झालावाड़ के डीएम ने शहीद की नवजात बेटी को लिखा खत, कहा,"प्यारी बिटिया, पिता की शहादत को अपना नूर और ग़ुरूर बनाना।"

11 जुलाई को श्रीनगर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों की तलाश के दौरान सेना के कमांडो मुकुट बिहारी मीना शहीद हो गए थे।

झालावाड़ के डीएम ने शहीद की नवजात बेटी को लिखा खत, कहा,प्यारी बिटिया, पिता की शहादत को अपना नूर और ग़ुरूर बनाना।

शहीद मुकुट बिहारी मीना के राजस्थान स्थित पैतृक गांव लडानिया में अंतिम संस्कार से पहले जब उनकी पांच महीने की बेटी आरू उनके कॉफिन पर लेट गई तो लोगों की आंखें नम हो आईं। वहां मौजूद झालावाड़ जिले के डीएम जितेंद्र कुमार सोनी ने उस पल जो महसूस किया बाद में उसे मासूम आरू को संबोधित एक पत्र में लिखा। यह पत्र सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहा। हम यहां उसे ज्यों का त्यों छाप रहे हैं, आरू को ढेरों आशीष और शुभकामनाओं के साथ:

"प्यारी बिटिया आरू,

शुभाशीष!

आज तुम्हें गोद में उठाए तुम्हारे मामा और परिवार के लोग जब आर्मी के एएसएल में बैठे और थोड़ी देर बाद तुम्हें तुम्हारे शहीद पिता की पार्थिव देहपेटी [कॉफ़िन] पर बैठाया तो पहले तुमने तिरंगे को छुआ और फिर बिना रोए कॉफ़िन पर ही लेट गई, तब मैं नहीं जान पाया कि तुम्हारा अबोध मन-मस्तिष्क तुम्हें क्या बतला रहा था। हो सकता है कि थोड़ी देर पहले जब तुमने अपने पिता के देह-दर्शन के दौरान चेहरा देखा होगा तो अपरिभाषित जुड़ाव के साथ कॉफ़िन पर लेट गई होंगी। वो जो कुछ भी था, बहुत ही मार्मिक था। मैं और आर्मी के सारे ऑफ़िसर्स तुम्हें देख रहे थे और मुझे पता है कि सभी अलग-अलग तरीके से सोच रहे होंगे मगर सोच का केंद्र तुम्हारी मासूमियत और तुम्हारे शहीद पिता थे।

प्रिय आरू, जब तुम थोड़ी बड़ी हो जाओगी, समझोगी और ख़ुद को अभिव्यक्त कर पाओगी तो जानोगी कि तुम्हारे जन्मदाता झालावाड़ की खानपुर तहसील के लगभग सौ घरों की आबादी वाले एक छोटे-से गाँव लड़ानिया के सपूत पैराट्रूपर शहीद स्वर्गीय मुकुट बिहारी मीना थे जिन्होंने कश्मीर में एक सर्च ऑपरेशन में देश के लिए अपनी जान न्यौछावर की थी। शहीद स्वर्गीय मुकुट बिहारी मीना जो पिता जगन्नाथ, बड़े भाई श्री शंभुदयाल, तीन बहनों कमलेश, सुगना और कालीबाई की आँखों के तारे, उम्मीद तथा हौसला थे और तुम्हारी माँ के लिए पूरा जीवन थे, केवल पच्चीस साल के थे और अपनी शहादत से दो माह पहले तुम सबसे मिलकर रक्षाबंधन पर आने का वायदा करके गए थे मगर इस वायदे से कहीं गहरे में और मज़बूत दृढ़ता के साथ जो उन्होंने देश के लिए क़सम खाई थी, वो उसके लिए क़ुर्बान हो गए और तिरंगे में लिपटकर घर आए थे ।

आरू बिटिया, तुम बड़ी होकर जब आज उनके अंतिम संस्कार के फ़ोटो और वीडियो देखोगी तो पता लगेगा कि वो अब पूरे देश के लिए किसी ना किसी संबोधन से जुड़ गए हैं । आज के दिन हज़ारों लोग उनकी अंतिम यात्रा में थे । लोग तिरंगा उठाए, तिरंगे में लिपटे शहीद के पीछे 'भारत माता की जय' के नारों के साथ चल रहे थे । माननीय मंत्रीगण, सांसद, विधायकगण, अनेक अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधिगण, पुलिस-प्रशासन, आर्मी, मीडिया और पूरे हाड़ौती के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए सम्मानित महानुभाव आपके शहीद पिता को श्रद्धासुमन अर्पित करने आए थे । जब पुष्पचक्र से शहीदवंदन हो रहा था, बिगुल बज रहे थे या सलामी फ़ायर हो रहा था तब पूरा आसमान आपके पिता की शहादत के जिंदाबाद के नारों से गूँज रहा था । तुम्हारे पिता अनेक युवाओं के लिए सेना में जाने के लिए प्रेरणा बनेंगे ।

झालावाड़ जिले के डीएम जितेंद्र कुमार सोनी

बिटिया आरू, जब बड़ी होकर तुम देश के शहीदों के बारे में पढ़ोगी या कभी किसी सभा/ कार्यक्रम में बोलोगी या शहीदों पर सुनोगी तो यक़ीन करना कि तुम्हारे चेहरे पर एक फ़ख़्र होगा और आँखों में एक गर्वित चमक। तुम अपने शहीद पिता की अंगुली पकड़कर तो बड़ी नहीं होगी मगर उनकी शहादत के किस्से तुम्हें रोज सुनने को मिला करेंगे ।जब भी उनकी याद आए तो ध्यान रखना कि कुछ अभाव चुभते हैं मगर तुम्हारे पिता की तरह देश के लिए क़ुर्बान होने का गौरव सबका नसीब नहीं होता । शहीद अमर होते हैं । तुम्हारे पिता के कॉफ़िन को कंधा देते हुए जब मैं चल रहा था और 'वन्देमातरम' तथा 'भारत माता की जय' के नारे लग रहे थे तो रोंगटे खड़े गए थे । तुम्हारे दादा ने मुखाग्नि देने से पहले अग्निदंडिका को जब तुम्हारे हाथों से छुआकर मुखाग्नि दी थी तो सारी दृष्टा आँखें नम थी ।

आरू, तुम्हारे साथ पूरे क्षेत्र ही नहीं देश के हर ज़िम्मेदार संवेदनशील नागरिक की दुआएं और आशीर्वाद है । तुम खूब पढ़ना, बढ़ना और अपने पिता की गौरवमयी शहादत को अपना नूर और ग़ुरूर बनाना ।

आशीर्वाद और अशेष शुभकामनाएं !

जितेंद्र"

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