Nipah Virus outbreak: जानिए संक्रमण के रास्ते और बचाव के ज़रूरी उपाय
Gaon Connection | Jan 20, 2026, 15:08 IST
निपाह वायरस एक जानलेवा संक्रमण है जो चमगादड़ों, दूषित भोजन और इंसान-से-इंसान संपर्क से फैल सकता है। जानिए इसके मुख्य संक्रमण रास्ते, खतरे के संकेत और खुद को सुरक्षित रखने के आसान लेकिन ज़रूरी उपाय।
पश्चिम बंगाल में दो नर्सों में निपाह वायरस के संक्रमण (Nipah Virus outbreak) से कई राज्यों में अर्लट जारी कर दिया गया है, ऐसे में जानना ज़रूरी है कि निपाह वायरस क्या है और फैलता क्या है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निपाह वायरस के संक्रमण से बचने के लिए ज़रूरी सलाह जारी की है। निपाह वायरस (Nipah Virus) एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। यह वायरस गंभीर बुखार, सांस की दिक्कत, दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) और कई मामलों में मृत्यु तक का कारण बन सकता है। भारत सहित दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए इसके फैलने के तरीकों को समझना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
जानवरों से इंसानों में संक्रमण
निपाह वायरस का प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (Fruit Bats) माने जाते हैं। ये चमगादड़ अपने लार, मूत्र या मल के जरिए वायरस को फैलाते हैं।
संक्रमित चमगादड़ या सूअरों के संपर्क में आने से संक्रमण हो सकता है।
चमगादड़ों द्वारा दूषित पानी, खासकर कुएं या खुले जलस्रोत, संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
चमगादड़ों के रहने वाली गुफाओं या आश्रयों में बिना सुरक्षा प्रवेश करना जोखिम भरा होता है।
दूषित भोजन और पेय पदार्थों के जरिए
निपाह वायरस भोजन और पेय के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है।
चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फल खाने से संक्रमण हो सकता है।
कच्चा खजूर का रस (डेट पाम सैप या ताड़ी) पीना एक बड़ा जोखिम माना जाता है, क्योंकि इसे अक्सर खुले बर्तनों में इकट्ठा किया जाता है, जहां चमगादड़ संपर्क में आ सकते हैं।
खुले में रखे जूस, फल या अन्य खाद्य पदार्थ भी वायरस से दूषित हो सकते हैं।
इंसान से इंसान में संक्रमण
निपाह वायरस संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने से वायरस फैल सकता है।
लार, सांस की बूंदों (Respiratory Droplets) और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
देखभाल करने वाले परिजन और स्वास्थ्यकर्मी इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
निपाह वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी और स्वच्छता है।
फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं।
कच्चा खजूर का रस या खुले में रखा पेय पदार्थ पीने से बचें।
नियमित रूप से हाथ साबुन और पानी से धोते रहें।
बीमार या संदिग्ध संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
मास्क का उपयोग करें, खासकर भीड़भाड़ या संक्रमण वाले क्षेत्रों में।
खुले कुएं या असुरक्षित जलस्रोतों का पानी पीने से बचें।
समय पर पहचान और रोकथाम है सबसे बड़ा हथियार
निपाह वायरस का कोई विशेष टीका या पुख्ता इलाज अभी सीमित है। ऐसे में शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बहुत जरूरी है। बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, साफ-सफाई, सुरक्षित खान-पान और समय पर रिपोर्टिंग ही इस खतरनाक वायरस से बचाव का सबसे मजबूत उपाय है। निपाह वायरस एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से इसके फैलाव को रोका जा सकता है। व्यक्तिगत सावधानी के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी निभाकर ही हम इस बीमारी से खुद को और समाज को सुरक्षित रख सकते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निपाह वायरस के संक्रमण से बचने के लिए ज़रूरी सलाह जारी की है। निपाह वायरस (Nipah Virus) एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। यह वायरस गंभीर बुखार, सांस की दिक्कत, दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) और कई मामलों में मृत्यु तक का कारण बन सकता है। भारत सहित दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए इसके फैलने के तरीकों को समझना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
ऐसे फैलता है निपाह वायरस
निपाह वायरस का प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (Fruit Bats) माने जाते हैं। ये चमगादड़ अपने लार, मूत्र या मल के जरिए वायरस को फैलाते हैं।
संक्रमित चमगादड़ या सूअरों के संपर्क में आने से संक्रमण हो सकता है।
चमगादड़ों द्वारा दूषित पानी, खासकर कुएं या खुले जलस्रोत, संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
चमगादड़ों के रहने वाली गुफाओं या आश्रयों में बिना सुरक्षा प्रवेश करना जोखिम भरा होता है।
Nipah Virus Explained: जानवर, भोजन और इंसान - तीन रास्तों से फैलता है निपाह।
दूषित भोजन और पेय पदार्थों के जरिए
निपाह वायरस भोजन और पेय के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है।
चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फल खाने से संक्रमण हो सकता है।
कच्चा खजूर का रस (डेट पाम सैप या ताड़ी) पीना एक बड़ा जोखिम माना जाता है, क्योंकि इसे अक्सर खुले बर्तनों में इकट्ठा किया जाता है, जहां चमगादड़ संपर्क में आ सकते हैं।
खुले में रखे जूस, फल या अन्य खाद्य पदार्थ भी वायरस से दूषित हो सकते हैं।
इंसान से इंसान में संक्रमण
निपाह वायरस संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने से वायरस फैल सकता है।
लार, सांस की बूंदों (Respiratory Droplets) और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
देखभाल करने वाले परिजन और स्वास्थ्यकर्मी इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
निपाह वायरस से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं।
कच्चा खजूर का रस या खुले में रखा पेय पदार्थ पीने से बचें।
नियमित रूप से हाथ साबुन और पानी से धोते रहें।
बीमार या संदिग्ध संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
मास्क का उपयोग करें, खासकर भीड़भाड़ या संक्रमण वाले क्षेत्रों में।
खुले कुएं या असुरक्षित जलस्रोतों का पानी पीने से बचें।
समय पर पहचान और रोकथाम है सबसे बड़ा हथियार
निपाह वायरस का कोई विशेष टीका या पुख्ता इलाज अभी सीमित है। ऐसे में शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बहुत जरूरी है। बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, साफ-सफाई, सुरक्षित खान-पान और समय पर रिपोर्टिंग ही इस खतरनाक वायरस से बचाव का सबसे मजबूत उपाय है। निपाह वायरस एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन सही जानकारी और सतर्कता से इसके फैलाव को रोका जा सकता है। व्यक्तिगत सावधानी के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी निभाकर ही हम इस बीमारी से खुद को और समाज को सुरक्षित रख सकते हैं।