घाघरा पर यहां पुल बन जाए तो संवर जाए लाखों लोगों की जिंदगी

घाघरा पर यहां पुल बन जाए तो संवर जाए लाखों लोगों की जिंदगीबाराबंकी और बहराइच की सैकड़ों ग्राम पंचायतों के लोग हेतमापुर में पुल को बनाने की कर रहे हैं मांग। सभी फोटो- महेंद्र पांडेय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाराबंकी के जिस हेतमापुर इलाके में पहुंचने वाले हैं गांव कनेक्शन वहां के हालात को लेकर लगातार ख़बर लिखता रहा है। यहां घाघरा के चलते सैकड़ों गांव टापू बन जाते हैं.. लोग कई वर्षों से बाराबंकी और बहराइच को जोड़ने वाले पुल की मांग कर रहे थे.. आज सीएम योगी वहां पहुंचने वाले हैं, लोगों को उम्मीद हैं. कोई अच्छी ख़बर मिलेगी। ये ख़बर विधानसभा चुनाव के दौरान गांव कनेक्शऩ ने लिखी थी।

हेतमापुर (बाराबंकी)। बाराबंकी से बहराइच को सीधे जोड़ने के लिए घाघरा की तराई में बसे हजारों लोग वर्षों से हेतमापुर में पुल बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक से गुहर लगाई है, लेकिन निराशा हाथ लगी है। इलाके के लोगों ने इस बार चुनाव में फिर इसे मुद्दा बनाया है।

बाराबंकी और बहराइच जिले की करीब 40 ग्राम पंचायतों को प्रभावित करने वाले इस पुल को लेकर ग्रामीणों की निगाहें अब विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के वादों पर टिकी हैं। ग्रामीणों का आरोप अब तक उन्हें सिर्फ वादे ही मिले हैं। लखनऊ से करीब 85 किलोमीटर दूर बाराबंकी जिले के सूरतगंज ब्ल़ॉक के हेतमापुर इलाके में चुनावी माहौल में बाराबंकी-बहराइच को जोडने के लिए घाघरा पर पुल की मांग जोर पकड़ रही हैं। पिछले वर्ष की तरह चुनाव में मुद्दा यही पुल होगा। इलाके के लोगों का कहना है कि अभी बहराइच जाने के लिए 80-90 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, अगर पुल बन जाए तो दूरी कुछ किलोमीटर तक सिमट जाएगी।

हर साल घाघरा कहर ढाती है। गांव के गांव उजड़ जाते हैं। पुल बन जाए तो एक लाख लोगों की आधी समस्या हल हो जाएगी। न पढ़ाई के साधन हैं और न रोजगार का कोई जरिया। शादियां तक होने में दिक्कत होती है।
अंबरीश अवस्थी, निवासी पांडेपुर, (हेतमापुर) बाराबंकी

हर बाढ़ में डूब जाता है पूरा इलाका। सैकड़ों गांवों विकास से वंंचित हैं।

पांडेपुर (हेतमापुर) निवासी किसान अंबरीश कुमार अवस्थी बताते हैं, “हर साल घाघरा की बाढ़ कहर ढाती है। गांव के गांव उजड़ जाते हैं। पुल बन जाए तो एक लाख लोगों की आधी समस्या हल हो जाएगी। मैं परास्नातक हूं लेकिन अब खेती करता हूं क्योंकि इसके अलावा करने को इस इलाके में कुछ है नहीं।” लोगों ने सीएम से लेकर पीएम तक हस्ताक्षर अभियान चलाकर अपील भी है। वर्ष 2013 में क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों को उस वक्त पंख लगे जब ग्रामीण इलाकों में बैंकिग सेवाओँ का हाल जानने और एक बैंक का उद्धघाटन करने भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन गर्वनर डी. सुब्बाराव लालपुर करौता पहुंचे थे। उस वक्त हजारों ग्रामीणों ने एक सुर में इसकी मांग की थी। मामला लखनऊ तक पहुंचा और प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने की बात हुई लेकिन फिर कई वर्ष बीत गए।

ये बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है, अरबों रुपये खर्च होंगे। ऐसे में देखा जा रहा है क्या निश्चित आबादी के लिए इतने रुपये खर्च करना कहां तक जरुरी है। डीपीआर मिल चुकी है रुरल इंजीनियर विभाग की नई गाइडलाइन के मुताबिक अध्ययन जारी है।
एस उस्मानी, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग

इस बारे में बात करने करने पर बाराबंकी में लोक निर्माण विभाग खंड-3 के अधिशासी अभियंता एस. उस्मानी बताते हैं, ये बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है, अरबों रुपये खर्च होंगे, करीब तीन किलोमीटर का पुल होगा और 10 किलोमीटर की सड़क बनेगी। ऐसे में देखा जा रहा है क्या निश्चित आबादी के लिए इतने रुपये खर्च करना कहां तक जरुरी है।” अपनी बात को सरल करते हुए वो फोन पर आगे बताते हैं, सेतु निगम ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेज दी है। रुरल इंजीनियर विभाग की नई गाइडलाइंस के मुताबिक उसकी फिजिबिलिटी देखी जा रही है। इसलिए विभिन्न एजेंसियां देख रही हैं कि खर्च के अनुपात में लाभ कितने लोगों को होगा।” सरकारी विभाग के मुताबिक 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है उद्योग और संसाधन विहीन इस इलाके के लिए यही पुल विकास की राह खोलेगा।

बात कुछ हजार ग्रामीणों या पुल पर आने वाले खर्च की नहीं बल्कि बाराबंकी और बहराइच के इस पिछड़े इलाके के विकास का है। पुल नहीं है तो सड़क नहीं है, सड़क नहीं काम-धंधा नहीं है इसलिए ये इस पुल पर ही हमारी जिंदगी टिकी हुई है।
राम शंकर (48 वर्ष) बबुरिया गांव, सूरतगंज, बाराबंकी

पुल के लिए बाराबंकी से लेकर लखनऊ तक के चक्कर लगाने वाले बबुरिया गांव के निवासी राम शंकर (48 वर्ष) बताते हैं, “बात कुछ हजार ग्रामीणों या पुल पर आने वाले खर्च की नहीं बल्कि बाराबंकी और बहराइच के इस पिछड़े इलाके के विकास का है। पुल नहीं है तो सड़क नहीं है, सड़क नहीं काम-धंधा नहीं है इसलिए ये इस पुल पर ही हमारी जिंदगी टिकी हुई है।”

वो आगे बताते हैं, “हर बार चुनाव में नेता पुल बनवाने की बात करते हैं 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पीएल पुनिया ने भी वादा किया था लेकिन पूरा नहीं हुआ। इस बार हम उसी को वोट देंगे जो हमारी मांग को सुनेगा।”

पिछले कई वर्षों से बाराबंकी और बहराइच के ग्रामीण पुल बनाने की मांग कर रहे हैं।

बाराबंकी के आसपास के लोग अभी बहराइच जाने के लिए वायारामनगर और चौकाघाट होकर बहराइच और श्रावस्ती जाते हैं, जबकि नदी और रेता पार करने के कुछ किलोमीटर बाद बहराइच शुरु हो जाता है। अंबरीश बताते हैं, इस इलाके को गांजर कहा जाता है, पढ़ाई-लिखाई में तो समस्या है ही लोगों की शादियां होने में दिक्कतें आती हैं। ये तो सुकून है कि इस वर्ष नदी के इस तरफ बंधा बन गया, उससे थोड़ी राहत मिली है,लेकिन पुल बन जाए तो कई दोनों जिलों के लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए साधन मिल जाएंगे।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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