ऑटिस्टिक बच्चे को चाहिए स्पेशल केयर, जानिए क्या होती हैं इनकी दिक्कतें

ऑटिस्टिक बच्चे को चाहिए स्पेशल केयर, जानिए क्या होती हैं इनकी दिक्कतेंआटिज्म के बच्चों में बोलचाल की दिक्कत ज्यादा होती है। 

लखनऊ। ऑटिज्म एक मानसिक विकार है, जिसमें रोगी बचपन से ही परिवार, समाज व बाहरी माहौल से जुड़ने की क्षमताओं को गंवा देता है। फिल्म 'माई नेम इज खान' तोमें शाहरुख खान को माइल्ड ऑटिज्म होता है। यह बीमारी 6 की उम्र में ही पनपनी शुरू हो जाती है। हालांकि जागरूकता की कमी के चलते बीमारी का देर से पता चलता है।

इस बीमारी के बारे में लखनऊ की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ शाजिया सिद्दिकी बताती हैं, ये कोई बीमारी नहीं है और अभी तक कोई भी रिसर्च ये नहीं पता कर पाई है कि ये किस कमी से होता है कुछ लोगों का कहना ये गर्भावस्था में पोषण की कमी से होता है और कुछ जानकारों का मानना है तनाव के कारण होता है।

क्या है ऑटिज्म

यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जो बातचीत और दूसरे लोगों से व्यवहार करने की क्षमता को सीमित कर देता है। इसे ऑटिस्टिक स्पैक्ट्रम डिसॉर्डर कहा जाता है, क्योंकि प्रत्येक बच्चे में इसके अलग-अलग लक्षण देखने को मिलते हैं। इनमें से कुछ बच्चे बहुत जीनियस होते हैं या उनका आईक्यू सामान्य बच्चों की तरह होता है, पर उन्हें बोलने और सामाजिक व्यवहार में परेशानी होती है। कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सीखने-समझने में परेशानी होती है और वे बार-बार एक ही तरह का व्यवहार करते हैं। चूंकि ऑटिस्टिक बच्चों में सहानुभूति का अभाव होता है, इसलिए वे दूसरों तक अपनी भावनाएं नहीं पहुंचा पाते या उनके हाव-भाव व संकेतों को नहीं समझ पाते। कुछ बच्चे एक ही तरह का व्यवहार बार-बार करने के कारण थोड़े से बदलाव से ही हाइपर हो जाते हैं।

क्या हैं लक्षण

बोलचाल व शाब्दिक भाषा में काफी कमी आ जाती है। पीड़ित बच्चे सही समय पर सही बात नहीं कहते और अपनी जरूरतों को भाषा या शब्दों का प्रयोग करके नहीं कह पाते। यदि बच्चे को भोजन करना है तो वह यह नहीं बोलता कि मुझे खाना दो। इसके विपरीत वह मां का हाथ पकड़ कर रसोई तक ले जाता है और मां अपने आप बात को समझ कर बच्चे को खाना दे देती है। खिलौनों, चाबी, रिमोट आदि को बार-बार पटकना, सुने-सुनाए व खुद के ईजाद किए शब्दों को बार-बार बोलते रहना, अपनी परछाईं से खेलते रहना उनकी आदत बन जाता है।

क्या हैं इसके कारण

ऑटिज्म के वास्तविक कारणों के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है। शोधों की बात करें तो कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान मां में थाइरॉइड की कमी भी इसका कारण हो सकती है।

ऑटिज्म का इलाज

ऑटिज्म एक प्रकार की विकास संबंधी बीमारी है, जिसे पूरी तरह से तो ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन सही प्रशिक्षण और परामर्श की मदद से रोगी को बहुत कुछ सिखाया जा सकता है ताकी वह रोजमर्रा के काम खुद कर सकें। ऑटिज्म एक आजीवन रहने वाली अवस्था है, जिसके पूर्ण इलाज के लिए मनोचिकित्सक से संपर्क करें। जल्द से जल्द ऑटिज्म की पहचान करके मनोचिकित्सक से तुंरत सलाह लेना ही इसका सबसे पहला इलाज है।

डॉ शाजिया सिद्दिकी बताती हैं, इसका कोई इलाज नहीं है बस इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। ज्यादातर ऐसे बच्चों में बात चीत और समझाने की क्षमता कम होती है। इसलिए उनकी कम्यूनिकेशन स्किल को सुधारने की ओर प्रयास करना चाहिए। इसके लिए बच्चे की थेरेपी लगातार चलती है जिससे उसे नॉर्मल करने की कोशिश की जाती है।

ऑटिज्म बच्चे की मदद

बच्चों को शारीरिक खेल के लिए प्रोत्साहित करें।

पहले उन्हें समझाएं, फिर बोलना सिखाएं।

खेल-खेल में उन्हें नए शब्द सिखाएं।

छोटे-छोटे वाक्यों में बात करें।

खिलौनों के साथ खेलने का सही तरीका बताएं।

बच्चे को तनाव मुक्त रखें।

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