अगर आप भी बच्चों को भूत-प्रेत की कहानियों से डराते हैं तो इसे जरुर पढ़ें

Shrinkhala PandeyShrinkhala Pandey   10 Jan 2018 3:44 PM GMT

अगर आप भी बच्चों को भूत-प्रेत की कहानियों से डराते हैं तो इसे जरुर पढ़ेंबच्चों को डराएं नहीं।

अक्सर हम छोटे बच्चों को डराने के लिए या किसी काम से रोकेने के लिए भूत प्रेत की कहानियां, झोली वाले बाबा ले जाएंगें जैसी काल्पनिक कहानियां बताते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि ये तरीका कितना गलत है। ये आपके बच्चे के दिमाग पर बुरा असर डाल सकता है।

इस बारे में लखनऊ की मनोचिकित्सक डॉ शाजिया सिद्दिकी बता रही हैं, "ये डर बच्चों के पूरे जीवन का एक भाग बन जाता है। फिर पढ़ाई, फिटनेस, खेलकूद हर काम करने के लिए ये डर उनपर हावी रहता है। ये थोड़े समय का डर उनके भविष्य में उनको लंबे समय तक के आत्मविश्वास को भी कम कर सकता है।"

ये डर बच्चों में असुरक्षा की भावना पैदा करता है जिससे उनके विकास पर भी असर पड़ सकता है। जैसे उदाहरण के लिए 16 साल का प्रणव रात में अकेले छत पर नहीं जाता क्योंकि बचपन से उसकी मां ने उसे ये कहकर डराया कि उड़न तस्तरी उसे लेकर चली जाएगी, मुंहनोचवा आ जाएगा। प्रणव छत पर जब भी अकेले खुले आसमान में लेटता है तो उसे यही कहानियां याद आती हैं। भले ही प्रणव की मां का इसके पीछे सिर्फ ये इरादा था कि कहीं वो अकेले छत पर जाए और गिर गया तो उसे चोट आ सकती है लेकिन ये काल्पनिक कहानियां अब उसके जीवन का एक भाग बन गई हैं।

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ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास की भी कमी हो जाती है। फिर वो स्कूल के किसी अन्य प्रोग्राम में भाग नहीं लेते। बच्चों के मन में कई ग़लत धारणाएं बैठ जाती हैं, जिसका उनकी सोच पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ये बच्चे डरे सहमे और छोटी छोटी बातों पर सहम जाने वाले होते हैं।

अभिवावक इन बातों का रखें ध्यान

  • अगर आपका बच्चा कोई ग़लती करता है या आपकी बात नहीं मानता है, तो उसे प्यार से समझाएं।
  • प्यार से अपने बच्चे की बात सुनें और अगर उसे उस काम से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे दूर करने की कोशिश करें।
  • बच्चे के व्यवहार को समझने की कोशिश करें।
  • किसी भी काम को करने की एक निश्‍चित सीमा तय करें और समय पर काम पूरा करने के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करें।
  • हर काम को करने से कुछ सीखने को मिलता है, यह बात बच्चे को समझाएं।
  • अगर आपको लगता है कि यह डर आपके बच्चे की ज़िंदगी को ख़तरे में डाल सकता है, तो तुरंत किसी प्रोफेशनल काउंसलर या सायकोलॉजिस्ट से मिलें।

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