मातृ-शिशु मृत्यु मामलों की संख्या आधी करने के लिए संयुक्त राष्ट्र तंत्र से जुड़ा भारत
गाँव कनेक्शन | Feb 15, 2017, 11:11 IST
मातृ-शिशु मृत्यु मामलों की संख्या आधी करने के लिए संयुक्त राष्ट्र तंत्र से जुड़ा भारत
संयुक्त राष्ट्र (भाषा)। भारत उन नौ देशों में शामिल है, जो वर्ष 2030 तक नई माताओं और नवजात बच्चों की देखभाल की गुणवत्ता सुधारने और गर्भवती महिलाओं एवं नवजातों की निरोध्य मौतों को रोकने के लिए किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करने पर आधारित वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र का हिस्सा बनने वाले हैं।
ये नौ देश हैं- भारत, बांग्लादेश, इथोपिया, घाना, आइवरी कोस्ट, मालावी, नाइजीरिया, तंजानिया और युगांडा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थन प्राप्त नए ‘नेटवर्क फॉर इंप्रूविंग क्वालिटी ऑफ केयर फॉर मैटरनल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हैल्थ' के माध्यम से यूनिसेफ और अन्य साझेदार माताओं और शिशुओं को उनके स्वास्थ्य केंद्रों में मिलने वाली देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए काम करेंगे।
इस नेटवर्क का उद्देश्य वर्ष 2030 तक निरोध्य मौतों को खत्म करने के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करना हैं। यह उद्देश्य ‘एव्री वूमन एव्री चाइल्ड ग्लोबल स्ट्रेटेजी फॉर वूमन्स चिल्ड्रेन्स एंड अडोलोसेंट्स हैल्थ' के अनुरुप है।
ये विभिन्न देश इसे करने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता और मनोबल को मजबूती देंगे ताकि गुणवत्ता सुधार, आंकडा संग्रहण, दवाओं, आपूर्ति, उपकरण और स्वच्छ जल तक पहुंच बढाने की दिशा में नियोजन और प्रबंधन किया जा सके।
ये नौ देश हैं- भारत, बांग्लादेश, इथोपिया, घाना, आइवरी कोस्ट, मालावी, नाइजीरिया, तंजानिया और युगांडा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा समर्थन प्राप्त नए ‘नेटवर्क फॉर इंप्रूविंग क्वालिटी ऑफ केयर फॉर मैटरनल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हैल्थ' के माध्यम से यूनिसेफ और अन्य साझेदार माताओं और शिशुओं को उनके स्वास्थ्य केंद्रों में मिलने वाली देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए काम करेंगे।
इस नेटवर्क का उद्देश्य वर्ष 2030 तक निरोध्य मौतों को खत्म करने के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करना हैं। यह उद्देश्य ‘एव्री वूमन एव्री चाइल्ड ग्लोबल स्ट्रेटेजी फॉर वूमन्स चिल्ड्रेन्स एंड अडोलोसेंट्स हैल्थ' के अनुरुप है।
ये विभिन्न देश इसे करने के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता और मनोबल को मजबूती देंगे ताकि गुणवत्ता सुधार, आंकडा संग्रहण, दवाओं, आपूर्ति, उपकरण और स्वच्छ जल तक पहुंच बढाने की दिशा में नियोजन और प्रबंधन किया जा सके।