होली खेलें , लेकिन थोड़ा संभलकर

होली खेलें , लेकिन थोड़ा संभलकररंग आपके शरीर को पहुंचाते हैं नुकसान।

होली एक ऐसा त्यौहार है जिसमें लोग खूब मौज-मस्ती करते हैं। मौज मस्ती करिए लेकिन इस होली आप खुद को बीमार मत हो करिए। होली में खुद को कैसे सुरक्षित रखें बता रहे हैं किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के श्वसन विभाग के अध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त।

होली रंगों का त्योहार है। मेलजोल खाना-पीना और मस्ती हुड़दंग पूरे माहौल को अच्छा बना देता है। इस मौसम में एक-दूसरे को रंगों में सरोबार करते लोग गुझिया की मिठास से अपनी संबंधों में एक नई निकटता और गर्मजोशी भर लेते हैं लेकिन कई बार रंगों के खेल खिलवाड़ और खानपान के दौरान सेहत को नुकसान पहुंचा जाते हैं, जिससे हमें जरुर बचना चाहिए।

कुछ दशकों पहले तक होली के रंग पूरी तरह से प्राकृतिक होते थे। फूलों के रंग से होली खेली जाती थी, लेकिन रासायनिक रंगों ने होली को स्वास्थ्य के परिप्रेक्ष में एक खतरनाक त्यौहारों में तब्दील कर दिया है। हर रासायनिक रंग में कोई ना कोई घातक रसायन मिश्रित होता है, जो आंख, त्वचा, नाक और कई बार लीवर और गुर्दे तक को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ एक रंगों में कैंसर की भी कारक होते हैं।

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होली में रंगों के खेलने से बचें।

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रासायनिक रंगों के कारण त्वचा पर जलन की समस्या पैदा हो सकती है और इस पर निशान पड़ सकते हैं। गुलाल और अबीर में मिला हुआ शीशा त्वचा में ददोरे लालिमा और गंभीर खुजली पैदा कर देता है। इसके अलावा त्वचा से या नाक या मुंह की म्युकोजल सतह से शरीर के भीतर जाकर यह जहरीले तत्व शरीर को कई दूरगामी क्षति पहुंचा सकते हैं। गीले रसायनिक रंगों में भी ग्रीन कॉपर सल्फेट, मरकरी सल्फेट, क्रोमियम जैसे अकार्बनिक धात्विक और बेंजीन जैसे घातक एरोमेटिक कंपाउंड होते हैं जो त्वचा पर एलर्जी डर्मेटाइटिस और खारिश पैदा कर सकते हैं।

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सिंथेटिक रंगों से त्वचा का रंग होना कांटेक्ट डर्मेटाइटिस यानी (त्वचा की एलर्जी), एब्रेशन (त्वचा का छिल जाना) इरिटेशन (त्वचा में आंखों में जलन या असहज महसूस करना), खुजली होना ड्राईनेस (त्वचा या नेत्रों में सूखापन महसूस होना) और फटी हुई त्वचा शरीर की समस्याएं पैदा हो जाती है। जब आप रंग उतारने के लिए त्वचा को मलते हैं तो बेंजीन नामक रसायन त्वचा के ऊपरी भाग को नुकसान पहुंचाता है। हरे रंग में कॉपर सल्फेट शामिल हो सकता है, जिससे आंखों में एलर्जी की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड हो सकता है, जिससे ब्रोंकियल अस्थमा और एलर्जी की समस्या पैदा हो सकती है। सिल्वर रंग में एलुमिनियम ब्रोमाइड शामिल होता है जो त्वचा संबंधी रोग पैदा कर सकता है।

होली के मिलने-मिलाने के दौर में खान-पान की भी अति हो जाती है, जिससे एसिडिटी, अपच, गैस्ट्राइटिस और उल्टी दस्त जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। ऐसे में खाते समय सेहत का ध्यान रखें कोशिश करें कि हल्के और सुपाच्य खाने का सेवन करें। तैलीय, तीखी, गरिष्ठ और मसालेदार चीजों के सेवन से बचें।

रंगों से बचने के अपनाए तरीके।

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रंगों से सुरक्षा अपनाएं

कुदरती रंगों का ही उपयोग करें।

होली खेलने से पहले अपने बालों में अच्छी तरह से तेल लगाएं।

शरीर को ठीक से ढक कर ही होली खेलें।

पूरे शरीर की त्वचा पर अच्छी क्वालिटी की क्रीम या तेल लगाएं।

त्वचा में कहीं जलन महसूस हो तो तुरंत धो लें।

त्वचा पर गंभीर लाल या सूजन हो तो धूप में जाने से बचें और डॉक्टर की सलाह लें।

होली खेलने के बाद जल्द से जल्द त्वचा और बालों से सारा रंग धो डालना सबसे जरूरी होता है।

त्वचा पर साबुन लगा कर उसे जोर से न मले बल्कि प्राकृतिक उबटन और कच्चे दूध की सहायता से रंग को निकालने की कोशिश करें बाद में किसी अच्छे साबुन या शैंपू से त्वचा और बालों को धुल सकते हैं।

खाने-पीने से बचाव करें।

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