औषधीय गुणों से भरपूर होता है गेहूं, जानिए क्या हैं इसकी खासियतें?

रोटी, समोसा, कुलचा, पूरी, कचौरी, ब्रेड, दलिया, जलेबी, हर दिन हम किसी न किसी तरह खाने में गेहूं का उपयोग करते हैं, लेकिन इन सबके अलावा भी गेहूं के कई औषधीय गुण भी होते हैं, लेकिन जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा के वैज्ञानिक गेहूं के कुछ ऐसे ही औषधीय गुणों के बारे में बता रहे हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर होता है गेहूं, जानिए क्या हैं इसकी खासियतें?

गेहूं विभिन्न प्रकार की जलवायु, मृदा और उत्पादन दिशाओं में उगाई जाने वाली अनेकों गुणों से परिपूर्ण एक विश्वव्यापी महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। इसके उत्पादों का उपयोग वैश्विक स्तर पर मनुष्यों के लिए पारम्परिक, प्राकृतिक, फाइबर से भरपूर और ऊर्जादायक भोजन की बढ़ती मांग की आपूर्ति के लिए किया जाता है।

यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण प्रतिदिन लाखों लोगों को एक स्वस्थ और संतुलित आहार प्रदान करता है। गेहूं के दानों की पिसाई के बाद मिलने वाले आटे से चपाती/रोटी/फुलका, तंदूरी रोटी, रुमाली रोटी, पूरी, कचौरी, कुलचा, भटूरा, समोसा, मठ्ठी, नमक पारा, पापड़, पायसम, पाव, ब्रेड, दलिया, सूजी, सत्तू, पिन्नी, जलेबी, बालूसाई, घेवर, क्रेकर्स, बिस्किट, म्यूसली, पेनकेक्स, पास्ता, नूडल्स, पाई, पेस्ट्री, पिज्जा, पोलेंटा, केक, बन्स, कुकीज, मफ्फिन, रोल, डोनट्स, ग्रेवी, बीयर, वोदका और बोजा (एक किण्वित पेय) इत्यादि तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही एक सीमित मात्रा में गेहूं के दाने और भूसे को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गेहूं के दाने से प्राप्त जर्म तेल और गेहूं घास जूस का उपयोग औषधीय रूप में किया जाता है।

गेहूँ के बीज के तीन अलग-अलग भाग होते हैं जिन्हे चोकर, एंडोस्पर्म और जर्म के नाम से जाना जाता है। आटे के उत्पादन के लिए गेहूं पिसाई प्रक्रिया के दौरान इन तीनों भागों को अलग-अलग किया जाता है। गेहूँ के दाने का 83 प्रतिशत मध्य भाग एंडोस्पर्म से बना होता है जिसमें अधिकतर कार्बोहाइड्रेट और विटामिन के साथ-साथ थोड़ी मात्रा में विटामिनबी, आयरन और घुलनशील फाइबर होते हैं। दाने की बाहरी परत चोकर की बनी होती है जो कि दाने के निर्माण में 14 प्रतिशत का योगदान देती है।


दाने के इस दूसरे भाग में अघुलनशील फाइबर, विटामिनबी, ट्रेस खनिज और प्रोटीन की एक छोटी मात्रा शामिल होती है।बीज का सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक तीसरा भाग जर्म है, जो दाने के कुल वजन का लगभग 2.5-3.8 प्रतिशत होता है। दाने के इस भाग में लगभग 10-15 प्रतिशत लिपिड्स, 26-35 प्रतिशत प्रोटीन, 17.0प्रतिशत शर्करा, 1.5-4.5 प्रतिशतरेशा तथा 4.0 प्रतिशत खनिज लवण होने के साथ-साथ अनेक जैव सक्रिय पदार्थ जैसे टोकोफेरॉल (300-740 मिलीग्राम/किलोग्राम शुष्क पदार्थ), फाइटोस्टेरोल्स (24-50 मिलीग्राम/किलोग्राम), पोलीकोसानोल्स (10मिलीग्राम/किलोग्राम), कैरोटीनॉयड (4-38 मिलीग्राम/किलोग्राम), थायमिन (15-23 मिलीग्राम/किलोग्राम) और राइबोफ्लेविन (6-10 मिलीग्राम/किलोग्राम)की महत्वपूर्ण मात्रा भी होती है।

अधिकतम पोषण प्रोफाइल युक्त व्हीट जर्म ऑयल की प्राप्तिकोल्ड प्रेसिंग तकनीक अथवा ग्रिलिंग प्रक्रियाया विलायक निष्कर्षण द्वारा की जा सकती है। पोषक तत्वों से भरपूर व्हीटजर्म ऑयल प्रकृति का एक अद्भुत उपहार है।इन सब पोषक तत्वों की मदद से यह समग्र स्वास्थ्य को प्रबल बनाता है।

व्हीट जर्म ऑयल

गेहूं को प्रोटीन, खनिज, बी-समूह के विटामिन और आहार फाइबर का एक उत्तम स्रोत माना जाता है,जो एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य-निर्माण का कारक है। इसका उपयोग, अन्य अनाजों की तुलना में, रोटी बनाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।इसके साथ-साथ गेहूँ में कई औषधीय गुण होते हैं। गेहूं में विद्यमान स्टार्च व प्रोटीनमनुष्यों को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करते हैं। आंतरिक चोकर कोट, फॉस्फेट और अन्य खनिज लवण बाहरी चोकर, बड़ी आंत की सफाई करने में मददगार है, जो मल के आसान निष्कासन में रेचक का कार्य करता है। गेहूँ का प्रोटीन मांसपेशियों के ऊतकों के निर्माण और मरम्मत में मदद करता है। गेहूं का जर्म जिसे शोधन प्रक्रिया में हटा दिया जाता है जो विटामिन ई से भरपूर होता है, जिसकी कमी से हृदय रोग हो सकता है। गेहूँ केजर्म से गेहूँ जर्म तेल (व्हीट जर्म ऑयल) तैयार किया जाता है।

व्हीट जर्म ऑयल की मांग और उपयोग

गेहूं के जर्म में लगभग 8-14 प्रतिशत तेल होता है जिसका उपयोग मुख्य रूप से आहार, चिकित्सा और कॉस्मेटिक उद्योगों में तेल के स्रोत के रूप में किया जाता है और इसका उपयोग सिंथेटिक एंटीऑक्सीडेन्ट केरुप में भी किया जाता है। व्हीट जर्म ऑयल व्यापक रूप से विभिन्न कॉस्मेटिक्स जैसे लोशन, एंटी-एजिंग समाधान, बॉडी बटर, क्रीम, मॉइस्चराइजर और फेस पैक आदि बनाने में प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग सुगंधित इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, सुगंधित मालिश तेलों और सुगंधित मोमबत्तियों के निर्माण के लिए भी किया जाता है। अपने इन सुगंधित गुणों के कारण, बाजार में इस तेल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है तथा सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली बहुत सारी कम्पनियों के लिए यह एक प्रमुख कच्चा माल है। इसकी महत्ता का इस बात सेअनुमान लगाया जा सकता है कि ट्रांसपेरेन्सी बाजार अनुसंधान की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में वैश्विक बाजार में इसका व्यापार लगभग 530 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था।


व्हीट जर्म ऑयल की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी अलग-अलग है क्योंकि वैश्विक बाजार में विभिन्न आपूर्तिकर्ता हैं। जिनमें हेनरी लैमोटे ऑयल्स, हर्बल बॉयोसोल्यूशन, वियोबिन यूएसए, नाव फूड्स, एग्रोसलप्रोम, कंट्री लाइफ, इनलाइफ फार्मा प्राइवेट लिमिटेड, अरिस्टा, हैबे जियाफेंग प्लांट ऑयल्स, जीएनएलडी इंटरनेशनल, नवचेतना केंद्र, ग्रुपो प्लिमोन, जनरल न्यूट्रिशन सेंटर्स, स्वानसन हेल्थ प्रोडक्ट्स, कॉनॉइल, न्यूट्रीप्लेक्स फॉर्मूलाज, कुनहुआ बायोलॉजिकल टेक्नोलॉजी कंपनी, लिमिटेड, हेनान कुन हुआ टेक्नोलॉजी एवं जुंगहू आदि कंपनियाँ प्रमुख हैं।

ह्नीट जर्म ऑयल की खासियतें

  • पिछले एक दशक से त्वचा और बालों के लिए प्राकृतिक उत्पादों की मांग और इनके उपयोग में लगातार वृद्धि देखी गई है। उपलब्ध कार्बनिक कॉस्मेटिक उत्पादों की व्यापक श्रेणी में, महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने वाला नवीनतम उत्पाद व्हीट जर्म ऑयल है। हम सभी को विदित है कि गेहूं एक स्वस्थ घटक है जिसके कई तरह के फायदे हैं।
  • व्हीट जर्म ऑयल में विटामिन ई और बी की अधिक सांद्रता होने के कारण यह त्वचा व बालों के लिए एक बेहतरीन मॉइस्चराइजर के तौर पर काम करता है। इसके प्रयोग से त्वचा व बालों का रूखापन भी कम होता है।
  • व्हीटजर्म ऑयल में एंटी-इंफ्लामेटरी तत्व होते हैं, जो त्वचा में सूजन और जलन बढ़ाने वाले जीवाणुओं को नष्ट करते हैं, जिससे त्वचा पर दिखने वाली फुंसियां, रैशेज और पिम्पल्स की समस्या कम होती है। साथ ही यहझुर्रियों(रिंकल्स) और फ्री-रैडिकल्स डैमेज से भी बचाता है।
  • व्हीट जर्म ऑयल के प्रयोग से बालस्वस्थ एवं निरोग बनते हैं। यह बालों की नेचुरल कंडीशनिंग करता है, जिससे बाल मुलायम और मैनेजेबल बनते हैं। बालों के झड़ने कीसमस्या से परेशान लोगों को भी इससे निर्मित तेल से सिर की मालिश करने की सलाह दी जाती है,जिससे बालों का झड़ना कम हो जाता है।
  • व्हीट जर्म ऑयल का नियमित सेवन आपको एक स्वस्थ, लम्बा और रोग मुक्त जीवन देता है। यह कई बीमारियों को रोकता है।मानसिक तनाव को कम करके ऊर्जावान बनाता है। इसलिए एक स्वस्थ जीवन के लिए दैनिक आहार में तीन कप गेहूँ शामिल करें।
  • व्हीट जर्म ऑयल मैग्नीशियम से समृद्ध है। इसकेनियमित उपयोग से रक्त शर्करा के स्तर के नियंत्रण में मदद मिलती है।यह मधुमेह के रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है।
  • व्हीट जर्म ऑयल का नियमित रूप से सेवन शरीर में वसा जमाव को कम करने में मदद करता है,इसलिए यह किसी भी वजन घटाने वालेकार्यक्रम का हिस्सा हो सकता है।
  • व्हीट जर्म ऑयल में एक लम्बी श्रृंखला, संतृप्त, प्राथमिक अल्कोहल जिसे ऑक्टाकोसानॉल कहा जाता हैं, इसकी उच्च मात्राहोती है जो मांसपेशियों की ऊर्जा में सुधार करती है। इस प्रकार, व्हीट जर्म ऑयल का उपयोग खिलाड़ियों के लिए अत्यधिक अनुशंसित है। यह खिलाड़ियों को व्यायाम के दौरान ऊर्जा और ऑक्सीजन देता है और उन्हें ऊर्जावान बनाता है।
  • विटिलिगो, सोरायसिस, एक्जिमा, सनबर्न तथा अन्य त्वचा की जलन में व्हीट जर्म तेल का उपयोग औषधीय लाभ प्रदान करता है।

गेहूं ग्रास या गेहूं घास

गेहूं ग्रास का जूस पोषण सम्बन्धी विकारों को पूरा करके मानव कोशिका, रक्त, ऊतकों और अंगों को बंद करने वाले अवशेषों को हटाकर अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। गेहूँ ग्रास एक आम गेहूँ (ट्रिटिकम एस्टीवम) को संदर्भित करता है, जो मानव उपभोग के लिए ताजा जूस या पाउडर के रुप में आसानी से परिवर्तित हो जाता है। गेहूँ ग्रास के ताजा जूस में क्लोरोफिल, सक्रिय एंजाइम, विटामिन एवं अन्य पोषक तत्वों की उच्च सांद्रता होती है, इसलिए गेहूँ ग्रास को मानव शरीर के लिए पोषक तत्वों एवं विटामिन का पावर हाउस माना जाता है। जिसमें शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति होने के कारण इस रस को "ग्रीन ब्लड" कहा जाता है।


गेहूँ ग्रास के जूस को सामान्यतः 60-120 मिलीलीटर प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर खाली पेट सेवन करना चाहिए, इसके बाद आधा घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। किसी बीमारी से पीड़ित होने पर 30-60 मिलीलीटर जूस का सेवन दिन में तीन-चार बार किया जा सकता है। कुछ लोगों को शुरू में जूस पीने से जी मिचलाता है। ऐसी स्थिति में कम मात्रा से शुरूआत करें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। गेहूँ ग्रास के जूस में सब्जियों एवं फलों के जूस जैसे सेब, अन्नानास आदि के जूस को मिलाया जा सकता है। गेहूँ घास का जूस कभी भी खट्टे फलों के रस जैसे नीबू, संतरा आदि को नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि खट्टापन गेहूँ ग्रास के जूस में विद्यमान एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देता है। इसमें नमक चीनी व कोई अन्य मसाला भी न मिलाएं। गेहूँ ग्रास जूस की 100-120 मिलीलीटर मात्रा का सेवन बहुत उपयुक्त माना जाता है।

गेहूं ग्रास जूस पीने के कुछ औषधीय लाभ

  • इसका सेवन शरीर कीलाल रक्त कोशिका की संख्या में वृद्धि होती है। साथ ही गेहूँ ग्रास के जूस में मौजूद क्लोरोफिल रक्त में अधिक ऑक्सीजन देने में मदद करता है जिसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।
  • इस जूस में एंजाइम, अमीनो एसिड एवं विटामिन बी प्रचुर मात्रा में होने के कारण पाचन विकारों से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ पंहुचाता है। इसमें मौजूद विटामिन्स चिंता को दूर करने एवं मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर बनाने के लिए प्रभावी हैं।
  • जोड़ों के रोगों जैसे सन्धि-स्थल पर सूजन, सन्धि-स्थल की पीड़ा, सन्धि-स्थल का घिसाव एवं हड्डियों की कमजोरी में गेहूँ ग्रास के जूस का सेवन लम्बे समय तक करने पर आराम अवश्य मिलता है।
  • यह फाइबर का एक उत्तम स्रोत है जो कब्ज के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। गेहूँ ग्रास के जूस शरीर में उपापचयी (मेटाबॉलिक) क्रियाओं को उत्तेजित कर मल त्याग प्रक्रिया को आसान बना देता है। यह मल-त्याग प्रक्रिया को विनियमित कर कब्ज पर रोक लगाने के साथ-साथ रेक्टल ब्लीडिंग से भी बचाव होता है।
  • गेहूँ ग्रास जूस का उपयोग हीमोग्लोबिन का उत्पादन बढ़ाने, रक्त शर्करा विकारों में सुधार लाने, दांत क्षय को रोकने, तेजी से घाव भरने एवं बैक्टीरिया संक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है। कुछ लोग भूरे बालों को रोकने, उच्च रक्तचाप को कम करने, पाचन क्रिया में सुधार लाने एवं कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को अवरुद्ध करने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  • गेहूँ ग्रास जूस में विटामिन बी-17 या लेट्रियल एवं सेलेनियम तत्व एंटीऑक्सीडेन्ट एवं रक्त शोधक होते हैं। ये दोनों ही शक्तिशाली कैंसररोधी तत्व हैं। क्लोरोफिल एवं सेलेनियम शरीर की रक्षा प्रणाली को शक्तिशाली बनाने में मदद करते हैं।
  • गेहूँ ग्रास जूस को एक सजीव, सुपाच्य, पौष्टिक एवं सम्पूर्ण आहार माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में क्लोरोफिल, किण्वक (एंजाइम्स), अमीनो एसिड्स, शर्करा, वसा, विटामिन और खनिज होते हैं। क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश का पहला उत्पाद है अतः इसमें सबसे ज्यादा सूर्य की ऊर्जा एवं भरपूर ऑक्सीजन भी होता है।
  • गेहूँ ग्रास का जूस विटामिन ए, बी, सी, ई और के, कैल्शियम, पोटाशियम, लोहा, मैग्नीशियम, सोडियम, सल्फर एवं 17 प्रकार के एमिनो एसिड का सबसे समृद्ध स्रोत होने के कारण मानव शरीर पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इस जूस को पीने से मूत्राशय व गुर्दा (किडनी) सम्बन्धी रोग दूर होते हैं। यह पथरी दूर करने में भी सहायक है तथा आँखों की रोशनी भी बढ़ाता है।
  • व्यायाम एवं शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों को मैग्नीशियम सम्पूरकों की आवश्यकता होती है। गेहूँ ग्रास जूस में मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होने के कारण पैरों की मांसपेशियाँ कमजोर होना (जिससे रेस्टलेस लेग सिंड्रोम होता है), पाँवों में बिवाइयां फटना, पेट की गड़बड़ी, एकाग्रता में कमी, रजोनिवृत्ति सम्बन्धी समस्याओं का बढ़ना, मासिक-धर्म पूर्व के तनाव में वृद्धि आदि की समस्याओं से निजात मिलती है।

व्हीट जर्म ऑयल के प्रयोग में सावधानियाँ

प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्हीट जर्म ऑयल के उपयोग की मात्रा अलग-अलग होती है। इसे कितनी मात्रा में लेना चाहिए यह हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सा कारकों पर निर्भर करता है।

शरीर में ओमेगा-3 से ओमेगा-6 फैटी एसिड का पसंदीदा अनुपात 1ः1 है, जबकि व्हीट जर्म ऑयल में यह अनुपात लगभग 1ः8 है। संतुलित ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड के नियमित उपयोग से कोलेस्ट्रोल का स्तर संयमित रहता है। अतःव्हीट जर्म ऑयल का सीमित आंतरिक उपयोग कई शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है। अगर आप पहले से ही उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर से जूझ रहे हैं तो आपको इस तेल का उपयोग संयम से करना चाहिए।

व्हीट जर्म ऑयल का उपयोग अनुशंसित मात्रा में रक्त चाप को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन पहले से ही रक्तचाप कम करने वाली दवा लेने वाले लोगों के लिए यह रक्त चाप में खतरनाक गिरावट का कारण बन सकता है। इस तेल को अपने नियमित आहार में शामिल करने से पहले एक बार चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

गेहूँ ग्रास/घासके जूस के सेवन में सावधानियाँ

गेहूँ ग्रास के रस को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। फिर भी कुछ लोगों के लिए कोई भी दुष्प्रभाव पैदा करने का थोड़ा जोखिम होता है। कुछ लोगों ने गेहूँ ग्रास के सेवन से प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं का अनुभव किया है जिसमें एलर्जी की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि गेहूँ ग्रास का रस बहुत शक्तिशाली पेय है, इसलिए इस पेय का अधिक मात्रा में सेवन करने से जी मिचलाना, दस्त लगना, चक्कर आना, सिरदर्द और थकान महसूस हो सकती है।

{(मंगल सिंह, अनुज कुमार, सत्यवीर सिंह एवं ओम प्रकाश गुप्ता) भाकृअनुप.भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा}

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