मुआवजा नहीं मिला तो पाट दिया माइनर

मुआवजा नहीं मिला तो पाट दिया माइनरलोगों ने माइनर को पाटा

अजय कुमार शर्मा, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

धर्मापुर(जौनपुर)। धर्मापुर ब्लॉक के करीब 50 गांव को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने वाली गौरा तारा माइनर का अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है। दरअसलकई ऐसे किसान हैं, जिनके खेतों से होते हुए नहर गई। उन्हें उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। इसलिए उन लोगों ने माइनर पाटा दिया है। यही वजह से आगे के गांव के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार एसडीएम से गुहार लगाई गई लेकिन कोई एक्शन नहींलिया गया।

शारदा सहायक खंड से जोड़कर गौराबादशाहपुर ब्लॉक में करीब 50 गांव को जोड़ती हुई 12 किलोमीटर लंबी नहर वर्ष 1987 में खोदी गई थी। इससे ग्रामीणों को काफी राहतमिली और सिंचाई के लिए पानी इसी नहर से लोगों को मिल रहा था। इस नहर को खोदने में
विभाग ने किसानों की जमीन का इस्तेमाल किया था।

इसके लिए उन्हें मुआवजा देने की बात भी कही गई थी। हालांकि उन्हें मुआवजा नहीं मिला। मुआवजा न मिलने वाले गांवों में गौरा, करमदासपुर, पिलखिनी, सरसौड़ा, पारा, रामपुर गांव के किसान शामिल हैं। किसानों ने कई बार एसडीएम और आला अधिकारियों गुहार लगाई लेकिन जब बात नहीं बनी तो लोगों ने माइनर को काट दिया।

माइनर काटकर लोगों ने अपनी जमीन को खेत में मिला लिया है। इसकी वजह से माइनर मनिहागोविंदपुर तक ही सीमित रह गया है। जबकि आगे के गांव जैसे भुईली,भदेवरा, देवाकलपुर, काकोरी, धानपुर, सुरैला उमरी, तारा, पौनी आदि गांव के लोगों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। यहां के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रहीहै।

सुरैला गांव के अरुण सिंह (54वर्ष) का कहना है,“ पिलखिनी, सरसौड़ा आदि गांव के लोगों को माइनर के लिए जमीन देने के बावजूद मुआवजा नहीं मिला। इस वजह से वहांकई लोगों ने नहर को बीच से काट दिया है। इसलिए हम लोगों के गांव तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।”

वहीं उमरी गाँव निवासी महंत गजराज (60वर्ष) का कहना है,“ माइनर बीच से कट जाने से सिंचाई के लिए परेशानी होती है। विभागीय अधिकारियों के अलावा कई बारएसडीएम से भी शिकायत की गई लेकिन माइनर की दोबारा खुदाई नहीं हुई है।”

वहीं तारा के बंशु यादव (45वर्ष) ने बताया,“ प्रशासन की लापरवाही की वजह से परेशानी
हम किसानों को उठानी पड़ रही है। ” सिंचाई विभाग के जेई अवधेश कुमार बताते हैं, “माइनर की खोदाई के लिए कई किसानों ने प्रार्थनापत्र दिया है। आला अधिकारियों के निद्रेश पर जल्द ही माइनर की दोबारा खोदाई कराई जाएगी।”

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