बड़ा पेचीदा है यह सवाल, आखिर क्यों रेप करते हैं इंसान

जानकी लेनिन एक लेखक, फिल्ममेकर और पर्यावरण प्रेमी हैं। इस कॉलम में वह अपने पति मशहूर सर्प-विशेषज्ञ रोमुलस व्हिटकर और जीव जंतुओं के बहाने पर्यावरण के अनोखे पहलुओं की चर्चा करेंगी।

बड़ा पेचीदा है यह सवाल, आखिर क्यों रेप करते हैं इंसान

देश भर में जिस तादाद में और जितने वीभत्स व हैरान करने वाले तरीकों के साथ रेप और दूसरे यौन अपराध बढ़ रहे हैं उन्हें सुनकर मन में विचार उठता है कि ऐसा तो जानवर भी नहीं करते। क्या वाकई जानवर यौन अपराध नहीं करते? क्या केवल इंसान ही रेप करते हैं? इंसान क्यों रेप करते हैं? इन ढेर सारे सवालों के जवाब शायद जानकी लेनिन के इन लेखों में मिल जाएं जो उन्होंने दिल्ली के निर्भया कांड के समय लिखे थे। प्रस्तुत है इसकी दूसरी कड़ी।

ओरंगउटान के बारे में आम धारणा यह है कि मादाएं छोटे नरों की तुलना में विशाल आकार के नरों की ओर आकर्षित होती हैं। ऐसे में इन छोटे बदनसीब नरों के पास एक ही विकल्प होता है: जबर्दस्ती। इन परिस्थितयों में लगा कि ओरंगउटानों में यह रेप की वजह हो सकती है। लेकिन जैव मानव विज्ञानी चेरिल नॉट ने अपने अध्ययन में कुछ और ही पाया।

चेरिल ने देखा कि मादा ओरंगउटान कभी-कभी बड़े आकार वाले नरों का विरोध करती हैं और अपनी इच्छा से छोटे नरों के साथ भी संबंध बनाती हैं। आखिर ऐसा क्यों? चेरिल के मुताबिक, जरूरी नहीं कि मादाओं की नजर में सभी विशाल नर आकर्षक हों उनमें से कुछ तो उम्रदराज हो चुके होते हैं। ऐसे नरों का विरोध करके मादाएं छोटे नरों के साथ संबंध बनाती हैं ताकि अपने बच्चों को बचा सकें।


असल में बहुत से प्राइमेट (बनमानुष) समाजों में जब कोई नर झुंड के पुराने सरदार को हरा कर नया सरदार बनता है तो वह सबसे पहले झुंड के छोटे बच्चों को मार डालता है। अपने बच्चों की मौत से दुखी माएं बच्चे की चाह में फिर से मां बनना चाहती हैं और नए सरदार के साथ संबंध बनाती हैं। इस तरह नया सरदार पुराने नर की संतानों को हटाकर अपने वंश की वृद्धि करता है। चेरिल का अनुमान है कि मादा ओरंगउटान किसी तरह यह भांप जाती हैं कि अमुक छोटा नर सत्ता हथियाने वाला है, इसलिए वे उसके साथ संबंध बनाती हैं, इस उम्मीद के साथ कि जब नया नर सत्ता में आए तो शायद उनके नवजात बच्चों को बख्श दे। लेकिन इस मत को पूरी तरह से इसलिए नहीं माना जा सकता क्योंकि ओरंगउटानों में बच्चों की हत्या की घटनाएं नहीं देखी गई हैं। तब फिर मादा ओरंगउटानों की छोटे नरों के साथ संबंध बनाने की मजबूरी क्या है?

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यह रहस्य तब और गहरा जाता है जब मादा ओरंगउटान शुरू में शारीरिक संबंधों का विरोध करती हैं और बाद में सहयोग करने लगती हैं। या फिर इसका उलटा करती हैं, मतलब पहले सहयोग और बाद में विरोध। क्या इसे रेप कहा जा सकता है? कुल मिलाकर ओरंगउटानों के यौन संबंधों के बारे में अभी बहुत कुछ समझा जाना बाकी है।

सवाल अब भी वहीं है, इंसान रेप क्यों करते हैं?

विकासवादी जीवविज्ञानी रॉबर्ट ट्राइवर्स ने 1972 में एक अवधारणा पेश की थी जिसका नाम था "कान्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट बिटवीन सेक्सेस" यानि नर-मादा के बीच हितों का संघर्ष। बहुत से विचारकों ने इसके जरिए रेप को समझाने की कोशिश की। इसके मुताबिक, चूंकि शुक्राणुओं के निर्माण में पुरुषों की बहुत कम ऊर्जा खर्च होती है इसलिए वह अपनी संतति बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक महिलाओं के साथ संबंध बनाता है। वहीं महिलाएं नौ माह गर्भवती रहने के बाद बच्चे को जन्म देती हैं। नवजात शिशु असहाय होता है इसलिए उसकी देखरेख में भी महिलाओं को अपना काफी समय देना पड़ता है। इसलिए महिलाएं स्वाभाविक तौर पर अपने लिए सही साथी खोजने में काफी मीनमेख निकालती हैं। ट्राइवर्स के मुताबिक, पुरुषों को अधिक से अधिक संतानें चाहिए और महिलाओं को केवल उच्च गुणवत्ता वाली संतानें चाहिए, दोनों के नजरिए का यह फर्क ही रेप के लिए जिम्मेदार है।

लेकिन, अगर हितों का यह संघर्ष इतना अहम होता तब तो मानव समाज में बहुपत्नी प्रथा होनी चाहिए थी। पर क्या ऐसे समाज में रेप की आशंका कम होती? फिर दुनिया भर में अधिकतर समाज एकपत्नी प्रथा का पालन क्यों करते हैं? घुमंतू बन्जारों से लेकर आधुनिक औद्योगिक समाज में एकपत्नी प्रथा ही प्रचलन में है। यह तथ्य इस बात का संकेत है इस समस्या के मूल में कुछ और ही है।

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सांस्कृतिक मानवविज्ञानी जोसेफ हेनरिक के मुताबिक, बहुपत्नी प्रधान समाज में अधिक पत्नियां रखने से दूसरे पुरुषों को साथी नहीं मिल पाएंगी। यहां बतखों वाला उदाहरण याद कीजिए। इसलिए, बची हुई महिलाओं के लिए पुरुषों में भयानक संघर्ष होगा। ऐसी स्थिति में सामाजिक नियम टूटेंगे, हत्याएं होंगी, रेप होंगे, हिंसा व अपहरण होंगे और गरीबी फैलेगी।

लेकिन इसके विपरीत हमारे समाजों ने रेप और इसी तरह के दूसरे अपराधों को नियंत्रित करने के लिए एकपत्नी प्रथा का पालन किया। केवल पांच फीसदी स्तनपायी जीव बहुपत्नी प्रथा का पालन करते हैं। इसके बावजूद हम इंसान रेप की समस्या से जूझ रहे हैं।

1970 के दशक तक जीविज्ञानी तर्क देते थे कि पुरुष तभी रेप करते हैं जब उन्हें लगता है कि वे सजा से बच जाएंगे। उनकी यही प्रवृत्ति उनकी अगली पीढ़ी में स्थानांतरित हो जाती है। तब क्या रेप या बलात्कारी प्रवृत्ति आनुवंशिक बर्ताव है।

1975 में नारीवादी सुसान ब्राउनमिलर ने एकदम क्रांतिकारी नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा, "सभी पुरुष रेप का इस्तेमाल सभी महिलाओं को डराने के लिए करते हैं।" इसी आधार पर मनोविज्ञानी और नारीवादियों ने तर्क दिया कि रेप पुरुष दबदबे और महिलाओं पर वर्चस्व जताने का प्रतीक है।

2001 में अपनी किताब, 'अ नेचुरल हिस्ट्री ऑफ रेप' में जीवविज्ञानी रैंडी थॉर्नहिल और सांस्कृतिक मानवविज्ञानी क्रेग पामर ने कहा था कि ऐसे पुरुष रेप करते हैं जिनके पास महिला साथियों को आकर्षित करने के लिए रुतबा और संसाधन नहीं होते।

यह तर्क उसी गलतफहमी के जैसा है जिसके अनुसार कहा गया था कि छोटे नर ओरंगउटान इसलिए रेप करते हैं क्योंकि मादा ओरंगउटान उनकी तरफ आकर्षित नहीं होतीं।

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(ये जानकी लेनिन के निजी विचार हैं।)

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