कर्ज़ की जगह किसानों को निवेश की जरूरत

कर्ज़ की जगह किसानों को निवेश की जरूरतफोटो: अभिषेक वर्मा

लेखक- केदार सिरोही

देश में कई दशक से आमजन में चर्चा है कि किसानों पर आयकर नहीं लगाने से अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो पा रही है। वहीं दूसरी तरफ देश की सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के दावे भी कर रही है, जो कि भ्रम की अवस्था पैदा करती है। हमारी यह चिंता और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है जब सरकार का दृष्टिकोण साफ नहीं हो। इस समस्या को समझने में जितनी देरी की जा रही है, यह उतनी ही ज्यादा गंभीर होती जा रही है।

देश में कैसे कृषि आय दोगुनी हो सकती है क्योंकि एक से डेढ़ लाख करोड़ का कृषि उत्पादन है जबकि कृषि आयकर छूट, वायदा बाजार कम टैक्स ,कॉर्पोरेट सहायता, स्पेशल इकोनॉमिक जोन, कोस्टल इकोनॉमिक जोन आदि की छूट का योग देश की कृषि आय से ज्यादा है। इन सबको ख़त्म कर इसका फायदा किसानों को दिया जाए तो आय दोगुनी हो जाएगी और सेविंग बढ़ेगी जिसका उपयोग कर किसान कृषि के सहायक व्यापार शुरू करेंगे जिसके परिणाम स्वरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और गाँव में संपन्नता आएगी तो लघु उद्योग, प्रोसेसिंग, व्यापार, इंवेस्टमेंट करेंगे जिसके कारण गाँव खेती के साथ-साथ एक फैक्ट्री बनकर सामने आएंगे जो देश की कंपनियों से ज्यादा टैक्स देगा।

आज तक जीडीपी का डेढ़ से दो प्रतिशत तक ही खेती में इंवेस्टमेंट हुआ है जबकि योगदान 15 फीसदी से हमेशा अधिक रहा। अगर देश में कृषि में बड़ा इंवेस्टमेंट होता है तो प्रोडक्शन बढ़ेगा, रूरल इंडस्ट्रीज बढ़ेगी, एक्सपोर्ट बढ़ेगा, पलायन रुकेगा, बेरोजगारी रुकेगी, किसान आत्महत्या रुकेगी। आज खेती में बड़ा निवेश क्रेडिट, सिंचाई, मौसम, रिसर्च डेवलपमेंट, उन्नत बीज, मार्केटिंग, प्रोसेसिंग, भण्डारण, हेल्थ एजुकेशन में करने की जरूरत है। बाकि आज देश में कंपनियों की हालत जानते हैं, वर्ष 2014-15, देश की 43.6 फीसदी कंपनियां नुकसान में रही, वही तीन प्रतिशत कंपनियों ने कोई भी लाभ नहीं कमाया और 47.4 फीसदी ने अपना प्रॉफिट एक करोड़ तक दर्शाया है जबकि सिर्फ छह फीसदी कंपनिया एक करोड़ से ज्यादा का शुद्ध लाभ दिखा रही हैं और 2014-15 में देश में लाभान्वित 52,911 भारतीय कंपनियां जीरो फीसदी टैक्स दे रही हैं वैसी स्थिति में 0.33 फीसदी किसानों की आय करोड़ों में आना बेहद मजाकिया लगता है।

देश में 12 करोड़ किसान हैं जिसमें चार लाख किसान जो व्यापारी, अधिकारी, नेता हैं जिनकी बंजर जमीनें सोना उगल रही और दूसरी तरफ हर घंटे दो गरीब किसान आत्महत्या कर रहे हैं। एक कॉर्पोरेट किसान 200 करोड़ का आयकर छूट ले रहे हैं जो कि विचारणीय है इसलिए आज देश में किसानों की आय पर आयकर लगाना जरूरी हो गया है। अब समय की नज़ाकत देखते हुए सरकार द्वारा सीलिंग एक्ट से ज्यादा या 30 एकड़ से ज्यादा जमीन रखने वाले और जो किसान 30 लाख से ज्यादा के इनकम टैक्स से फायदा ले रहे हैं, उन पर टैक्स लगाना चाहिए जबकि बाकि किसानों को दूर रखना चाहिए क्योंकि छोटे-किसानों से आयकर लेने के लिए आयकर से ज्यादा खर्च सरकार को वसूलने के लिए करना पड़ेगा क्योंकि आज मात्र चार फीसदी लोग आयकर दे रहे हैं। उनको पकड़ा नहीं जा रहा है जिससे कि देश में आज 400 लाख से ज्यादा का कालाधन पैदा हो गया है।

2004 में सिर्फ एक व्यक्ति और 2008 में दो लाख से ज्यादा लोगों ने खेती से कमाई दिखाई और 17,116 करोड़ रुपए का खुलासा हुआ था। 2011 में रकम बढ़कर 2000 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है यानी जीडीपी के करीब 20 गुना के बराबर खेती से कमाई का खुलासा हुआ है। इसी कारण सीबीडीटी ने 2006-07 से 2014-15 वर्षों में कुल 2,746 लोगों ने एक करोड़ रुपए से ज्यादा की कृषि आय घोषित की है जो जांच के दायरे में है।

इन सबके मध्य सवाल यह खड़ा है कि जहां एक तरफ चार लाख किसानों द्वारा करोड़ों की आय सुनिश्चित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ चार लाख किसानों ने आजतक आत्महत्या कर ली है, लगभग आठ करोड़ किसानों पर सात से आठ लाख करोड़ का कर्ज है और घाटे के कारण 40 फीसदी किसान आज कृषि को छोड़ना चाह रहे है। पिछले दस वर्षों में भारत की कृषि ग्रोथ पांच फीसदी से ऊपर नहीं निकल पाई है। मतलब साफ है कि जो 0.33 फीसदी करदाता किसान है इसका मतलब कि यह लोग किसानों की आड़ में किसानों की सुविधाओं का उपयोग अपने व्यापार को बढ़ाने में कर रहे है।

(लेखक कृषि मामलों के जानकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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