बच्चों को बचाने में यूपी फिसड्डी

बच्चों को बचाने में यूपी फिसड्डीउत्तर प्रदेश बच्चों की मृत्यु दर कम करने के मामले में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से पिछड़ गया है।

दीपांशु मिश्र/इंडियास्पेंड

लखनऊ। भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश शिशु और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर कम करने के मामले में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से पिछड़ गया है।

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) द्वारा जारी आंकड़ों में वर्ष 2015-16 में प्रति हजार बच्चों में यूपी में 64, छत्तीसगढ़ में 54, मध्य प्रदेश में 51, बिहार में 48 और असम में 48 बच्चों की मौत हुई। मृत्युदर के घटाने के मामले में यूपी सबसे आखिरी पायदान पर है। वहीं पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर के मामले में भी यूपी अन्य प्रदेशों की तुलना में पिछड़ गया है। यूपी में प्रति हजार में 78, मध्य प्रदेश में 65, छत्तीसगढ़ में 64, बिहार में 58 और असम में 56 बच्चों की मौत वर्ष 2015-16 में हुई।

रायबरेली जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हरचंदपुर ब्लाक की प्रोग्राम मैनेजर आरती सिंह ने बताया, ‘’बच्चों की मृत्यु का मुख्य कारण कुपोषण है। अगर माँ कुपोषण का शिकार होती है तो इससे बच्चे भी कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। बच्चे के जन्म के समय महिला का वजन 40 किलो होना चाहिए। देख-रेख और अस्पतालों में सही उपचार नहीं मिल पाता है। यही सब कारण है बच्चों की मृत्यु दर बढ़ रही है।‘’

हालांकि, उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में सुधार हुआ है और ये दस साल पहले के प्रति 1000 पर 73 मौतों से घटकर 2016 में 64 पर है। शिशु मृत्यु दर में अन्य राज्यों और देशों का प्रदर्शन सुधरा है। उत्तर प्रदेश का आईएमआर अब पश्चिमी अफ्रीका के हिंसाग्रस्त देश मॉरिटानिया (65) के बराबर है।साथ ही दूसरे गरीब और अराजक अफ्रीकी देश बुर्किना फासो (61) से खराब है और अफगानिस्तान (66) के मुकाबले थोड़ा बेहतर है।

इन नए आंकड़ों से भारत का आईएमआर (41) और पांच साल से कम आयु के बच्चों में मृत्यु दर (50) बढ़ सकती है, जिसमें पिछले 10 वर्षों में सुधार हुआ है। लखनऊ जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित मोहनलालगंज की आशा बहू रीता बताती हैं, ‘’बच्चों में मृत्यु का कारण कुपोषण है। जन्म के समय माँ कुपोषण का शिकार होती है तब ऐसा हो सकता है। जन्म के समय माँ का वजन कम होना भी इसका कारण हो सकता है।‘’

बच्चों की मृत्यु का कारण स्फेक्सिया है जो सांस की बीमारी होती है और मुख्य रूप से मृत्यु का कारण इन्फेक्शन है। बच्चों में इन्फेक्शन सबसे बड़ा कारण होता है। उत्तर प्रदेश में हर 1000 जन्म लेने वाले बच्चों में से 49 बच्चों की मृत्यु हो जाती है।
डॉ. जीएस बाजपेई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ,लखनऊ

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 (एनएफएचएस-4) द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि पांच साल से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर प्रति 1000 में 78 है, जो कि उस अफ्रीकी देश मोजम्बिक (79) के बराबर है, जिसका प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद भारत का आधा है। पिछले 10 साल की तुलना में देखें तो पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का ये आंकड़ा प्रति 1000 में 96 से 18 कम हुआ है।इंडियास्पेंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य जरूर है, लेकिन यह राज्य प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर 452 रुपये खर्च करता है, जो भारत के औसत से 70% कम है।

इसका कारण पहले परिपक्व हो जाना होता है, वजन कम होना, कम वजन के बच्चे, निमोनिया, इन्फेक्शन हैं।
डॉ. नीना गुप्ता,महानिदेशक,फैमिली वेलफेयर

फैमिली वेलफेयर महानिदेशक डॉ. नीना गुप्ता ने बताया, ''हम इसको कम करने के लिए डिलीवरी के साथ बेबी कार्नर बनाया है। बेबी कार्नर में सात दिन तक बच्चों को किसी से मिलाया नहीं जाता है। जो बच्चे गंभीर अवस्था में होते है उनके लिए एक यूनिट बनाई गयी है। इस यूनिट में गंभीर बच्चों को रखा जाता है। इस यूनिट में चार पलंग का वार्ड होता है।

इसमें तीन स्टाफ नर्स और एक डाक्टर बच्चे की देखभाल के लिए रखा जाता है। पांच साल तक के बच्चे रखने के लिए अस्पताल बनाया गया है जिसमें बच्चों का वजन बढ़ाया जाता है। माताओं को खाना दिया जाता है। उनके साथ जो होता है उन्हें 50 रुपये और 50 रुपये का खाना दिया जाता है। 14 दिन तक बच्चे रखे जाते है।''

मातृ मृत्यु दर में देश में उत्तर प्रदेश दूसरे पायदान पर

यूपी में दो में से एक बच्चे का पूरी तरह से टीकाकरण नहीं होता है और राज्य मातृ मृत्यु दर (जन्म देने वाली प्रति एक लाख माताओं में 258) के मामले में भारत में दूसरे स्थान पर है। एक दशक पहले जब पिछला एनएफएचएस सर्वेक्षण हुआ था, तब छत्तीसगढ़ में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 71 थी, जो 2015-16 में घटकर 54 पर आ गई है। मध्य प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर प्रति हजार 93 थी, जो कि वर्ष 2015-16 में घटकर 65 पर आ गई है।

कई राज्यों ने मृत्यु दर को किया नियंत्रित

भारत में सभी राज्यों का प्रदर्शन बुरा नहीं है। शिशु मृत्यु दर सुधार के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सर्वश्रेष्ठ पांच राज्य केरल, गोवा, तमिलनाडु, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश हैं, जिनका आईएमआर अमेरिका, ईरान, अल्जीरिया, फिलीपींस और इंडोनेशिया के बराबर है।

पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले पांच राज्य केरल, गोवा, मणिपुर, तमिलनाडु और महाराष्ट्र हैं, जहां पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर अमेरिका, इराक, इंडोनेशिया, अजरबैजान और ब्राजील के बराबर है।

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