जानिए अस्थमा की रोकथाम के लिए देसी नुस्ख़े

जानिए अस्थमा की रोकथाम के लिए देसी नुस्ख़ेजानिए अस्थमा की रोकथाम के लिए देसी नुस्ख़े।

ठंड जबरदस्त पैर पसारने को तैयार है और कड़कड़ाती ठंड में अक्सर सांस से संबंधित समस्याओं में तेजी आ जाती है। ठंड के मौसम में हवा में तैरते प्रदूषित कण और परागकण भी सांस लेने की समस्या को और भी ज्यादा कर देते हैं। सांस लेने की समस्या जिसे अस्थमा या दमा के नाम भी जाना जाता है, इसके इलाज के लिए अनेक पारंपरिक नुस्खों को उपयोग में लाया जाता है, इस सप्ताह हम आपको सुझाएंगे कुछ चुनिंदा हर्बल नुस्खे जिनका इस्तमाल कर इस समस्या से छुटकारा पाने में काफी मदद मिल सकती है।

  • अन्नानस के फलों में एक ख़ास रसायन ब्रोमेलेन पाया जाता है जो इस फल के बीच मोटे और कड़क हिस्से में पाया जाता है, जिसे अक्सर लोग काटकर फेंक देते है। इसे अस्थमा की रोकथाम के लिए भी जबरदस्त माना जाता है। फलों के बीच के कठोर हिस्से को निकालकर कुचल लिया जाए या रोगी को सीधे चबाने की सलाह दी जाए तो आराम मिलता है।
  • अस्थमा की शिकायत होने पर अमलतास की पत्तियों को कुचलकर 10 मिली रस पिलाया जाए तो सांस की तकलीफ में काफी आराम मिल जाता है। आदिवासियों के अनुसार प्रतिदिन दिन में दो बार लगभग एक माह तक लगातार पिलाने से रोगी को राहत मिल जाती है।
  • लगभग 50 ग्राम अंगूर का रस गर्म करके स्वास या दमा के रोगी को पिलाया जाए तो सांस लेने की गति सामान्य हो जाती है।
  • अजवायन के बीजों को भूनकर एक सूती कपड़े मे लपेट लिया जाए और रात तकिये के नजदीक रखा जाए तो दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को रात को नींद में सांस लेने मे तकलीफ़ नही होती है।
  • ठंड में अस्थमा के रोगी को यदि अजवायन के बीज और लौंग की समान मात्रा का 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन दिया जाए तो उन्हें काफी फायदा होता है।
  • दमा के रोगी यदि अनंतमूल की जड़ों और अडूसा के पत्तियों की समान मात्रा (3-3 ग्राम) लेकर दूध में उबालकर लें तो फ़ायदा होता है, ऐसा कम से कम एक सप्ताह तक किया जाना जरूरी है।
  • डांग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार पान के पत्तों के साथ अशोक के बीजों का चूर्ण की एक चम्मच मात्रा चबाने से सांस फूलने की शिकायत और दमा में आराम मिलता है।
  • गेंदा के फ़ूलो को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन कुछ समय तक दिन में दो बार किया जाए तो डांग-गुजरात के आदिवासी के अनुसार, दमा और खाँसी के मरीज को काफी फायदा होता है।
  • दमा के रोगियों को गोखरू के फल और अंजीर के फ़ल समान मात्रा में लेकर कूटना चाहिए और दिन में तीन बार लगभग 5 ग्राम मात्रा का सेवन करना चाहिए, दमा ठीक हो जाता है।
  • पालक के एक गिलास जूस में स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से दमा और श्वास रोगों में खूब लाभ मिलता है।
  • बड़ी इलायची खाने से खांसी, दमा, हिचकी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है। बडी इलायची, खजूर व अंगूर की समान मात्रा लेकर, कुचलकर शहद में चाटने से खांसी, दमा और कमजोरी दूर होती है।
  • लहसून की 2 कच्ची कलियां सुबह खाली पेट चबाने के बाद आधे घण्टे से मुलेठी नामक जड़ी-बूटी का आधा चम्मच सेवन दो महीने तक लगातार करने से दमा जैसी घातक बीमारी से सदैव की छुट्टी मिल जाती है।
  • फेफड़ों पर इसके प्रभाव के चलते क्रोनिक ब्रोन्काइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए प्राचीन काल से बच नामक जड़ी का प्रयोग किया जाता है। बच के टुकडों को चूसते रहने और प्रतिदिन बच की चाय पीने से असर काफी तेज होता है।
  • अस्थमा की वजह से सांसे लेने में भारीपन को दूर करने के लिए अडूसा की पत्तियों के रस को शहद में मिलाकर रोगी को दिया जाता है जिससे अतिशीघ्र आराम मिलता है।
  • पातालकोट के आदिवासी टी.बी. के मरीजों को अडूसा की पत्तियों का काढ़ा बनाकर 100 मि.ली. रोज पीने की सलाह देते हैं, दरअसल अडूसा शरीर में जाकर फेफड़ों में जमी कफ और गंदगी को बाहर निकालता है। इसी गुण के कारण इसे ब्रोंकाइटिस के इलाज का रामबाण भी माना जाता है। बाजार में बिकनेवाली अधिकतर कफ की आयुर्वेदिक दवाइयों में अडूसा का भरपूर इस्तमाल भी किया जाता है।
  • अडूसा के फलों को छाया में सुखाकर महीन पीसकर 10 ग्राम चूर्ण में थोड़ा गुड़ मिलाकर 4 खुराक बना लिया जाए और अस्थमा का दौरा शुरू होते ही 4 घंटों के अंतराल से सारी खुराक दे दी जाएं।
  • अस्थमा का दौरा पड़ने पर गर्म पानी में तुलसी के 5 से 10 पत्ते मिलाएं और सेवन करें, यह सांस लेना आसान करता है। इसी प्रकार तुलसी का रस, अदरक रस और शहद का समान मिश्रण प्रतिदिन एक चम्मच लेना अस्थमा पीड़ित लोगों के लिए अच्छा होता है।
  • अस्थमा और ब्रोंकाइटिस को नियंत्रित करने में तुलसी और करेले का रस भी काफी मदद करता है। तुलसी की करीब 15 पत्तियों लेकर एक सामान्य आकार के करेले के साथ कुचल लें और इसे अस्थमा से ग्रसित व्यक्ति को प्रतिदिन रात को सोने से पहले सेवन कराया जाए, शीघ्र ही फायदा होता है।
  • पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार मेथी की पत्तियों का ताजा रस, अदरक और शहद को धीमी आँच पर कुछ देर गर्म करके रोगी को पिलाने से अस्थमा रोग में काफी आराम मिलता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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