विश्व खुदकुशी रोकथाम दिवस : आत्महत्या के विचार आने पर दोस्तों से दिल की बात साझा करें

विश्व खुदकुशी रोकथाम दिवस : आत्महत्या के विचार आने पर दोस्तों से दिल की बात साझा करेंफोटो साभार: गूगल इमेज

नई दिल्ली (भाषा)। विश्व खुदकुशी रोकथाम दिवस रविवार को है। पर उसे अपनी कहानी याद आ गई। वह महज 21 साल का था और इंजीनियरिंग के विषय पढ़ना उसके लिए मुश्किल था। इसके बाद नौकरी तलाशना और मुश्किल हो गया था। इस बीच उसकी प्रेमिका उसे छोडकर चली गई। उस वक्त अंकुर बिंदल को एक ही समाधान दिख रहा था कि वह अपनी जिंदगी खत्म कर ले।

अब कामयाब आईटी पेशेवर बन चुके अंकुर ने विश्व खुदकुशी रोकथाम दिवस पर कहा कि उसने इसके खिलाफ फैसला किया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि पढ़ाई पूरी करने की उनकी मेहनत बेकार हो जाए और उन्होंने जीने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ' 'मैं यह सब किसी से साझा करना चाहता था लेकिन आस-पास कोई नहीं था। जिस व्यक्ति से मैं प्यार करता था वो मुझे छोड़ गया। उसने कभी पलट कर नहीं देखा। सारे दोस्त डिग्री पूरी करने या नौकरी करने में व्यस्त थे। ' ' अंकुर ने 2009 की मंदी के दौरान नौकरी के लिए संघर्ष किया था।

उन्होंने कहा कि उनकी एक सोच थी कि अगर अभी जीवन खत्म करते हैं तो बीटेक की पढ़ाई पूरी करने में उन्होंने जो मेहनत की है वो बेकार चल जाएगी। खुदकुशी की रोकथाम के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन एएएसआरए के निदेशक जॉनसन थोमस ने कहा कि आत्महत्या के विचार आने पर किसी करीबी के साथ बात को साझा करें।

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थोमस ने कहा कि अगर आपको खुदकुशी के विचार आ रहे हैं तो आपको किसी करीबी से बात साझा करनी चाहिए जिस पर आप आंख मूंद कर यकीन कर सकें या फिर हेल्पलाइन या पेशेवर परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार और दोस्तों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आसपास हैं और वे उनसे प्यार करते हैं तथा समझते हैं।

थोमस ने कहा कि परिवार और दोस्तों की सहानुभूति और फिक्र एक प्रियजन की खुदकुशी रोक सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हर साल 800,000 लोग खुदकुशी करते हैं, इसके मुताबिक हर 40 सेकेंड एक व्यक्ति अपनी जान देता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां खुदकुशी की दर सबसे ज्यादा है।

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