ताज़ा ख़बर

नमक की कमी नहीं है देश में, जमाखोरों ने उठाया टैक्स फ्री होने का फायदा

लखनऊ। देश में गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हुआ कि देश में नमक की कमी हो गई है। कुछ ही देर में लोगों की भीड़ दुकानों पर नमक खरीदने को उमड़ पड़ी। बढ़ती भीड़ को देख लोगों ने इसे अवैध कमाई का जरिया बना लिया। नमक के एक किलोग्राम का पैकेट 150 से 400 रुपए तक में बेचा गया। हालांकि, हकीकत ये है कि देश में नमक की कोई कमी नहीं है। यह पूरा खेल इसके टैक्स फ्री होने के चलते किया गया।

गुरुवार की रात राजधानी की कई दुकानों में नमक के लिए लग गई जनरल स्टोर्स के बाहर लंबी कतार।

...तो इसलिए हुआ बाजार में नमक तेज

जानकारों के मुताबिक, देश में नमक को सर्वसुलभ रखने के लिए टैक्स फ्री रखा गया है। ऐसे में इसकी कालाबाज़ारी से उपजाई रकम को भी टैक्स फ्री ही माना जाएगा। देश में बड़ी नोटों यानी 500 और 1000 रुपए की नोट को कैंसिल करने के बाद लोगों में इन नोटों के प्रति लगाव खत्म हो गया है। यही कारण है कि लोगों ने एक पैकेट नमक खरीदने के लिए 500 रुपए की नोट को खर्च करने में देरी नहीं की। अफवाह भी ऐसी कि देश में नमक ही खत्म हो गया है। जाहिर है लोगों में डर बैठ गया कि इससे तो किचन से स्वाद ही गायब हो जाएगा। बिना नमक के गुजारा भी कैसे होगा। दुकानदारों ने नमक के पैकेट के रेट बढ़ाकर बड़ी मात्रा में बड़े नोट जमा कर लिए। हालांकि, लोगों में गहराते अफवाह को देखते हुए प्रशासन की ओर से कड़े कदम उठाए गए। मार्केट बंद करा दिए गए। नमक की कमी के मैसेज को अफवाह बना दिया गया।

ढाई लाख की छूट का नाजायज फायदा

दरअसल, टैक्स गुरुओं का भी यही कहना है कि एक आदमी ढाई लाख रुपए तक की रकम को बिना किसी दिक्कत के बैंक में अपना आधार कार्ड दिखाकर जमा कर सकता है। यानी उसे व्हाइट बना सकता है। इन हालातों में नमक के नाम पर जुटाई गई इस रकम को बड़ी आसानी से दुकानदार अपने व अपने परिजनों व परिचितों के नाम पर बैंक में जमा कर सकते हैं। टैक्स फ्री उत्द होने के चलते इसकी कमाई को टैक्स के दायरे से बाहर ही रखा जाता है। गुरुवार को देश में नमक के इसी गुण को कालाबाजारियों ने कैश किया। हालांकि, टैक्स गुरुओं ने इस बात का शक जरूर जताया है कि इस क्रम में अब अन्य टैक्स फ्री उत्पादों की कमी का रोना रोकर बाजार से बड़ी मात्रा में रकम को जुटाया जा सकता है।

देश के कई राज्यों में फैला है नमक का कारोबार। (गूगल इमेज)

जानें देश में नमक के उत्पाद का सच

दुनिया में भारत को नमक के बड़े उत्पादक होने का दर्जा प्राप्त है। यूएस और चीन के बाद भारत ही तीसरे पायदान पर आने वाला ऐसा देश है जो नमक को प्रचूर मात्रा में निर्यात करने का गौरव हासिल करता है। इन हालातों में यह कहना कि देश में नमक की कमी है, काफी हास्यास्पद है। भारत देश औसतन हर वर्ष 148 लाख टन नमक निर्यात करता है। देश में नमक के कारोबार की व्यापक मजबूती को देखते हुए ही महात्मा गांधीजी ने नमक आंदोलन छेड़कर ब्रिटिश सरकार की चूलें हिला दी थीं। देश में समुद्र तट के किनारे बसे राज्यों में बड़ी मात्रा में नमक का उत्पादन किया जाता है। इनमें गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गोआ सहित राजस्थान में नमक का व्यापक पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। इनमें से गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान में इन राज्यों की जरूरत से कहीं ज्यादा नमक का उत्पादन किया जाता है। देश से नमक निर्यात करने के मामले में ये राज्य क्रमश: 70, 15 और 12 फीसदी तक नमक निर्यात करने में योगदान करते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में 11 हजार 799 साल्ट उत्पादक छोटी-बड़ी कंपनियां कार्य कर रही हैं। देश में करीब 6.09 लाख एकड़ के क्षेत्रफल में नमक का उत्पादन किया जाता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि देश में 87.6 फीसदी नमक उत्पादन का कार्य छोटे उत्पादक कर रहे हैं। ये छोटे उत्पादक करीब 100 एकड़ के क्षेत्रफल में नमक का उत्पादन करते हैं। वहीं, मात्र 5.8 फीसदी बड़े नमक उत्पादकों ने करीब 100 एकड़ के क्षेत्रफल में अपना कारोबार फैला रखा है। इससे इतर 6.6 फीसदी नमक उत्पादक 10 से 100 एकड़ के क्षेत्रफल में नमक उत्पादन का बीड़ा उठा रखा है। हमारे देश से नमक का खरीदने वाले देशों में जान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, यूएई, वियतनाम और कतर आदि शामिल हैं। देश में नमक के कारोबार से जुड़कर करीब 1.11 लाख मजदूर अपना परिवार चला रहे हैं।

जमीन से एक मु्ट्ठी नमक उठाकर महात्मा गांधीजी ने बदल दी देश की तकदीर। (साभार: गूगल इमेज)

इतिहास में भी भारतीय नमक की रही है गूंज

नमक अकेला ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसने भारतीयों के लिए औपनिवेशिक शासनकाल से मुक्ति का रास्ता तैयार किया था। अंग्रेजों के लिए नमक ही वह रास्ता था, जिससे उन्होंने भारत में अपना कब्जा जमाया। रॉय मॉक्सहम ने अपनी पुस्तक ‘द ग्रेट हेज ऑफ इंडिया’ में वर्णन किया है कि उन्हें अंग्रेजों द्वारा अविभाजित भारत में ढाई हजार मील लंबी बाड़ लगाने के प्रमाण मिले हैं। ये वे रास्ते हैं, जहां नमक तैयार किया जाता था। 1857 की पहली सशस्त्र क्रांति से पहले भी गुजरात में नमक मुक्ति के लिए आंदोलन हो रहे थे। गुजरात के इतिहासकार बताते हैं कि 1844 में इसे लेकर इतनी बड़ी हड़ताल हुई थी कि उसके समर्थन में सभी दुकानें बंद कर दी गई थीं। उस समय अंग्रेजों ने प्रति मन नमक पर एक रुपए कर लगा दिया था जबकि अंग्रेजों के लिए नमक ही वह रास्ता था, जिससे उन्होंने भारत में अपना कब्जा जमाया। इस इतिहास की जानकारी देते हुए रॉय मॉक्सहम अपनी पुस्तक ‘द ग्रेट हेज ऑफ इंडिया’ में बताते हैं कि उन्हें अंग्रेजों द्वारा अविभाजित भारत में ढाई हजार मील लंबी बाड़ लगाने के प्रमाण मिले हैं। ये वे रास्ते हैं, जहां नमक तैयार किया जाता था। 1857 की पहली सशस्त्र क्रांति से पहले भी गुजरात में नमक मुक्ति के लिए आंदोलन हो रहे थे। गुजरात के इतिहासकार बताते हैं कि 1844 में इसे लेकर इतनी बड़ी हड़ताल हुई थी कि उसके समर्थन में सभी दुकानें बंद कर दी गई थीं। उस समय अंग्रेजों ने प्रति मन नमक पर एक रुपए का कर लगा दिया था। यानी नमक के उत्पादन को लेकर भारत हमेशा ही सफलता के कई कीर्तिमान रच चुका है। ऐसे में गदेश में नमक की कोई कमी नहीं है। लोगों को सोशल मीडिया पर प्रचारित किए जा रहे अफवाह वाले संदेशों पर गौर नहीं करना चाहिए।