महिलाओं में दिखें ये लक्षण तो यह है सर्वाइकल कैंसर, ऐसे करें बचाव

भारत में जागरुकता और इलाज की कमी की वजह से यह बीमारी जानलेवा साबित हो रही है। महिलाओं को इस बीमारी के इलाज की जानकारी भी नहीं होती है

महिलाओं में दिखें ये लक्षण तो यह है सर्वाइकल कैंसर, ऐसे करें बचावमहिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। प्रतीकात्मक तस्वीर: साभार इंटरनेट

लखनऊ। दुनिया भर में सवाईकल कैंसर से हर साल लाखों महिलाओं की मौत असमय जो जाती है। 21 से 50 साल की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। डॉक्टरों ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एक वैक्सीन विकसित की है जिसे एचपीवी वैक्सीन कहते हैं। इसे 11 से 12 साल की उम्र में बच्चियों को लगाया जाता है।

भारत में जागरुकता और इलाज की कमी की वजह से यह बीमारी जानलेवा साबित हो रही है। महिलाओं को इस बीमारी के इलाज की जानकारी भी नहीं होती है। इसे बच्चादानी, गर्भाशय या फिर यूट्राइन सर्विक्स कैंसर भी कहा जाता है। सर्वाइकल कैंसर हृयूमन पैपीलोमा वायरस () के कारण होता है।

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सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। फोटो: इंटरनेट

बीबीडी, लखनऊ के रेडियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉक्टर नीता मिश्रा का कहना है, " एचपीवी का संक्रमण आम है। यह त्वचा के संपर्क और शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है। 25 से 70 साल की सभी महिलाओं को पैप स्मीयर जांच की जरूरत होती है। इससे काफी हद तक बीमारी की जानकारी मिल जाती है। धूम्रपान से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 25 साल के बाद महिलाओं ये सारी जांच करा लेनी चाहिए। "

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वैक्सीन महंगी होने के कारण ज्यादातर निजी डॉक्टर ही इस वैक्सीन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कुछ सरकारी अस्पतालों में भी यह टीके मौजूद हैं। इस वैक्सीन को तीन चरणों में लगाया जाात है। यह वैक्सीन एक से छह महीने में लगाई जाती है। ज्यादा लोगों में इस वैक्सीन के बारे में जागरुकता नहीं है। बहुत कम ही लोग इस वैक्सीन के बारे में जानते हैं, लेकिन प्राइवेट डॉक्टर अपने यहां आने वाले लोगों का इस टीके की पूरी जानकारी देते हैं।

एचपीवी का टीका लगाकर सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है। फोटो: इंटरनेट

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

ब्लीडिंग, पीरियड के बीच में स्पॉटिंग

यूरीन की समस्या

पेट के निचले हिस्से में दर्द

सफेद बदबूदार पानी का रिसाव

संबंध बनाने के बाद अधिक मात्र में रक्तस्राव

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दो प्रकार का होता है एचपीवी का टीका

एचपीवी टीका दो प्रकार का होता है। एक बायवेलेंट और दूसरा क्वाड्रिवेलेंट। बायवेलेंट टीका 10 से 15 वर्ष के आयु वर्ग एवं ट्रॉयवेलेंट टीका 9 से 26 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं के लिए उपयुक्त पाया गया है। टीकाकरण के लिए सबसे उचित आयु 12 से 16 वर्ष होती है। बायवेलेंट टीके की 3 खुराकें (0, 1 व 6 माह पर) व क्वाड्रिवेलेंट टीके की 3 खुराकें (0, 2 व 6 माह पर) मांसपेशी में इंजेक्शन द्वारा दी जाती है। पहली दो खुराकों के बीच कम से कम 4 सप्ताह व दूसरी व तीसरी खुराक के बीच 12 सप्ताह का अंतर रखना जरूरी है। जिन महिलाओं को पहले भी कैंसर हो चुका हो, उन्हें भी यह टीका दिया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को यह टीका नहीं दिया जाना चाहिए।

इनपुट: एजेंसी

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