सीतापुर के 200 ग्रामीण युवाओं ने तैयार किया बीज बैंक

सीतापुर के 200 ग्रामीण युवाओं ने तैयार किया बीज बैंकग्रामीण युवाओं ने तैयार किया बीज बैंक 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सीतापुर। पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 200 युवाओं ने बीज बैंक की शुरुआत की है। किसी भी पौधे की नर्सरी को बाजार से खरीदने पर पैसे खर्च होते हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास इतना पैसा नहीं होता है कि वो बाजार से नर्सरी खरीद सकें और पौधारोपण करें। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण युवाओं ने बीज बैंक बनाकर खुद नर्सरी तैयार की और उसका पौधरोपण किया। इसके लिए तीन ब्लॉक के 10 गांव के युवा इस मुहीम में आगे आये हैं और बीज बैंक का निर्माण किया है।

सीतापुर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर कसमंडा ब्लॉक के हरैया गांव में रहने वाली तनुजा रावत (25 वर्ष) का कहना है, “गांव में अब पौधे बहुत कम हो गये हैं, अगर नर्सरी खरीदें तो बहुत महंगी मिलती है, इसलिए 20 लोगों ने मिलकर जून महीने में कई तरह के बीज घड़े में राख में मिलाकर रख दिए, पहली बारिश होने पर नर्सरी लगा दी है, पिछले एक साल में अपने गांव और आसपास 150 पौधे लगा चुके हैं।’’

वो आगे बताती हैं, “इन पौधों की देखरेख 20 लोग ही कर रहे हैं, देखादेखी गांव के लोग भी सहयोग कर रहे हैं अबतक नीम, जामुन, अर्जुन जैसे कई तरह के पौधे लगाये हैं, आने वाले समय में देशी बीजों को भी संरक्षित करेंगे।’’ तनुजा रावत जिले की पहली लड़की नहीं है जो इस मुहिम में शामिल है बल्कि तनुजा की तरह 200 लड़कियां और लड़के इस बीज बैंक और पौधारोपण की प्रक्रिया को आगे लेकर जा रहे हैं।

बीज बैंक से तैयार की नर्सरी और किया पौधारोपण

जिले के बिसुवां, सिधौली, कसमंडा ब्लॉक के 10 गांव तिवारीपुरवा, काशीपुर, सहजनपुर, बिजवामऊ, महारानीखेड़ा, मदारीपुर, हरिहरपुर, जमरखा, हरैया, गुलरिया गांव के युवाओं ने बीज बैंक बनायी है। ये युवा अबतक 10 हजार पौधे लगा चुके हैं जिसमे जामुन, आम, नीम, कंजी, अर्जुन, बेल, पपीता, तुलसी जैसे कई तरह के पौधे लगाये गये हैं।

इस बीज बैंक मे शामिल ललित कुमार (18 वर्ष) का कहना है, “पेड़-पौधे लगाना सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है, हम सबकी जिम्मेदारी है कि हमारे आसपास पेड़ पोधे रहें जिससे हर भरा रहे, बीजबैंक बनाने की शुरुवात कुछ लोगों से हुई थी आज देखादेखी हम सैकड़ों की संख्या में हो गये हैं, जो पौधे लगाता है उसकी देखरेख करना उसी की जिम्मेदारी होती है।’’

वो आगे बताते हैं, “इसमे हमारा कोई ज्यादा समय नहीं लगता है, पढ़ाई और घर के कामों के साथ-साथ पौधों की देखरेख बड़ी आसानी से कर लेते हैं, हम अपने स्कूल में भी पौधे लगायेंगे, आने वाले समय में हमारे सारे दोस्त पौधे लगाने और देशी बीज बैंक बनाने में शामिल हों ये हमारी कोशिश हैं।’’ इस गांव में रहने वाली आरती देवी (20 वर्ष) खुश होकर बताती हैं, “जो पिछली वर्ष पौधे लगाये थे अब वो बड़े हो गये हैं, देखकर खुशी होती है कि हमारे लगाये सैकड़ों पौधे आज हमारे ही गांव में तैयार हो गये हैं जिसके लिए हमारे कोई पैसे खर्च नहीं हुए हैं।’’

गर्मी के मौसम में इकट्ठा करते हैं बीज

जिले में पिछले 15 वर्षों से चार ब्लॉक में काम कर रही पेस संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, आजीविका जैसे मुद्दों पर काम कर रही हैं। इस संस्था की नेटवर्क कोऑर्डिनेटर वीना पाण्डेय बताती हैं, “नर्सरी खरीदने में बहुत पैसा खर्च होता था, इससे कैसे छुटकारा मिले इसके लिए बीज बैंक बनाने का विचार आया, आसपास जो बीज फैले पड़े रहते थे उसे ग्रामीण युवाओं ने एकत्रित करना शुरू किया और देखते ही देखते बीज बैंक तैयार कर दी।’’ वो आगे बताती हैं, “बारिश होते ही बीज से नर्सरी तैयार कर ली गयी है अब युवा इसे अपने-अपने गांव में लगाने का काम शुरू कर चुके हैं, ग्रामीण युवा ही पर्यावरण प्रदूषण को बचाने में आगे आयें ये हमारी कोशिश है और इसमे हम कामयाब भी हो रहे हैं।’’

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