दुनिया चांद पर चली गई, यहां लोग पातालकुम्हड़ा ही खोज रहे

दुनिया चांद पर चली गई, यहां लोग पातालकुम्हड़ा ही खोज रहेइंटरनेट पर भी हर समय गैर-कानूनन तरीके से उत्पादों को प्रचारित किया जाता है।

आधी रात को टीवी शुरू करें तो गैर-कानूनी रूप से ऐसे उत्पादों का विज्ञापन दिखाई देता है जो कि सत्यता से कोसों दूर और जबरदस्त भटकाव लिए होता है। मोटापा, डायबिटीज, आर्थराइटिस कम करने, मर्दांगी और पौरुषत्व बढ़ाने वाले उत्पादों को खुलेआम बेचा जाता है। ना सिर्फ टी.वी बल्कि रेडियो, अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं से लेकर मोबाइल फोन और इंटरनेट पर भी हर समय गैर-कानूनन तरीके से उत्पादों को प्रचारित किया जाता है। ढोंगी बाबाओं, ज्योतिषों और तथाकथित लाल किताब की पैरवी करने वाले तमाम लोग आए दिन मासूम लोगों को बेवकूफ बनाकर अपनी जेबें गरम करने में लगे हुए हैं।

बाबाओं के उपाय, टोने-टोटके और कई तरह के अंधविश्वास हमें गर्त में ढकेलने पर आमादा हैं। कोई बाबा रक्षा कवच देकर, तो कोई रुद्राक्ष, तो कोई बाबा किसी तरह का यंत्र बेचकर अपनी दुकान चला रहा है। आखिर हम किस दिशा में जा रहें हैं? दुनिया चांद पर पहुंच गई, विज्ञान का स्वरूप बदल गया, लोक पारंपरिक हर्बल ज्ञान की प्रमाणिकता सिद्ध होती जा रही है लेकिन अब तक कुछ अंध-विश्वासों से हम बाहर नहीं आ सके हैं। अक्सर खबरें आती हैं कि कोई नागमणि के चक्कर में लाखों रुपए खो दिया तो किसी व्यक्ति सर्व सिद्धि पाने के लिए नरबलि तक दे दी। सुख और वैभव पाने की हमारी महत्वकांक्षाएं इस हद तक ज्यादा हो गईं हैं कि हम इसे पाने के लिए किसी भी हद तक गुजरने के लिए तैयार हैं।

मेरा अनुभव है कि समाज का अशिक्षित वर्ग इस अंधविश्वास की चपेट जितना में है, उतना ही शिक्षित और शहरी वर्ग भी। अभी कुछ दो महीने पहले दिल्ली के लाजपतनगर से एक महिला ने मुझे फोन किया और सफेद पलाश की उपलब्धता की बात की। ऐसा माना जाता है कि सफेद फूलों वाले पलाश के धड़ को पकड़कर आसमान में देखा जाए तो दिन में भी आसमान में तारे दिखाई देते हैं और इस पेड़ की जड़ों को घर में लाने से लक्ष्मी जी की कृपा बरसने लगती है, हलांकि इस तरह के किसी पेड़ को न मैंने देखा, ना ऐसा कोई अनुभव मेरी जिंदगी में अब तक हुआ। यह महिला मुझे 500000 रुपए देने के लिए तैयार थी। सवाल अंधविश्वास का ही नहीं अपितु हमारी सोच का भी है। ऐसी कितनी ही महिलाएं गलत व्यक्तिओं के संपर्क में आकर ऐसी वस्तुओं को पाने की चाह में हजारों का चूना लगवा बैठती हैं।

करीब दो वर्ष पहले चेन्नई से एक व्यक्ति मुझसे मिलने अहमदाबाद तक आ पहुंचा था उसे पातालकुम्हड़ा चाहिए था। किसी बाबा ने उन्हें पातालकुम्हाड़ा लाने पर दो लाख रुपए देने की पेशकश की थी। पातालकुम्हड़ा ने इस व्यक्ति को अहमदाबाद जरूर ले आया। इन्हें बाबा ने बताया था कि पातालकुम्हड़ा में लोहे और तांबे के तार को प्रवेश कराया जाए तो वह गल जाता है। पातालकुम्हड़ा मिल जाए तो आप किसी भी महिला को अपने वश में कर सकते हैं।

पेशे से इंजीनियर इस व्यक्ति को ऐसी खोज में लिप्त देखकर बेहद दुख हुआ। हाल ही में पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर एक व्यक्ति ने काली हल्दी की चाहत पेश की, महोदय ने मुझे मुंह मांगी रकम देने की भी बात कही। इनका कहना था कि काली हल्दी को तिजोरी में रख दिया जाए तो तिजोरी में खुले रखे जेवर या रुपए दूसरे व्यक्ति को दिखाई तक नहीं देते। देश के पढ़े-लिखे युवाओं को इस तरह की मूर्खता भरी चीजों को पाने की चाहत में भटकते देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। पाठकों को बताते चलूं कि इस तरह की कोई भी जानकारी मिले तो उसे तरजीह ना दी जाए, ये आपको गर्त में ही ले जाएंगी।

(लेखक गाँव कनेक्शन के कंसल्टिंग एडिटर हैं और हर्बल जानकार व वैज्ञानिक।)

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