चार रुपए के कचरे से बनेगा दो वक्त का खाना

चार रुपए के कचरे से बनेगा दो वक्त का खानाGaon Connection

अंबाती रोहित

धनबाद (झारखंड)। किचन से निकले कचरे को अभी तक आप कूड़ेदान में फेंक देते होंगे लेकिन आप चाहें तो इस कचरे से खाना भी बना सकते हैं। किचन से सब्जी आदि के अपशिष्ट को बायोगैस में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया से सिर्फ चार रुपए में आप के घर में दो वक्त का खाना बन सकता है।

झारखंड में धनबाद के इंजीनियरिंग के कुछ छात्रों ने एक उपकरण बनाया है, जिससे कचरे को बायोगैस में तब्दील किया जा सकता है। पायलट प्रोजेक्ट के रुप ये उपकरण सफल साबित हुआ है। टंकी नुमा इस उपकरण में रसोई के चार से छह किलो जैविक कचरे को से इतनी गैस बनाई जा सकती है कि एक बर्नर वाला चूल्हा तीन घंटे जलकर चार व्यक्तियों के लिए दो बार का खाना बना सकता है।

इंजीनियरिंग आखिरी वर्ष के छात्र और टोल वेस्ट सॉल्यूसन नाम से अपनी कंपनी शुरू करने वाले सौरभ कुमार बताते हैं, “चार से छह किलोग्राम कचरों से आधा किलो एलपीजी के बराबर ऊर्जा मिलेगी, जिसकी लागत मुश्किल से चार रुपए होगी।”

सौरभ आगे बताते हैं, “बायो गैस प्लांट स्थापित करने के लिए पहले 15 हजार रुपए खर्च करने होंगे। अभी फंडिंग की कमी के कारण बड़े पैमाने पर इस प्रोजेक्ट को लागू नहीं किया जा रहा है। धनबाद में इसकी सफलता के बाद पूरे शहर में बायो गैस प्लांट के जरिए खाना बनाने की सुविधा दी जाएगी।”

सौरभ का यह उपकरण उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जिनके यहां किचन से कचरा नहीं निकलता है ऐसे लोगों को सौरभ खुद जैविक कचरा उपलब्ध कराएंगे। वो बताते हैं, “चार किलो कचरे से हर दिन 1000 लीटर बायो गैस तैयार होगी। हालांकि इसकी कैलोरेसिक वैल्यू काफी कम होगी। इस वजह से हर दिन चार व्यक्तियों के लिए दो बार खाना पकाने में 1000 लीटर बायो गैस खत्म हो जाएगी।”

यह ध्यान रखना होगा कि इस कचरे में नींबू और प्याज के छिलके न हों। प्रोजेक्ट से जुड़नेवाले परिवारों को वे नियमित रूप से जरूरत के हिसाब से कचरा पहुंचाते हैं। यह उपकरण पूरी तरह वातावरण के अनुकूल है। इससे प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। सौरभ के मुताबिक उनका बॉयो गैस प्लांट न सिर्फ महंगी एलपीजी से राहत दिलाएगा बल्कि रोजाना कचरा फेंकने और उसके निष्पादन से भी निजात दिलाएगा।

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