सेहत की रसोई: विटामिन और मिनरल से भरपूर कोदू की भेल

सेहत की रसोई: विटामिन और मिनरल से भरपूर कोदू की भेलकोदू एक पारंपरिक मोटा अनाज है जिसे आज भी ग्रामीण इलाकों में बड़े चाव से खाया जाता है।

कहते हैं आपकी उत्तम सेहत का असल राज़ आपकी रसोई में छिपा हुआ होता है, आपके किचन में रखे मसाले, सब्जियां, अनाज और फल इत्यादि सेहत के असल खज़ाने होते हैं। स्वस्थ मन और विचार से पकाया भोजन हमें भोज्य पदार्थों का रस स्वाद तो देता ही है साथ ही हमारी सेहत को दुरुस्त बनाए रखने में हमारी खूब मदद भी करता है।

सेहतमंद रहना हो तो हमारी रसोई में पकाया गया भोजन भी सही तरीकों से पका होना चाहिए और इन भोजन में सम्मिलित अनाज, सब्जियों और मसालों आदि की संतुलित मात्रा का होना जरूरी है। सेहत की रसोई के जरिये हमारा भी यही प्रयास है कि हमारे पाठकों तक उन व्यंजनों को लाया जाए जो आपकी सेहत का भरपूर खयाल रखेंगे। मास्टर शेफ़ भैरव सिंह राजपूत हर सप्ताह हमारे पाठकों के लिए कुछ स्वादिष्ट व्यंजनों की रेसिपी लेकर आते हैं और इन रेसिपी की खासियत और औषधीय गुणों की वकालत करते हैं हमारे “हर्बल आचार्य” यानी डॉ. दीपक आचार्य। इस सप्ताह भैरव हमारे लिए ला रहे एक खास रेसिपी “कोदू की भेल”

आवश्यक सामग्री: (दो लोगों के लिए)

  • कोदू के बीज या दाने- 100 ग्राम
  • देशी घी- 10 ग्राम
  • प्याज- 1 मध्यम आकार का
  • नींबू- 1=हरी मिर्च- 2
  • टमाटर- 1 मध्यम आकार का
  • ताजी हरी धनिया- 2 डंठल
  • काला नमक- स्वादानुसार
  • पानी- आवश्यकतानुसार

विधि

कोदू एक मोटा अनाज है, इसे अच्छी तरह से साफ करलें और पानी में डुबोकर रात भर के लिए रख दें। अगली सुबह पानी निथार लिया जाए और फिर इसे आवश्यतानुसार पानी में डालकर पकाया जाए ताकि दाने नर्म पड़ जाएं। पकाने की प्रक्रिया के दौरान इस बात का जरूर ध्यान रखें कि कोदू के दाने ज्यादा ना पक जाएं। जब यह सामान्य रूप से पक जाए तो किसी छिद्रमय बर्तन में इसे डालकर अतिरिक्त पानी को निकाल लिया जाए। एक मिक्सिंग बाउल लें, इसमें पके हुये कोदू के दानों को डाल दें और इस पर घी और नमक डालकर अच्छी तरह से मिला लें। प्याज, टमाटर, हरी धनिया और हरी मिर्च को बारीक काट लें, और उन्हें भी इसी मिक्सिंग बाउल में डाल दें और भलीभांति मिला दें। नींबू काटकर इस पर ऊपर से रस भी डाल दें और जरूरत हो तो इस पर बारीक नमकीन सेव भी डाला जा सकता है और इस तरह तैयार हो जाएगी कोदू की स्वादिष्ट पारंपरिक भेल। अब इसे पारंपरिक क्यों कहा है और इसके क्या गुण हैं इस बात की वकालत तो हमारे हर्बल आचार्य ही करेंगे।

क्या कहते हैं हर्बल आचार्य

कोदू एक पारंपरिक मोटा अनाज है जिसे आज भी ग्रामीण इलाकों में बड़े चाव से खाया जाता है। ना सिर्फ कोदू के बीज बल्कि इसकी ताजी हरी कोमल पत्तियों की चटनी भी बड़े चाव से ग्रामीणजन खाते हैं। इस मोटे अनाज के अंदर अनेक महत्वपूर्ण रसायन और विटामिन्स के अलावा मिनरल्स भी प्रचूरता से पाए जाते हैं। बीमार पड़ने के बाद रोगी को कोदू के बीजों से तैयार पकवान जरूर खिलाया जाना चाहिए क्योंकि शरीर से अशक्ति को दूर करने के लिए इसे काफी कारगर माना जाता है। पातालकोट के आदिवासी पेजा नामक एक व्यंजन भी तैयार करते हैं जो कि वास्तव में एक किण्वित (फर्मेंटेड) व्यंजन होता है जिसमें कोदू के अलावा कुछ अन्य स्थानीय अनाजों का इस्तमाल होता है। पेजा वास्तव में प्रो-बायॉटिक होता है जो पेट की सेहत के लिए खास तौर से इस्तमाल में लाया जाता है। मास्टर शेफ़ भैरव ने कोदू के भेल की जानकारी दी जो मेरे हिसाब बेहद पौष्टिक है और इसे अवश्यरूप से खाना चाहिए, आखिर आपके सेहत की देखभाल की बात जो है।

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