बाराबंकी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जाने के तीनों रास्तों पर दबंगों का कब्जा

बाराबंकी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जाने के तीनों रास्तों पर दबंगों का कब्जाअसुविधाओं से जूझ रहा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय।

सतीश कश्यप

बाराबंकी। इन दिनों लोगों का रूझान आयुर्वेद की ओर बढ़ा है। मगर जड़ी-बूटी के जरिए इलाज की जाने वाली इस पद्धति को सरकारी विभागों की अनदेखी ही पलीता लगा रही है। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की असलियत कुछ यही बयां कर रही है।

खिड़कियों के शीशे तक गायब

राजकीय आयुर्वेदिक हॉस्पिटल जिलाधिकारी आवास के पास स्थित आफीसर्स क्लब के ठीक सामने आवास विकास कालोनी में स्थित है। मगर 13 हजार रुपए प्रतिमाह के किराए पर चलने वाले इस अस्पताल की ओर आने वाले तीनों रास्तों पर अवैध कब्जा किया जा चुका है। खिड़कियों के शीशे भी टूट चुके हैं। हॉस्पिटल परिसर में सिर्फ गंदगी का साम्राज्य है।

आने-जाने के रास्ते पर है दबंगों का कब्जा।

शिकायत करने पर भी नहीं हुआ समाधान

25 बेड वाले इस राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आशा रावत का कहना है, "मैंने रास्तों में लोगों द्वारा कब्जा किये जाने की शिकायत अपने सम्बंधित क्षेत्रीय अधिकारी राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय प्रभारी भोलानाथ मिश्रा से कई बार की लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका।" वहीं, भोलानाथ मिश्रा ने बताया, "समय-समय पर हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया जाता है। अगर रास्ते में किसी ने अतिक्रमण कर रखा है तो हम इस सम्बन्ध में पहले वहां के लोगों से बात करेंगे और जब वे लोग फिर भी अतिक्रमण नहीं हटाएंगे तो इसकी शिकायत उपजिलाधिकारी नवाबगंज और जिलाधिकारी अजय यादव से लिखित रूप में की जाएगी।"

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आशा रावत।

चौतीस बरस से किराए पर चल रहा अस्पताल

इस बारे में हॉस्पिटल के चीफ फार्मासिस्ट गया प्रसाद दीक्षित से की गई तो उन्होंने कहा, "आयुर्वेदिक हॉस्पिटल की जमीन विकास भवन के पास है। बजट आते ही उसके निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। हॉस्पिटल वर्ष 1982 से किराए पर चल रहा है। उस समय बिल्डिंग का किराया बहुत कम था लेकिन आज इसका किराया 13, 500 रुपये हर महीने विभाग से दिया जाता है।"

हॉस्पिटल न होता तो दबंग कर लेते इस पर भी कब्जा

स्टाफ नर्स परमावती पाठक बताती हैं, "उनकी पहली नियुक्ति इसी हॉस्पिटल में हुयी थी। हॉस्पिटल के सामने एक तालाब था जहां आज लोगों ने मकान बना रखे हैं।" उन्होंने बताया, "यह मकान राम अवतार यादव का है। उनकी मौत हो चुकी है। उनकी पत्नी मीरा यादव लखनऊ में रहती हैं और उनका बेटा हॉस्पिटल का किराया लेने आता है। उन्होंने बताया अगर हॉस्पिटल इस मकान में न होता तो लोग इस पर भी कब्जा कर लेते।"

स्टाफ होने के बावजूद गंदगी का अंबार

वैसे हॉस्पिटल में सहायक डॉक्टर शालिनी सिंह, सहायक फार्मासिस्ट रमेश रमेश चंद्र वर्मा और एक अन्य नर्स सरोज शुक्ला भी यहां तैनात हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक डॉक्टर साधना त्रिपाठी भी हॉस्पिटल में अटैच है। हॉस्पिटल में वार्ड ब्वॉय सुरेश चंद्र व वार्ड ब्वॉय रामदास के अलावा एक चौकीदार बालकराम भी तैनात है जबकी सफाई व्यवस्था सुषमा और धोबी का काम धर्मावती करती है। बावजूद इसके हॉस्पिटल परिसर में चारों तरफ गंदगी ही गंदगी नजर आती है।

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