स्वाइन फ्लू के कहर से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर, गठित की विशेष टीमें

स्वाइन फ्लू के कहर से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर, गठित की विशेष टीमेंस्वाइन फ्लू से लड़ने को तैयार है स्वास्थ्य विभाग।

लखनऊ। प्रदेश में स्वाइन फ्लू के प्रकोप से बचने के लिए सभी जनपदों में जिला स्तरीय त्वरित कार्रवाई दल का गठन किया गया है। इस टीम में एक जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, एक फिजिशियन, एक एपीडेमियोलॉजिस्ट व एक पैथोलाजिस्ट, लैब टेक्नीशियन को शामिल किया गया है।

जनवरी से अब तक प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सात स्वाइन फ्लू के केस आए हैं जिनकी जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा इस साल देश में अब तक 8,423 लोग स्वाइन फ्लू के संपर्क में आ चुके हैं।

इस परेशानी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही अपनी कमर कस ली है। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में 10 बेड वाले आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। राज्य सर्विंलांस इकाई तथा जिला सर्विंलांस इकाइयों द्वारा प्रदेश में स्वाइन फ्लू की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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यह जानकारी चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने एक बयान में दी। उन्होंने बताया कि एन्फ्लुएन्जा-ए-एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) एक वायरस जनित रोग है, जिसका प्रमुख लक्षण सामान्य जुकाम और बुखार होता है। यह वायरस शीत ऋतु प्रारम्भ होने के साथ सक्रिय होता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक जनवरी, 2017 से 29 जुलाई, 2017 तक कुल इससे संक्रमित रोगियों की संख्या 90 रही, इनमें से पांच की मौत हो गई थी।

प्रमुख सचिव ने बताया कि शीत ऋतु के आरम्भ के साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा एन्फ्लुएन्जा-ए-एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) से निपटने की तैयारी कर ली है। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए राज्य मुख्यालय पर 24 घंटे टोल फ्री नम्बर 18001805145 स्थापित एवं क्रियाशील है। इसी प्रकार जनपदों के नियंत्रण कक्ष भी 24 घंटे काम कर रहे हैं।

लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीएस वाजपेई बताते हैं, “ गर्मी में स्वाइन फ्लू का एच1एन1 वायरस नहीं पनप सकता है। फिलहाल सभी अस्पतालों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। बलरामपुर, लोहिया और सिविल अस्पताल में भी स्वाइन फ्लू जांच के नमूने लिए जाने की व्यवस्था है। पीजीआई और केजीएमयू में भी जांच के बंदोबस्त किए गए हैं।

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लक्षण

जुखाम के साथ नाक से पानी आना।

गले में खराश, आंखे लाल होना।

बुखार आना।

सांस लेने में तकलीफ।

कमजोरी और थकान महसूस होना।

इन बातों का रखें ख्याल

हमेशा रुमाल साथ लेकर चलें, छींक आए या खांसी, अपने रुमाल को अपने मुंह पर जरूर रखें।

कोई छींक रहा हो तो कम से कम चार मीटर की दूरी बनाएं।

स्वयं सर्दी खांसी या बुखार जैसा लगे तो घर से बाहर जाना बंद करें। परिवार में अबर ऐसा हो तो सदस्यों से एक नियत दूरी बनाकर रखें।

बाजार या भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मजबूरन ही सही, जाना पड़े तो विशेष तौर पर ध्यान रखें कि आप आंखों, नाक और मुंह में उंगलियों का स्पर्श ना करें।

घर पहुंचते ही हाथ को कम से कम 40 सेकेंड तक धो लें। चेहरे, नाक, और मुंह की भी सफाई जरूर करें।

यदि आपके इलाके में स्वाइन फ्लू फैला हुआ है तो स्टैण्डर्ड मास्क (एच-95) पहनकर ही घर से बाहर निकलें, स्टैण्डर्ड मास्क ही स्वाइन फ्लू से बचा सकता है।

स्वाइन फ्लू की आशंका पर जांच कराएं।

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