूरी सलाह दे रहे हैं रबी की फसलों के बचाव के लिए, जानिए क्या हैं सुझाव?
बढ़ता तापमान
प्रदेश में फरवरी के अंत में अचानक बढ़ी गर्मी रबी की फसलों, खासकर गेहूं, सरसों और चने के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। इस समय फसलें दाना भरने जैसे अहम पड़ाव पर होती हैं और तेज गर्मी से उनकी पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो तापमान में थोड़ी सी भी वृद्धि से फसलें समय से पहले पक सकती हैं, दाने छोटे रह सकते हैं और कीटों का प्रकोप भी बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए किसानों को हल्की सिंचाई जारी रखने और मौसम विभाग की सलाह मानने की जरूरत है।
इस साल फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में तापमान बढ़ने की आशंका है, जिससे गेहूं की फसल को गर्मी के तनाव (Heat Stress) से बचाना बहुत जरूरी हो गया है। मौसम विभाग ने किसानों को कुछ खास उपाय अपनाने की सलाह दी है। डॉ. एस. एन. सुनील पांडेय, जो एक मौसम विशेषज्ञ हैं, ने बताया कि गर्मी के कारण फसलें अपनी अवधि पूरी करने से पहले ही पकने लगती हैं। इससे पौधों को दाना भरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, जिससे दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं।
डॉ. एस. एन. सुनील पांडेय (कानपुर, उ.प्र) के अनुसार, दाना बनने के समय तापमान में मात्र 2-3 डिग्री की वृद्धि भी गेहूं की पैदावार में 10-15% तक की कमी ला सकती है। सरसों और चने में भी इसी तरह पैदावार घटने की आशंका रहती है। दानों के ठीक से विकसित न होने के कारण उनकी गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिससे बाजार में किसानों को फसल का सही दाम नहीं मिल पाता।
गर्म और शुष्क मौसम, चेपा (Aphids) जैसे रस चूसने वाले कीटों के पनपने के लिए अनुकूल होता है, जो फसलों को और अधिक नुकसान पहुँचा सकते हैं। बढ़ते तापमान से मिट्टी की नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे पौधों पर 'हीट स्ट्रेस' बढ़ जाता है और उन्हें बार-बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
गर्मी के असर को कम करने के लिए पोषक तत्वों का छिड़काव भी फायदेमंद हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं में बालियाँ निकलते समय या दाना बनते समय 2% पोटेशियम नाइट्रेट (4 किलो प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़) का छिड़काव करने की सलाह दी है। इसके अलावा, 0.2% पोटेशियम क्लोराइड (400 ग्राम पोटाश खाद प्रति 200 लीटर पानी) का छिड़काव भी एक विकल्प है।
कुछ अन्य जरूरी सुझावों पर भी ध्यान देना चाहिए। सरसों की फसल में चेपा (Aphids) जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, इसलिए खेतों की नियमित जांच करते रहें। सब्जियों और बागवानी फसलों में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए पुआल या सूखी पत्तियों से मल्चिंग (Mulching) करें। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए एक डिजिटल कृषि-मौसम सलाहकार सेवा भी शुरू की है, जिससे आप अपने जिले की सटीक जानकारी पा सकते हैं।
अगले कुछ दिनों में तापमान बढ़ने का आशंका
मौसम वैज्ञानिक की सलाह
गर्म और शुष्क मौसम, चेपा (Aphids) जैसे रस चूसने वाले कीटों के पनपने के लिए अनुकूल होता है, जो फसलों को और अधिक नुकसान पहुँचा सकते हैं। बढ़ते तापमान से मिट्टी की नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे पौधों पर 'हीट स्ट्रेस' बढ़ जाता है और उन्हें बार-बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
- सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान दें किसान
- खेत में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करते रहें।
- इससे मिट्टी का तापमान कंट्रोल में रहेगा और फसल जल्दी नहीं पकेगी।
- सिंचाई हमेशा शाम को या जब हवा शांत हो, तभी करें।
- तेज हवा में सिंचाई करने से गेहूं की फसल गिर सकती है, जिससे नुकसान हो सकता है।
- अगर संभव हो तो दोपहर में करीब आधे घंटे फव्वारे से सिंचाई करना भी तापमान कम करने में काफी मददगार होता है।