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जब फ़िनलैंड से फ़ोन पर बोली बिटिया, " पापा मैंने दुनिया हिला दी और आप सो रहे हो"

धींग के एक निम्न मध्यम वर्ग परिवार की इस बेटी का फिनलैँड तक का सफर बहुत आसान नहीं रहा। वह एक साधारण किसान परिवार से आती है जहां खेल की दुनिया में करियर बनाने का सपना देखना उनकी हैसियत से बाहर की बात मानी जाती थी। लेकिन हिमा ने सपने देखना नहीं छोड़ा और आखिर में उसके सपने साकार हुए, उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई।

जब फ़िनलैंड से फ़ोन पर बोली बिटिया, " पापा मैंने दुनिया हिला दी और आप सो रहे हो"


धींग (असम), कवीलिन काकोती

" देउता मैंने दुनिया फाड़ दिया और आप लोग सो रहे हो,"फिनलैँड में गोल्ड मेडल जीतने के बाद खुशी से उछलती हिमा दास ने असम के उनींदे से गांव धींग में जब अपने पिता को फोन किया तो उसके पहले शब्द यही थे। 18 बरस की खिलंदड़ हिमा अपने अटपटे अंदाज में पिता से अक्सर ऐसे ही बोलती है। आखिर अपने देउता (पिता) के लिए तो वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटी, सबसे लाड़ली हिमा ही है न । हिमा दास ने गुरुवार को फिनलैंड के टेम्पेरे में चल रही आईएएफ वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप की महिलाओं की 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीत कर इतिहास रचा दिया। हिमा ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय एथलीट हैं। लेकिन इस कामयाबी से पहले भी हिमा को अपने इलाके में धींग एक्सप्रेस के ही नाम से जाना जाता था।

हिमा के पिता ने पूरे असम से अपील कि है कि बेटी की कामयाबी के लिए उसे आशीर्वाद दें
(फोटो: प्रफुल्ल बोरा)

हिमा असम के नागांव जिले के एक छोटे से गांव कंधुलीमारी धींग में पैदा हुई। रंजीत दास और जोनाली दास की बेटी हिमा की परवरिश 16 सदस्यों के संयुक्त परिवार में हुई। धींग के एक निम्न मध्यम वर्ग परिवार की इस बेटी का फिनलैँड तक का सफर बहुत आसान नहीं रहा। वह एक साधारण किसान परिवार से आती है जहां खेल की दुनिया में करियर बनाने का सपना देखना उनकी हैसियत से बाहर की बात मानी जाती थी। लेकिन हिमा ने सपने देखना नहीं छोड़ा और आखिर में उसके सपने साकार हुए, उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई।

हिमा हमेशा अपनी मां से कहा करती थी कि वह एक दिन खूब मशहूर होगी, खूब नाम कमाएगी। उसकी मां भी बदले में उससे कहतीं, "बेटी, अगर ऐसा करना है तो मन लगाकर पढ़ा कर।" हिमा की मां को भी नहीं पता था कि उसकी बेटी किसी दिन कुछ ऐसा करेगी कि न केवल उन्हें बल्कि पूरी दुनिया को उस पर गर्व होगा। और यह तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि पढ़ाई-लिखाई के अलावा किसी और क्षेत्र में वह नाम कमाएगी।

हिमा की मां को सपने में भी अंदाज़ा नहीं था कि हिमा खेल में इतना नाम करेगी
(फोटो: प्रफुल्ल बोरा)

गोल्ड मेडल जीतने के बाद हिमा की मां ने कहा," हम बहुत खुश हैं। हमें उस पर बहुत गर्व है। मैं भगवान से प्रार्थना करूंगी कि वे उसे जीवन में और कामयाब बनाएं ताकि वह भविष्य में भी हमें और असम को उस पर गर्व करने का अवसर दे।" हिमा की एक रिश्ते की बहन कहती हैं, "हिमा ने सिर्फ धींग का ही नहीं बल्कि असम और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।"

हिमा के गांव के बुजुर्ग उसे आशीर्वाद देते नहीं थक रहे। धींग के एक निवासी कहते हैं, "हिमा ने वह कर दिखाया है जो अब तक असम में किसी ने नहीं किया। हमें गर्व है कि हमारे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने यह किया है। हम सभी का आशीष है उसे कि वह भविष्य में भी ऐसा ही काम करे। सबसे अहम बात यह है कि एक बेटी ने देश को गर्व करने का मौका दिया है।"

जब से हिमा के गांव के लोगों को यह खुशखबरी मिली है वे सभी उसके घर पर पहुंच गए हैं
(
फोटो: प्रफुल्ल बोरा)

जब हिमा के पिता से बात हुई तो वह बोले,' हिमा की कामयाबी पर हम सब बहुत खुश हैं। मेरे ख्याल से इस सफलता से पूरा असम ही खुश है। मैं अपने राज्य के लोगों से अपील करता हूं कि वे उसे आशीर्वाद दें ताकि वह और गोल्ड मेडल जीते और धींग के साथ राज्य को भी गौरवान्वित करे।'जब से हिमा के गांव के लोगों को यह खुशखबरी मिली है वे सभी उसके घर पर पहुंच गए हैं और माता—पिता को बधाइयां दे रहे हैं। पूरे गांव में जैसे उत्सव का सा माहौल है आखिर उनकी बेटी ने दूर देश में उनके गांव का नाम रोशन किया है। वे बार—बार एक ही बात दोहरा रहे हैं कि ऐसा पूरे असम में किसी ने नहीं किया। (कवीलिन काकोती स्वतंत्र पत्रकार हैं )


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