हरियाणा के गाँव के छोरे विजेंद्र सिंह के बाक्सर बनने की कहानी

हरियाणा के गाँव के छोरे विजेंद्र सिंह के बाक्सर बनने की कहानी

नई दिल्ली। हरियाणा के छोटे से ज़िले भिवानी से निकलकर आज बॉक्सर विजेंदर सिंह पूरी दुनिया में पर गए हैं। एक बार फिर से गाँव के इस देसी छोरे ने साबित कर दिया कि वो दुनिया के सबसे बेहतरीन बॉक्सर्स में से एक हैं। विजेंद्र सिंह ने ऑस्ट्रेलियाई बॉक्सर कैरी होप को हराकर WBO एशिया पैसिफिक सुपर मिडिलवेट मुक़ाबले का खिताब अपने नाम कर लिया है।

विजेंद्र ने दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम 30 से अधिक मैचों का एक्सपीरिएंस रखने वाले कैरी होप को 10 राउंड के मुकाबले में 98-92, 98-92, 100-90 के स्कोर से मात दी। बतौर प्रोफेश्नल बॉक्सर ये विजेंदर की सातवीं जीत है। इससे पहले हुए सभी छह मुकाबलों में विजेंदर ने अपने अपोनेंट्स को नॉकआउट किया था लेकिन कैरी होप को हराने में उन्हें खासी मशक्कत करनी पड़ी। विजेंदर और कैरी होप के मुक़ाबले को देखने के लिए देश की दिग्गज हस्तियां शामिल हुई थीं। मसलन सुरेश रैना, वीरेंद्र सहवाग और राहुल गांधी। विजेंदर ने कैरी होप को नॉकआउट करने की काफ़ी कोशिश की लेकिन वो नाक़ाम ही साबित हुए क्योंकि कैरी होप भी एक शानदार बॉक्सर हैं। 

कैसा रहा है कैरी होप का रिकॉर्ड

कैरी होप की 31 मुकाबलों में ये 8वीं हार थी। कैरी होप ने 23 जीत हासिल की है। इनमें से दो बार वो अपने विपक्षी खिलाड़ी को नॉकआउट करने में सफल रहे हैं जबकि 8 में से 4 बार वो खुद नॉकआउट हुए हैं।

जीत के बाद विजेंदर ने क्या कहा 

 ''धन्यवाद भारत। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। ये हमारे देश की प्रतिष्ठा का सवाल था। अंतत: हमने कर दिखाया। होप ने बेहतरीन खेल दिखाया।''

विजेंदर का शानदार बॉक्सिंग करियर

2008-के बीजिंग ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल

2009-मिलान वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल

2006-कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल

2014-कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल

2010-कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल

2010-एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल

2006-एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल

2007-एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल

2009-एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल

विजेंदर सिंह का गाँव कनेक्शन

विजेंदर सिंह का जन्म साल 29 अक्टूबर 1985 को हरियाणा के भिवानी ज़िले के कलुवास गाँव में हुआ था। विजेंदर सिंह का पूरा नाम विजेंदर सिंह बेनीवाल है। विजेंदर के पिता महिपाल सिंह बेनीवाल हरियाणा रोडवेज़ में बस ड्राइवर थे। विजेंदर के पिता महिपाल सिंह ओवर टाइम किया करते थे ताकि वो विजेंदर और उनके भाई की पढ़ाई का खर्चा उठा सकें। विजेंदर की शुरुआती पढ़ाई कलुवास गाँव के सीनियर सेकेंड्री स्कूल से पूरी की और वैश कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।

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