किशोरियों में एनीमिया का बढ़ता ख़तरा: फास्ट फूड और खान-पान की गलत आदतें ज़िम्मेदार
Preeti Nahar | Jan 06, 2026, 17:05 IST
लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के हालिया शोध में एक चिंताजनक जानकारी सामने आई है। किशोरियों में फास्ट फूड के सेवन के कारण खून की कमी, जिसे हम एनीमिया कहते हैं, तेजी से बढ़ती जा रही है। 12 से 15 वर्ष की उम्र की 150 किशोरियों का अध्ययन करने पर, 89% में एनीमिया के लक्षण पाए गए।
लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की एक नई स्टडी ने चिंताजनक खुलासा किया है कि लगातार फास्ट फूड खाने से किशोरियों में एनीमिया (खून की कमी) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। 12 से 15 वर्ष की 150 ग्रामीण और शहरी किशोरियों पर किए गए इस अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई कि 89% लड़कियां एनीमिया से ग्रस्त हैं। रिसर्च टीम की हेड प्रो. सुजाता देव और काउंसलर सौम्या सिंह ने बताया कि यह समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि खान-पान की गलत आदतों और जागरूकता की कमी का भी नतीजा है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
यह स्टडी खास तौर पर उन घरों के लिए है जहाँ बच्चे हैं। क्या आपको याद है कि आपने अपने बच्चों की एनीमिया की जांच कब कराई थी? अगर नहीं, तो तुरंत करा लें। क्योंकि एनीमिया की कमी के नुकसान जानलेवा भी हो सकते हैं। दरअसल, एनीमिया का मतलब है शरीर में खून की कमी और यह कमी अनहेल्दी और फास्ट फूड खाने की आदत से होती है।
लखनऊ की KGMU की इस नई रिसर्च में 12 से 15 साल की 150 ग्रामीण और शहरी किशोरियों पर अध्ययन किया गया। इस रिसर्च में पाया गया कि 89% किशोरियां एनीमिया से पीड़ित थीं। इनमें से 26% लड़कियां ऐसी थीं जो हर दिन जंक फूड खाती थीं। वहीं, 71% लड़कियों ने माना कि वे नियमित भोजन की जगह फास्ट फूड खाती हैं।
रिसर्च में शामिल 89% किशोरियों में एनीमिया पाया गया। इनमें से 26.6% में हल्का एनीमिया था, 42.6% में मध्यम और 19.3% में गंभीर एनीमिया था। रिसर्च में यह भी पता चला कि इन लड़कियों में से सिर्फ 26% लड़कियां ही रोज हरी पत्तेदार सब्जियां खाती थीं। विटामिन C से भरपूर चीजें, जो आयरन को शरीर में सोखने में मदद करती हैं, वे तो इन लड़कियों की डाइट से लगभग गायब ही थीं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लगभग 74% लड़कियों को पता था कि एनीमिया क्या है, लेकिन फिर भी उनका खान-पान वैसा ही रहा। मतलब ज्ञान तो था, पर आदतें नहीं बदलीं। नोडल ऑफिसर प्रो. सुजाता देव बताती हैं कि जब खून में आयरन कम हो जाता है, तो हीमोग्लोबिन कम होता है। इससे शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाने में दिक्कत होती है। इसके कारण थकान, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं।
एनीमिया सिर्फ थकान नहीं है, यह आपकी पढ़ाई, इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) और आगे की जिंदगी को भी प्रभावित करता है। खासकर युवतियों के लिए इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। स्कूल में उनका ध्यान कम लगता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। भविष्य में मातृत्व स्वास्थ्य खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने की संभावना भी रहती है। यानी यह समस्या एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक बोझ बन सकती है।
रेडक्लिफ लैब्स में मुख्य परिचालन और चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रशांत नाग ने बताया कि- देश की लगभग हर तीसरी महिला एनीमिया से पीड़ित है। यह समस्या सिर्फ गांवों की नहीं, बल्कि शहरों की भी है। इसके पीछे सिर्फ शारीरिक कारण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कारण भी हैं। यह समस्या सिर्फ छोटी बच्चियों में ही नहीं, बल्कि बड़ी उम्र की महिलाओं में भी खून की कमी पाई जाती है। अधिकतर महिलाएं दिनभर काम, घर और बच्चों में इतनी व्यस्त रहती हैं कि वे अपने लिए सही से खाने का समय नहीं निकाल पातीं। सुबह की भागदौड़ में वे कभी नाश्ता छोड़ देती हैं, तो कभी दिन का लंच समय पर नहीं करतीं। कभी-कभी तो वे रात का खाना तभी खाती हैं जब पूरा परिवार खाना खा लेता है। इसके ऊपर, अगर देर से खाने के बाद भी भोजन पौष्टिक न हो, सिर्फ पेट भरने के लिए हो, तो ऐसा खाना शरीर की जरूरतें पूरी नहीं कर सकता।
महिलाओं की डाइट में अक्सर आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12 और प्रोटीन जैसे जरूरी तत्वों की कमी होती है। बिना हरी सब्जियां, दालें, फल या सूखे मेवे शामिल किए, केवल रोटी-सब्जी या चावल से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। यही कमी धीरे-धीरे खून की कमी का रूप ले लेती है। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ आसान उपाय हैं। अपनी डाइट में आयरन युक्त आहार शामिल करें, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), चुकंदर, अनार, गुड़, किशमिश, सोया और दालें। फोलिक एसिड और विटामिन B12 के लिए अंडे, दूध, दही, केला और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करें। हीमोग्लोबिन की नियमित जांच कराएं, खासकर प्रेग्नेंसी या अत्यधिक ब्लीडिंग की शिकायत होने पर। डॉक्टर की सलाह से ही आयरन की गोलियां या सप्लीमेंट्स लें। सबसे महत्वपूर्ण है कि आप खुद को प्राथमिकता दें। समय पर खाना, सही मात्रा में और संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है।