दिल को बीमारियों से बचाना है, काले तिल का इस्तेमाल शुरु कीजिए

दिल को बीमारियों से बचाना है, काले तिल का इस्तेमाल शुरु कीजिएकाले तिल दिल की सेहत के लिए काफी फायदेमंद हैं

कहते हैं हाईपरटेंशन की वजह से हृदय से जुड़े अनेक विकार हो सकते हैं, यदि उच्च रक्तचाप यानि हाईपरटेंशन को काबू में ना रखा जाए तो ये आपकी सेहत बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। मध्यप्रदेश के मंडला जिले के एक बुजुर्ग जड़ी-बूटी जानकार हीरन लाल से चर्चा करते हुए मुझे काले तिल के बारे में बड़ी ही रोचक जानकारी मिली थी। बातचीत दरअसल हृदयाघात और पारंपरिक नुस्खों के दावों के लेकर हो रही थी। बुजुर्ग ने सिर्फ एक बात कहकर मेरे सारे सवालों को विराम दे दिया था, उन्होनें कहा दिल की बात करोगे तो तिल की बात जरूर करना।

वैज्ञानिक कर रहे शोध

सन 2012 में थाईलैंड की माहिडोल यूनिवर्सिटी के कुछ वैज्ञानिक ने हीरन लाल जैसे जानकारों के काले तिल से जुड़े पारंपरिक ज्ञान पर आधारित कुछ दावों की पुष्टि कर दी थी और इन दावों से सारा आधुनिक औषधि विज्ञान जगत भी अचंभे में आ गया था। आज भी माहिडोल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की उस शोध पर कई अन्य वैज्ञानिक अपने-अपने तरह से आधुनिक तरीकों को अपनाकर शोध कर रहे हैं। कई फार्मा कंपनियों की नींद उड़ा देने वाली वैज्ञानिकों की उस शोध रिपोर्ट ने काले तिल (काली तिल्ली) के कुछ खास गुणों की क्लिनिकल रिसर्च से प्राप्त परिणामों की खूब वकालत की है।

टोकोफेरॉल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर तिल

तिल में टोकोफेरॉल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स खूब पाए जाते हैं। काले तिल के तेल में प्रोटीन, सिसेमोलिन, लाइपेज, पामिटिक, लिनोलीक एसिड तथा कई प्रकार के ग्लिसराइडस पाए जाते हैं इसलिए भी इसे दिल के खास माना जाता है। हृदय विकारों की बात हो या रक्त दबाव से जुड़ी बातें, तिल तो खास है ही लेकिन इसके अलावा इसके कई ऐसे नायाब उपयोग भी हैं जिन्हें आज भी आदिवासी अंचलों में बेजा इस्तेमाल में लाया जाता है।

काले तिल का प्रभाव

चलिए, सन 2012 की उस शोध को थोड़ा समझने की कोशिश करते हैं। काले तिल के प्रभावों को बताने वाली उस शोध के अंतर्गत 50 की उम्र के आस-पास के 30 पुरुषों और महिलाओं को सम्मिलित किया गया। ये सभी लोग प्री-हाईपरटेंशन यानि उच्च रक्तचाप होने स्थिति या बॉर्डर लाइन में थे। इन सभी लोगों का रक्त दबाव (ब्लड प्रेशर) सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा था। पूरी शोध प्रक्रिया के लिए एक माह की समय सीमा तय की गई। इस शोध समय सीमा के दौरान रोगियों ने किसी अन्य दवा या इलाज को नहीं अपनाया। सारे रोगियों को दो समूह में बांटा गया।

एक समूह के तमाम लोगों को तिल के 420 मिली ग्राम वाले छह कैप्सूल प्रतिदिन (2-2 कैप्सूल दिन में तीन बार) दिए गए यानि दिन भर में कुल मिलाकर 2.5 ग्राम (आधा चम्मच) तिल का सेवन कराया गया, जबकि अन्य समूह के रोगियों को तिल के कैप्सूल नहीं दिए गए और चार हफ्तों के बाद इन दोनों समूह के रोगियों के ब्लड प्रेशर की जांच की गई। शोध के परिणामों से ज्ञात हुआ कि तिल दिए गए प्री-हाईपरटेंशन के रोगियों के ब्लड प्रेशर में काफी चमत्कारिक तरीके से गिरावट या कमी आई। महज चार हप्तों तक प्रतिदिन 2.5 ग्राम तिल के सेवन से इन रोगियों का ब्लड प्रेशर 132 एमएमएचजी से 121 एमएमएचजी हो गया जबकि दूसरे समूह के रोगियों के प्री-हाईपरटेंशन कंडिशन में कोई बदलाव नहीं आया।

तिल का सेवन करने वाले रोगियों के रक्त में मेलोंडायएल्डिहाइड के स्तर में गिरावट देखी गई और साथ इनके रक्त के विटामिन ई के स्तर में खासी बढ़ोतरी देखी गई। मेलोंडायएल्डिहाइड की मात्रा रक्त में ज्यादा होने से हृदय आघात की संभावनाएं ज्यादा रहती है। लिपिड स्तर को बनाए रखने के लिए विटामिन ई का ज्यादा होना बेहतर माना जाता है। इतना सब जान लेने के बाद वाकई मुझे काले तिल के बारे में हीरनलाल की कही बात जरूर याद आई, 'दिल की बात करोगे तो तिल की बात जरूर करना।" कई फार्मा कंपनियों की नींद उड़ा देने वाली वैज्ञानिकों की उस शोध रिपोर्ट ने काले तिल (काली तिल्ली) के कुछ खास गुणों की क्लिनिकल रिसर्च से प्राप्त परिणामों की खूब वकालत की है।

क्या कहता है देसी ज्ञान

मोम पांच ग्राम और काले तिल का तेल 20 ग्राम मिलाकर गर्म किया जाए और पेस्ट बन जाने पर फटे हुए पैरों या बिवाई पर लगाया जाए तो बिवाईयों में आराम मिल जाता है। मध्य भारत के आदिवासियों के अनुसार तिल की जड़ और पत्तों का काढ़ा बना लिया जाए और इससे बालों को धोया जाए तो बालों का रंग काला हो जाता है। डाँगी आदिवासियों की मानी जाए तो तिल के तेल को प्रतिदिन बालों में लगाने से बाल काले हो जाते है और इनका झडऩे का क्रम रुक जाता है साथ ही रूसी से भी छुटकारा मिल जाता है। बवासीर होने पर तिल के बीजों (10 ग्राम) को कुचलकर पानी (50 मिली) में उबाला जाए और ठंडा होने पर घाव वाले हिस्से पर लेपित किया जाए तो तेजी से आराम मिलता है। आदिवासियों के अनुसार दिन में कम से कम 2 बार इस प्रक्रिया दोहराया जाना चाहिए। महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाली दर्द की शिकायत होने पर तिल के बीजों (5 ग्राम) को सौंफ (3 ग्राम) और (गुड़ 5 ग्राम) के साथ मिलाकर पीसकर सेवन किया जाए तो दर्द में काफी राहत मिलती है, जिन्हें बार-बार पेशाब जाने की शिकायत होती है उन्हें तिल और अजवायन के बीजों की समान मात्रा को तवे पर भूनकर दिन में कम से कम दो बार एक-एक चम्मच मात्रा का अवश्य सेवन करना चाहिए।

मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण है तिल

डाँग, गुजरात के आदिवासियों के मानी जाए तो तिल और अजवायन के भुने हुए बीजों की समान मात्रा (आधा चम्मच) को दिन में कम से कम 4-5 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में चबाने से मधुमेह के रोगियों को काफी फायदा होता है। सर्दियों में तिल और गुड़ के पाक का मिश्रण शरीर में गर्मी प्रदान करता है। ग्रामीण इलाकों में काले तिल का इस्तेमाल सर्दी को दूर भगाने के लिए किया जाता है। जानकारों के अनुसार काले तिल की एक चम्मच मात्रा की फांकी लेने से सर्दी में आराम मिलता है।

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