यूरीनरी ट्रैक इंफेक्शन की शिकार हो रहीं ग्रामीण महिलाएं

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लखनऊ। प्रदेश के गाँवों में खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों की संख्या का 80 प्रतिशत महिलाओं की संख्या है। बावजूद इसके इनके स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया जा रहा। परिणाम स्वरूप इन महिलाओं में यूरीनरी ट्रैक इंफेक्शन जैसी एक गंभीर बीमारी सामने आ रही है।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद की एक रिपोर्ट के मुताबिक खेत और खलिहान में काम करते हुए यह महिलाएं स्वच्छता (हाईजीन) का ध्यान नहीं रखती हैं, जिससे उनको यह बीमारी हो रही है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के डॉ. रीता एस रघुवंशी और टाटा ट्रस्ट की गायनकोलिजस्ट डॉ. बृंदा द्वारा ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर एक शोध किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार गाँवों की महिलाओं के बीच हाईजीन नेपकीन की उपलब्धता नहीं है। जिसके कारण यूरीनरी ट्रैक इंफेक्शन और हर्मोन असंतुलन बीमारी का वह शिकार हो रही हैं।

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इसमें बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में जेंडर स्वास्थ्य आज भी बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया है। स्थिति यह है कि गाँवों में पैदा हो रही मादा शिशु भी स्वास्थ्य के मामलों में भेदभाव की शिकार हो रही हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग की डॉ. नीलिमा कंवर ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं के खानपान में पोषक तत्वों का अभाव है। खासकर आयरन की कमी उनमें बहुत देखी जा रही है। महिलाओं को बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी है कि उनके आयरन वाली सब्जियों के साथ-साथ गेहूं के आटे में फोलिक एसिड मिलाकर महिलाओं और किशोरियों को दिया जाए।

मोनोपॉज़ की अवस्था में दिल के दौरे का डर

ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य पर काम करने वाली वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान के गृह विज्ञान विभाग की डॉ. इंदू बंसल के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में जीवन के दि्तीय अवस्था में प्रवेश कर रही महिलाएं जो मोनोपॉज़ की अवस्था में पहुंचती हैं उनमें अस्टीयोपोरेसिस और दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे महिलाओं पर स्वास्थ्य पर सर्वे करने पर पता चला है कि उनके भोजन में विटामिन और मिनरल्स की कमी है। साथ ही ये अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं है।

रोगों से बचाव के लिए दिए सुझाव

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि ग्रामीण खासकर खेतों में काम करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य पर लेकर पिछले दिनों जब ब्रेन स्टार्मिंग सत्र का आयोजन किया गया। इसमें देश की जानेमाने कृषि विशेषज्ञ और ग्रामीण् महिलाओं के स्वास्थ्य पर काम करने वाली डाक्टरों ने बताया कि ग्रामीण अंचल की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, लंग्स कैंसर, अस्थमा, सर्वाइकल कैंसर, लो इम्यूनिटी, मल्टीपल प्रेगनेंसी का खतरा बढ़ रहा है। इसमें ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए कम्युनिटी मेडिसीन सेंटर बनाने का सुझाव तैयार किया गया। साथ ही सुझाया गया कि आंगनवाड़ी और आशा बहुओं के जरिए महिलाओं में आयरन और कैल्सियम की गोलियां, हाईजीन नैपकीन और मल्टी विटामिन का वितरण कराया जाए। स्वास्थ्य की देखरेख के लिए एक मानीटरिंक सिस्टम की व्यवस्था भी हो।

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