टीचर्स डायरी: 'उस छोटी सी बच्ची की सीखने और समझने की ललक आज भी मुझे याद है'

गाँव कनेक्शन की इस मुहिम टीचर कनेक्शन के जरिए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के लकौड़ा प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक हिमांशु वर्मा अपना अनुभव साझा कर रहे हैं।

Himanshu VermaHimanshu Verma   21 Jan 2023 11:02 AM GMT

टीचर्स डायरी: उस छोटी सी बच्ची की सीखने और समझने की ललक आज भी मुझे याद है

एक बच्ची की स्मरण क्षमता ने मुझे उस वक्त प्रभावित किया जब बच्ची के आग्रह पर हमने 2 पेज की स्पीच उसे लिखकर दिया और अगले ही दिन गणतंत्र दिवस पर बच्ची ने अपने लड़खड़ाते अंदाज में उस स्पीच को कार्यक्रम में सुनाया तो लोगों ने ताली बजाकर उसका स्वागत किया।

2018 में मुझे अध्यापक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और मेरी पहली पोस्टिंग रूरल इलाके में हुई जहां पर बहुत निम्न आय के लोग रहते हैं बच्चों को पढ़ाने लिखाने में कोई खास रुचि नहीं लेते हैं स्कूल भेजना तो उनका सिर्फ काम पर जाने के लिए बच्चे इधर उधर ना घूमे स्कूल में रहे शायद इतना ही लेना होता है

जब हमारी ग्रामीण क्षेत्र के लकौड़ा प्राथमिक विद्यालय में पोस्टिंग हुई तो बच्चों का शैक्षिक स्तर बहुत ही निम्न था। फिर हमने और हमारी जो सहयोगी अध्यापक टीम है, लगातार नवाचार और बच्चों की साइकोलॉजी को समझकर और अलग-अलग कंसेप्ट में नए-नए तरीकों के साथ खेल खेल कर पढ़ाने से बच्चो की उपस्थिति और अधिगम स्तर बढ़ाया है।

जिस गाँव में हमारा विद्यालय हैं वहां के ही पवन सिंह जो बीपीएल श्रेणी में आते हैं। मेहनत मजदूरी करके परिवार चला रहे हैं उनके दो लड़कियां हैं एक लड़की हमारे विद्यालय में कक्षा दो की छात्रा थी श्रद्धा सिंह 26 जनवरी आने वाली थी तो सभी बच्चे तैयारी कर रहे थे श्रद्धा हमारे पास आई और कहने लगी गुरु जी हमें भी कुछ सुनाना है हमें लिख दीजिए छोटी बच्ची थी इसलिए हमने एक छोटी सी कविता लिख दी। वो दोबारा हमारे पास आई और कहने लगी हमें कुछ बड़ा लिख कर दो फिर हमने 2 पेज का गणतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में स्पीच लिखकर दी मुझे नहीं विश्वास था की एक रात में ही ये छोटी बच्ची इसे याद करके और सुना पाएगी। लेकिन बच्ची की जिद थी इसलिए हमने लिख कर दिया सुबह जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो श्रद्धा ने पूरी स्पीच दी जिसे सुनकर लोग तालियां बजाने लगे।

हमने विद्यालय के भौतिक परिवेश को सुधारने के लिए ग्राम प्रधान का सहयोग लिया गया और कायाकल्प योजना से विद्यालय का कायाकल्प हुआ। आज विद्यालय के मुख्य भवन जो काफी अव्यवस्थित व जर्जर उसका पुनः कायाकल्प हो गया है। कक्षाओं में टाइलीकरण हो गया है। खिड़की व दरवाजों की मरम्मत हो गई है। पानी के लिए सबमर्सिबल पंप व शुद्ध पानी के लिए RO का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों की रीडिंग क्षमता का विकास करने के लिए सक्रिय पुस्तकालय का प्रयोग किया जा रहा है।अलग अलग बच्चे में अलग अलग प्रतिभाएं है हम सभी उनको निखारने का पूर्ण प्रयास करते हैं।

कुछ बच्चे आर्ट बहुत अच्छी बनाते हैं लेकिन उनके माता पिता उन्हें आर्ट कॉपी व कलर खरीद कर देने में सक्षम नहीं हैं, ऐसे बच्चों को कॉपी व कलर वो स्वयं उपलब्ध करवा देते हैं जिससे उनकी प्रतिभा का ह्रास न हो।

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