आठवीं पास झोलाछाप खुद को बताते हैं बड़े से बड़ा सर्जन

Rajeev ShuklaRajeev Shukla   30 May 2017 11:17 AM GMT

आठवीं पास झोलाछाप खुद को बताते हैं बड़े से बड़ा सर्जनझोलाछाप डॉक्टरों की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंच रही है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कानपुर। अगर आपकी जानकारी में कोई ऐसा मरीज़ है जिसको डॉक्टर ने जवाब दे दिया हो तो निराश मत हो यहाँ पर ऐसे डॉक्टर है जो हर तरीके का इलाज़ करते है मर्ज चाहे जितनी भी गंभीर हो। वैसे शिक्षा के नाम पर तो आठवीं ही पास हैं और कारनामे ऐसे कि बड़े से बड़ा सर्जन भी उनके आगे बेकार हैं।

तमाम डिग्री रखने वाले भले ही बीमार की हालत देख उसे दूसरी जगह इलाज के लिए रेफर करते हों, लेकिन ये ऐसे हुनरमंद हैं कि मर्ज कैसा भी हो, मरीज किसी भी हालत में हो वे तुरंत इलाज करने में जुट जाते हैं। अब मरीज चाहे बचे या न बचे, लेकिन वे धड़ल्ले से लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। जी हां, ऐसे ही झोलाछाप डॉक्टरों की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंच रही है, मगर लोगों की जान जोखिम में डालने का धंधा वे अंजाम देते आ रहे हैं।

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कानपुर के बर्रा थानाक्षेत्र के रविदासपुरम में रहने वाले शिव बहादुर का बेटा विजय कुमार केबल ऑपरेटर का काम करता था। 13 अप्रैल को विजय के सीने में अचानक दर्द हुआ तो उसके परिजन उसे पड़ोस में ही रहने वाले डॉ. सचान के क्लीनिक ले गए। डॉ. सचान ने विजय को एक इंजेक्शन लगाया और घर जाने को कहा परिजन विजय को लेकर घर भी नहीं पहुंचे थे कि रास्ते में ही विजय ने दम तोड़ दिया। मृतक के पिता शिवबहादुर कहते हैं, ‘’डॉ. सचान ने गलत इंजेक्शन लगा दिया था, जिसकी वजह से मेरे बेटे की मौत हुई थी। विजय को किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी, बस उसके सीने में दर्द उठा था।”

पिछले वर्ष जब चारों ओर बुखार का प्रकोप फैला था तो गाँव कनेक्शन की स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट भी कानपुर के गाँव बिधनू के ऐसे ही एक झोलाछाप डॉक्टर का शिकार हो गई थीं। आज तक उस डॉक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कानपुर नगर के बीमा अस्पताल में भी एक ऐसा ही प्रकरण सामने आया था। मनु सिंह नाम का एक झोलाछाप प्रसूताओं का ऑपरेशन से प्रसव कराता है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से गई थी।

जानकर आपको ताज्जुब होगा कि मनु केवल आठवीं पास है। तमाम शिकायतों और मरीजों का मर्ज दूर करने के नाम पर उनकी जान जोखिम में डालने का काम ऐसे डॉक्टर अपनी दुकान खोलकर अंजाम दे रहे हैं। इनके पास कोई मेडिकल की डिग्री ही नहीं है और वो गाँव या गली मोहल्ले में सर्दी, जुखाम, बुखार के इलाज के साथ साथ ऑपरेशन भी करते हैं।

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क्या कहते हैं जिम्मेदार

कानपुर नगर के सीएमओ डॉ. आरपी यादव बताते हैं, “जो भी चिकित्सक इंडियन मेडिकल काउंसिल व सेंट्रल काउंसिल फार इंडियन मेडिसिन से पंजीकृत न हो वो सब झोलाछाप डॉक्टर की श्रेणी में आते हैं। साथ ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिनियम 1956 के शेड्यूल 1, 2 व 3 के तहत चिकित्सीय योग्यता न रखता हो, वह भी इसी की श्रेणी में आता है। किसी भी जिले के समस्त डॉक्टर का पंजीकरण उस जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में दर्ज होता है। अगर किसी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ शिकायत आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।”

‘सही गलत डॉक्टर की जानकारी नहीं हो पाती’

कानपुर नगर के भीतर गाँव ब्लाक के गाँव पासी खेडा के निवासी मातादीन मिश्रा (62 वर्ष) बताते हैं, “हम लोगों को तो इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि कौन सही डॉक्टर है और कौन झोलाछाप क्योंकि डॉक्टर अपनी डिग्री तो दिखाता नहीं है और अगर बीमार होने पर डॉक्टर घर आ कर इलाज कर दे तो इससे अच्छा क्या होता है हम लोगों के लिए।” हालांकि सरकार सीएचसी और पीएचसी के माध्यमों से ग्रामीण इलाकों में हर स्वास्थ्य सम्बंधित सुविधाएं उपलब्ध कराती है।

इसके बावजूद झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान हर जगह सजी हुई है। वहीं दूसरी ओर कानपूर नगर के शिवराजपुर ब्लाक के गाँव बड़ी तरी की कक्षा 12 की छात्रा ज्योति बताती हैं, “अब तो जगह-जगह पर स्वास्थ्य केंद्र खुल गए हैं। ऐसे में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करने की बजाय लोग स्वास्थ्य केंद्र जाते हैं, लेकिन फिर भी ये डॉक्टर आज भी घर-घर में अपनी पहुंच बनाए हुए हैं। ऐसे में सरकार को इनके खिलाफ अभियान चलाकर इनको पकड़ना चाहिए।”

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