कटीले तारों का शिकार हो रही छुट्टा गाय 

कटीले तारों का शिकार हो रही छुट्टा गाय कटीले तारों से घायल हुई गाय। 

रहनुमा बेगम, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

औरैया। योगी सरकार में गोकशी से गायों की कुछ हद तक जान बची हुई हैं, लेकिन जिले के किसान कटीले और ब्लेड वाले तार लगाकर अधमरा कर रहे हैं। तार से कटी गायें तड़प तड़प कर मर रही हैं। उनकी देखभाल करने वाले जिले में कोई नहीं है।

देशी गायों का दूध निकालने के बाद लोग खेतों में छोड़ देते हैं। उनकी परवाह तक करने वाला नहीं होता है। गोकशी से बची गाय किसानों द्वारा लगवाए गए कटीले तारों से बचती हुई नहीं दिखाई दे रही है। अगर खेत में गाय है तो किसान भी उसी तरफ से खदेड़ता है कि वह तार में फंस के घायल हो जाए और दोबारा खेत में आना बंद कर दे। ऐसे किसान गायों को ब्लेड और कटीले तार की तरफ खदेड़ते है जिससे गाय कट जाती है। बरसात के मौसम में उनके घाव भी नहीं सही हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में गायें तडप-तडप के मर रही हैं। जिले में प्रतिबंधित तार किसान लगा रहे हैं, जिस तरफ अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

खेत में लगे कटीले तारों से घायल हुई गाय।

इस बारे में जिलाधिकारी जय प्रकाश सागर ने बताया, "जिले के जिन किसानों ने खेतों पर कटीला और ब्लेड का तार लगा रखा है। उनकी जांच कराने के लिए थानाध्यक्षों से कहा गया है। जिस किसान के खेत में ब्लेड का ताला लगा हुआ मिलेगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।"

इन गाँवों में अधिक घायल हो रही गायें

जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर गाँव पढीन, 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे गाँव माल्हेपुर, दौलतपुर, सुरान, भरसेन, कखावतू, बमुरीपुर सहित दर्जनों ऐसे गाँव हैं जहां किसान साग-सब्जी की खेती करते हैं। बारी की खेती में किसान कटीला और ब्लेड का तार लगा रहे हैं। इसके अलावा चरी, मक्का, जुंडी के खेत में भी तार लगे हुए है, जिससे गाय घायल होकर तड़पती है और उसे देखने वाला कोई नहीं होता है।

जिले के किसानों को बैठक में आगाह कर दिया गया था कि खेत में तार लगाए लेकिन पतला वाला जो छत का जाल बांधने के काम आता है। कटीला और ब्लेड वाला तार कतई न लगाए। जिससे पशुओं की हानि हो। कटीले और ब्लेड के तार न लगाकर पशुओं की जान बचाए किसान।

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