Mobile Addiction: क्या आप भी हैं परेशान बच्चे की मोबाइल की लत से! जानिए कैसे छुड़ाएँ बच्चों की ये लत
Preeti Nahar | Feb 11, 2026, 10:51 IST
Mobile Addiction in Children: बच्चों में मोबाइल की लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। गाजियाबाद की घटना ने पेरेंट्स को चिंतित कर दिया है। मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता के अनुसार, बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए पेरेंट्स को सख्त कदम उठाने होंगे। बच्चों को अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखना और खुद रोल मॉडल बनना आवश्यक है।
कई रिपोर्ट्स बताती है कि रेगुलेशन से बचने के लिए बच्चे पेरेंट्स को ब्लैकमेल करना शुरू कर देते हैं जैसे-गुस्सा हो जाना,घर से बाहर निकल जाने की धमकी देना,चिल्लाने लगना या फिर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगना। हालिया हुई गाजियाबाद की घटना में मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगाने से तीन बहनों ने घर की बालकनी से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। ऐसे में पेरेंट्स बच्चों के साथ सख्त व्यवहार करने से डरने लगते हैं।
दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के Psychiatrist डॉ राजीव मेहता बताते हैं, "बच्चों के मोबाइल एडिक्शन के सबसे पहले जिम्मेदार पेरेंट्स होते हैं। किसी भी लत को दूर करने के उपाय के बारे में सोचा जाता है तो सबसे पहले लत लगी क्यों और जिसकी चीज़ की लत है वो पेशेंट को मिल कहाँ से रही है। ऐसे में अगर कोई पाँच साल का बच्चा लगातार मोबाइल चलाता है तो ये पेरेंट्स की गलती है कि इतने छोटे बच्चे के हाथों में मोबाइल दिया गया।"
इसके लिए डॉ राजीव मेहता बताते हैं, "ऐसे में पेरेंट्स को बिलकुल भी डरना नहीं चाहिए। क्योंकि बच्चा ऐसा तभी करता है जब उससे मोबाइल छीन लिया जाए, लेकिन मोबाइल न देखें तो क्या करना है ये ना बताया जाए। जैसे घर से बाहर न जाने देना, न ही कोई नई हॉबी सिखाना या फिर अपने खाली समय को रचनात्मक तरीके से कैसे सदुपयोगी बनाना है ये भी न बताना। ऐसे न करने से बच्चा अपने मनोरंजन के लिए सबसे आसान उपाय की तरफ आकर्षित होता है जो है मोबाइल। लेकिन इस स्टेज पर ये समझना भी जरूरी है कि बच्चा अपने खाली समय का सदुपयोग करे तो कैसे करे।"
दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के Psychiatrist डॉ राजीव मेहता बताते हैं, "बच्चों के मोबाइल एडिक्शन के सबसे पहले जिम्मेदार पेरेंट्स होते हैं। किसी भी लत को दूर करने के उपाय के बारे में सोचा जाता है तो सबसे पहले लत लगी क्यों और जिसकी चीज़ की लत है वो पेशेंट को मिल कहाँ से रही है। ऐसे में अगर कोई पाँच साल का बच्चा लगातार मोबाइल चलाता है तो ये पेरेंट्स की गलती है कि इतने छोटे बच्चे के हाथों में मोबाइल दिया गया।"
डॉ राजीव मेहता ने कुछ जरूरी पॉइंट्स बताए हैं
Moblie Addiction की रोकथाम सबसे पहले कैसे करनी है
- 1- सबसे जरूरी है बच्चों पर कंट्रोल रखें।
- 2- अगर बच्चा मोबाइल देख रहा है तो उसका सख्ती से टाइम फिक्स करें।
- 3- पेरेंट्स ये जांचे की बच्चा एकेडमिक या नॉन एकेडमिक, किस कारण से मोबाइल देख रहा है।
- 4- जिस डिवाइस को बच्चा यूज कर रहा है इसमें एप्लीकेशन को रेगुलेट करें। जो ऐप बच्चा डाउनलोड कर रहा है वो रेगुलेट करें, ताकि बच्चा आपत्तिजनक, हिंसक कंटेंट देखने से बचा रहे।
- 5- ऐप्स को रेगुलेट करने से टाइम चेक कर सकते हैं कि कितनी देर बच्चा किस एप्लीकेशन पर समय बिता रहा है, ऐसा करने से समय रहते मोबाइल इस्तेमाल के बढ़ते समय को कंट्रोल किया जा सकता है।
- ये कुछ जरूरी सुझाव हैं जिनको शुरूआती स्टेज में ही पेरेंट्स को ध्यान में रखना होगा, जब आपका बच्चा कम उम्र में मोबाइल माँगने लगता है।
बच्चों की मोबाइल से दूरी बनाने के लिए पेरेंट्स को क्या करना है?
- 1-बच्चों को बाहर जाने दें, अपने जाने-पहचाने या आस-पड़ोस के इलाके तक, घर में बाँध कर न रखें।
- 2- पड़ोसी बच्चों के साथ दोस्ती बढ़ाने दें, उनके साथ खेलने दें।
- 3- घर के अंदर फिजिकल कार्ड गेम्स, बोर्ड गेम्स रखें।
- 4-बच्चों को सैर पर लेकर जाएँ, नेचर के करीब रखें। जितना हो सके बच्चे के साथ समय बिताएँ।
- 5- सबसे जरूरी है पेरेंट्स खुद रोल मॉडल बनें। बच्चों के सामने अनावश्यक फोन न चलाएँ न ही इंटरनेट सर्फिंग करें।
- 6- अधिक फोन चलाने से सेहत पर क्या असर होता है, उसके बारे में बच्चों को प्रेम से समझाया जाए।
- 7- बच्चों के साथ दोस्ती बना कर रखें, ताकि बच्चे अपने मन के भाव कहने में हिचके ना।
- 8- अगर बच्चे ने कोई गलती की है तो, गलती के क्या नुकसान होते हैं या हो सकते हैं वो समझाएँ, ताकि बच्चा आपसे डरे नहीं बल्कि आप पर भरोसा आपका कहना मानना शुरू करे।
- 9- अगर इन कोशिशों के बाद भी बच्चा मोबाइल की लत नहीं छोड़ रहा है तो आपको मनोचिकित्सक से सलाह लेकर बच्चे की काउंसलिंग करवानी चाहिए।
- 10- Right vs Responsibility मॉडल बच्चों को समझाएँ, की मोबाइल चलाना बच्चा हक समझता है तो मोबाइल के इस्तेमाल की कुछ जिम्मेदारियाँ होती हैं, उसी के अनुसार मोबाइल का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से बच्चा धीरे-धीरे अपनी जिम्मेदारी समझना शुरू कर सकता है।