चेहरों और अक्षरों को कैसे पहचान पाते हैं इंसान?

चेहरों और अक्षरों को कैसे पहचान पाते हैं इंसान?आंखें दृश्य के विभिन्न हिस्सों पर फोविया तक भेजने के लिए लगातार गति करती हैं

नई दिल्ली (भाषा)। क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान चीजों को पढ़ कैसे पाता है? कोलकाता में जन्मे वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाले एक दल ने पाया है कि इंसानों की आंख में पाया जाने वाला ‘फोविया’ यानी गर्तिका नामक एक विशेष ‘स्वीट स्पॉट’ कंप्यूटर स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित कर पाने और पढ़ पाने में एक अहम भूमिका निभाता है। यह क्षमता इंसानी प्रजाति में ही पाई जाती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, ये नतीजे उस प्रक्रिया को परिभाषित करते हैं, जो इंसानों को चीजें पढ़ने, चेहरे पहचानने, रंगों का आनंद लेने की क्षमता देती है। रौनक सिन्हा और मृणालिनी हून खुद को एक ऐसा ‘वैज्ञानिक दंपत्ति’ बताते हैं, जो नजर को बेहतर ढंग से समझने के लिए न्यूरोसाइंस के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करते हैं।

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सिन्हा कहते हैं कि यह अध्ययन इस संदर्भ में एक हालिया उपलब्धि है कि हमारी केंद्रीय नजर, फोविया के माध्यम से कोशिकीय स्तर पर कैसे काम करती है और यह हमारी परिधीय नजर को जोड़ने वाले क्षेत्र से किस तरह अलग से काम करती है।’’ नजर का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने आंख के फोविया की कुछ अलग किस्म के गुणों के पीछे के कारणों का खुलासा किया है। स्तनधारियों में सिर्फ इंसान और अन्य वनमानुष ही हैं, जिनके रेटिना में डिंपल जैसी संरचना होती है। उल्लुओं और कुछ अन्य शिकारी पक्षियों तथा कुछ रेंगने वाले जंतुओं में ऐसी संरचना पाई जाती है। रंगीन चीजों के अनुभव के लिए फोविया जिम्मेदार है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के स्कूल ऑफ मेडिसिन में फिजियोलॉजी एंड बायोफिजिक्स डिपार्टमेंट में कार्यरत सिन्हा कहते हैं, ‘‘फोविया नजर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए ‘मैक्यूलर डिजनरेशन’ (रेटिना के एक हिस्से का क्षतिग्रस्त होना) परिधीय नजर में खामी आने से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।’’ वह बताते हैं कि फोविया एक ऐसा विशेष क्षेत्र है, जो हमारी देख पाने की क्षमता में एक अहम भूमिका रखता है। मस्तिष्क के विजुअल कोर्टेक्स को आधे से ज्यादा इनपुट यही देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आप अपनी एक बाजू से कुछ दूरी पर कोई दृश्य देखते हैं तो फोविया में यह क्षेत्र संक्षिप्त आकार का ही आता है। हमारी आंखें इस दृश्य के विभिन्न हिस्सों पर फोविया तक भेजने के लिए लगातार गति करती हैं।’’ आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए सिन्हा ने एक अध्ययन का नेतृत्व किया, जिसमें यह पाया गया कि फोविया की गणनात्मक संरचना और दृष्टि संबंधी प्रक्रिया रेटिना के अन्य क्षेत्रों से अलग है। सिन्हा ने कहा कि ये नतीजे इस लिहाज से अहम हैं कि वैश्विक तौर पर बीमार इंसानों में केंद्रीय नजर को बहाल करने के प्रयास चल रहे हैं लेकिन फोविया के कामकाज के बारे में हमारी समझ मूल तौर पर गायब है।

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